पेंटागन का बड़ा खुलासा: एलन मस्क के Grok AI ने ईरान पर बरसाए 2,000 बम

The CSR Journal Magazine

मस्क के Grok AI ने मचाया तहलका: युद्ध के मैदान में मस्क के AI की एंट्री! 4 दिन में तबाह किए ईरान के 2,000 ठिकाने!

पेंटागन ने कोर्ट में यह खुलासा किया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के दौरान एलन मस्क के Grok AI का इस्तेमाल किया था। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, इस सैन्य अभियान में ग्रोक एआई की मदद से 96 घंटे (4 दिन) के भीतर 2,000 से अधिक ठिकानों पर 2,000 से ज्यादा बम/मिसाइलें दागी गईं।

पेंटागन का चौंकाने वाला खुलासा

पेंटागन के एक लीक हुए दस्तावेज के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान में एलोन मस्क के Grok AI का व्यापक उपयोग किया है। यह खुलासा सुरक्षा विश्लेषकों के बीच हड़कंप मचाने वाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सेना ने इस AI टूल का उपयोग कर मात्र 96 घंटे में ईरान के 2000 महत्वपूर्ण ठिकानों पर सटीक बमबारी की।

यह खुलासा कैसे और क्यों हुआ?

एलन मस्क की AI कंपनी xAI के मिसिसिपी स्थित डेटा सेंटर के खिलाफ NAACP (एक नागरिक अधिकार संगठन) ने पर्यावरण नियमों (क्लीन एयर एक्ट) के उल्लंघन का मुकदमा दर्ज कराया था। अमेरिकी सरकार ने कोर्ट में xAI का बचाव करते हुए दलील दी कि इस डेटा सेंटर को बंद करने से अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि इसका उपयोग सैन्य अभियानों में हो रहा है। पेंटागन के डिजिटल और एआई प्रमुख कैमरन स्टेनली ने शपथ पत्र में बताया कि ‘ग्रोक गोव मॉडल’ (Grok Gov Model) को अमेरिकी सेना के ‘प्रोजेक्ट मेवन स्मार्ट सिस्टम’ (MSS) में शामिल किया गया है, जो सटीक टारगेटिंग और सैन्य रणनीति बनाने में मदद करता है।

Grok AI की भूमिका

Grok AI एक अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणाली है जिसे विशेष रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए विकसित किया गया है। इसके जरिये अमेरिकी सेना ने ईरान में विशिष्ट लक्ष्यों की पहचान की और उन्हें निशाना बनाते हुए प्रभावी कार्रवाई की। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ग्रोक एआई के इस्तेमाल से युद्ध के मैदान में प्लानिंग और ऑपरेशन की रफ्तार और सटीकता काफी बढ़ गई। पहले अमेरिकी सेना इस काम के लिए एंथ्रोपिक के ‘क्लाउड’ मॉडल का उपयोग कर रही थी। हालांकि, एंथ्रोपिक द्वारा पूर्ण स्वायत्त हमलों के लिए अपने टूल के इस्तेमाल पर आपत्ति जताने के बाद, पेंटागन ने मस्क के Grok AI को चुना।

क्या है xAI के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में चल रहा मुकदमा

एलन मस्क की कंपनी xAI के खिलाफ अमेरिकी कोर्ट में चल रहा मुकदमा मूल रूप से पर्यावरण प्रदूषण और नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है, जिसने अमेरिकी सरकार के हस्तक्षेप के बाद एक राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य विवाद का रूप ले लिया है। नागरिक अधिकार संगठन NAACP (National Association for the Advancement of Colored People), ‘द सदर्न एनवायरनमेंटल लॉ सेंटर’ (SELC) और ‘अर्थजस्टिस’ ने मिलकर यह मुकदमा दायर किया है। यह मुकदमा अमेरिका के मिसिसिपी के उत्तरी जिले की संघीय जिला अदालत में चल रहा है।

आरोप क्या हैं

याचिका में आरोप लगाया गया है कि xAI ने मिसिसिपी के साउथहेवन (मेम्फिस बॉर्डर के पास) में अपने ‘Colossus 2’ सुपरकंप्यूटर डेटा सेंटर को बिजली देने के लिए 27 बड़े मीथेन गैस टर्बाइन (अवैध पावर प्लांट) लगा रखे हैं। कंपनी ने इसके लिए कोई वैध ‘एयर परमिट’ (Air Permit) नहीं लिया, जो अमेरिकी ‘क्लीन एयर एक्ट’ (Clean Air Act) का सीधा उल्लंघन है।

स्थानीय समुदाय और स्वास्थ्य पर प्रभाव

NAACP का कहना है कि यह डेटा सेंटर और इसके टर्बाइन मुख्य रूप से अश्वेत बहुल (Black neighborhoods) रिहायशी इलाकों, स्कूलों और चर्चों के पास हैं। इन टर्बाइनों से भारी मात्रा में नाइट्रोजन ऑक्साइड, फॉर्मलाडेहाइड (Formaldehyde) और सूक्ष्म कण (Particulate Matter) हवा में घुल रहे हैं। इस इलाके में पहले से ही दमा (Asthma), सांस की बीमारियां और कैंसर का खतरा राष्ट्रीय औसत से 4 गुना अधिक है।

मुकदमे में अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की चौंकाने वाली एंट्री

अमेरिकी न्याय विभाग (Department of Justice) ने कोर्ट में आधिकारिक तौर पर हस्तक्षेप करते हुए इस मुकदमे को तुरंत खारिज करने (Dismiss) की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, एसोसिएट अटॉर्नी जनरल स्टैनली वुडवर्ड जूनियर द्वारा हस्ताक्षरित मेमो में सरकार ने दलील दी कि इस डेटा सेंटर की बिजली सप्लाई रोकने से “अमेरिका की राष्ट्रीय, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा होगा”। सरकार ने कोर्ट को बताया कि इसी डेटा सेंटर से एलन मस्क का ‘Grok Gov Model’ काम करता है, जो अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के ‘प्रोजेक्ट मेवन’ का हिस्सा है और जिसके जरिए ईरान पर 2,000 मिसाइल हमले किए गए थे।

xAI का कानूनी बचाव और मांग

मस्क की कंपनी xAI और उसकी सहयोगी संस्था MZX Tech ने अदालत में दलील दी है कि ये गैस टर्बाइन ‘अस्थाई और मोबाइल’ (Temporary & Mobile) हैं, इसलिए इन्हें पारंपरिक पावर प्लांट की तरह कड़े नियमों और परमिट के दायरे से छूट मिलनी चाहिए। NAACP ने कोर्ट से मांग की है कि:xAI के बिना परमिट वाले टर्बाइनों को तुरंत बंद किया जाए। कंपनी को प्रदूषण नियंत्रण की सबसे आधुनिक तकनीक (Best Available Control Technology) लगाने का आदेश दिया जाए। नियमों के उल्लंघन के लिए xAI पर भारी दैनिक वित्तीय जुर्माना (Financial Penalties) लगाया जाए। पर्यावरणविदों के अनुसार, अमेरिकी इतिहास में यह बेहद दुर्लभ मामला है जहां सरकार ने ‘क्लीन एयर एक्ट’ को लागू करने के बजाय एक निजी कॉर्पोरेट प्रदूषक का साथ देने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और युद्ध का हवाला दिया है।

96 घंटे का समय और ईरान पर हमले

अमेरिकी सेना ने चार दिन के भीतर ईरान के 2000 ठिकानों को अपने लक्ष्य बनाया और पूरी सटीकता के साथ बमबारी की। इस हमले का उद्देश्य ईरानी सैन्य गतिविधियों को बाधित करना और क्षेत्र में अमेरिका की स्थिति को मजबूत करना था। गौरतलब है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा था।

प्रौद्योगिकी में नई दिशा

इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या सैन्य कार्रवाई में नवोन्मेषी तकनीकों का उपयोग बढ़ता जाएगा। Grok AI जैसे उपकरण अब प्रभावी तरीके से निर्णय लेने और रणनीतिक लाभ पाने में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की तकनीक भविष्य में युद्ध की परिस्थितियों को पूरी तरह से बदल सकती है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

न केवल सैन्य रणनीतियों पर, बल्कि इस कार्रवाई के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी गहरे हो सकते हैं। अमेरिका के इस कदम की अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। इससे न केवल ईरान के साथ अमेरिका के रिश्तों में खटास आएगी, बल्कि यह अन्य देशों को भी सैन्य प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के तरीकों पर विचार करने पर मजबूर कर सकता है।

विश्लेषकों की राय

विशेषज्ञ इस घटनाक्रम की कड़ी निगरानी कर रहे हैं और इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ मान रहे हैं। इस तकनीक के आगे आने से क्या मानवता को खतरा है, या यह युद्ध के तरीकों को बदलने में सहायक साबित होगी, यह समय ही बताएगा। ऐसे में, Grok AI जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरणों का बढ़ता हुआ प्रभाव भविष्य के युद्ध की तस्वीर को बदल सकता है।

मानवता और सुरक्षा पर बहस

इस खुलासे ने वैश्विक स्तर पर सोशल मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञ युद्ध और घातक सैन्य हमलों में बिना इंसानी नियंत्रण वाले एआई टूल्स की भूमिका को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।

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