Gadkari का बड़ा बयान: एथेनॉल और ई-20 से गाड़ियों को नहीं होगा नुकसान

The CSR Journal Magazine
ई-20 पेट्रोल, एथेनॉल और गाड़ियों के माइलेज पर सवाल उठ रहे हैं। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक बातचीत में इन सब सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि एथेनॉल से गाड़ी खराब होने के कोई प्रमाण नहीं हैं। इसके साथ ही, गडकरी ने बताया कि वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात घटेगा और प्रदूषण में कमी आएगी।

किसानों की आय बढ़ाने वाला ईंधन

गडकरी ने कहा, “मैं परिवहन मंत्री हूं और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के मानक तय करना मेरा काम है। पिछले 25 साल से मैं किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहा हूँ। हमारे देश को हर साल 22 लाख करोड़ रुपए का पेट्रोलियम आयात करना पड़ता है। दिल्ली के प्रदूषण का 40% हिस्सा परिवहन की वजह से है। इसे कम करना हमारी जिम्मेदारी है।”

क्या है एथेनॉल की उत्पादन क्षमता?

जब एक सवाल पूछा गया कि क्या हम ई-20 के लिए एथेनॉल बना पा रहे हैं, तो गडकरी ने कहा कि भारत की एथेनॉल की उत्पादन क्षमता 1750-1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि एथेनॉल केवल गन्ने से नहीं, बल्कि मक्का, टूटे चावल और पराली से भी बनाया जा रहा है। इससे 2 लाख करोड़ रुपए का तेल आयात बचा है।

माइलेज में गिरावट का सच

लोगों की शिकायत है कि ई-20 से माइलेज घट रहा है, ARAI ने भी 6% का अंतर बताया है। इस पर गडकरी ने कहा कि “माइलेज का स्तर सड़क और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करता है। एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, लेकिन यह सस्ता और प्रदूषण कम करने वाला है।”

गाड़ियों के खराब होने का दावा गलत

गडकरी ने कहा कि गाड़ियों के खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है। “2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब तक किसी को नुकसान का सामना नहीं करना पड़ा है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईंधन को लागू करने से पहले चार साल तक परीक्षण किया जाता है।

भारत में ई-20 के विकल्प

जब पूछा गया कि कई देशों में ई-20 के साथ 100% पेट्रोल का विकल्प क्यों नहीं है, तो गडकरी ने कहा कि “हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं। भारत की नीतियां इसकी आवश्यकताओं और संसाधनों के अनुसार तैयार की जाती हैं।” उन्होंने बताया कि ब्राजील में 1970 से 100% एथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन भारत अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा है।

क्या एथेनॉल सस्ता होगा?

गडकरी ने पेट्रोल की कीमतों पर बात करते हुए कहा कि “कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं। पेट्रोल की कीमतें तय करना मेरे अधिकार में नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे चला जाए, तब भी एथेनॉल फायदे का सौदा साबित होगा।

भविष्य की जरूरतें

गडकरी ने अंत में कहा कि “हमारा मकसद केवल लागत घटाना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण में कमी और किसानों की आय में बढ़ोतरी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसलिए वैकल्पिक ईंधन भविष्य की जरूरत हैं।”

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