पंजाब के किसान एक बार फिर सड़कों पर उतर रहे हैं। आज, 3 घंटे का ‘रेल रोको’ आंदोलन चलाया जाएगा। आजाद किसान मोर्चा (AKM) के नेतृत्व में, किसान दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक राज्य के मुख्य रेल ट्रैकों पर चक्का जाम करेंगे। उनकी मुख्य मांग है कि गेहूं की खरीद फौरन शुरू की जाए, ताकि उन्हें होने वाले नुकसान से बचा जा सके। किसान प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
केंद्र सरकार की किरकिरी
किसानों का आरोप है कि केंद्रीय एजेंसियों की लापरवाही के चलते गेहूं की खरीद में हो रही देरी के कारण मंडियों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इस वजह से उनके पास बड़ी मात्रा में अनाज पड़ा हुआ है, लेकिन सरकारी खरीद नहीं हो रही है। इससे किसान आर्थिक और मानसिक रूप से प्रेशान हो रहे हैं। एक केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि FCI ने नियमों में ढील देने की सिफारिश की है, लेकिन अब तक किसान संगठन इस पर संतुष्ट नहीं हैं।
मंत्री का महत्वपूर्ण ऐलान
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि गेहूं की फसल में बेमौसम बारिश के कारण हुए बदलाव को देखते हुए, भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने खरीद नियमों में ढील देने की सिफारिश की है। उनका कहना है कि किसानों को बाजार में किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा और फसल का हर दाना सही तरीके से खरीदा जाएगा।
किसान संघों की स्थिति
किसान संघों का कहना है कि प्रशासनिक सुस्ती के चलते उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल रहा है। पहले भी ऐसे आंदोलनों की वजह से सरकार पर दबाव पड़ा है। किसानों का मूड काफी गंभीर है और उनका कहना है कि स्थिति को देखते हुए आज का आंदोलन महत्वपूर्ण है। केंद्रीय मंत्री का ऐलान होने के बावजूद, किसानों ने कहा है कि वे आज का आंदोलन करेंगे और इसे स्थगित नहीं करेंगे।
FCI के नियम और किसानों की परेशानी
FCI के नियम गेहूं की खरीद में बड़ी बाधा बन गए हैं। गेहूं के दाने की नमी, रंग, और क्वालिटी चेक करने के बाद ही खरीद होती है। किसान संगठनों का कहना है कि इस बार मार्च-अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश और फरवरी में पड़े गर्मी के कारण उनकी फसल को नुकसान हुआ है। इस स्थिति में, किसानों ने मांग की है कि गेहूं खरीद के नियमों में ढील दी जाए, ताकि वे अपनी फसलों को समय पर बेच सकें।
आंदोलन का अगला कदम
आंदोलन के दौरान किसानों की एकजुटता दिखाई देगी। यह आंदोलन अन्य राज्यों के किसानों के दिनों से भी प्रेरित है। यदि फिर से उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तो किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। इसके चलते राज्य और केंद्र सरकार की नजर इस पर बनी हुई है। किसान अपनी आवाज उठाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
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