Nirjala Ekadashi 2026: 1 दिन का व्रत, सालभर का फल: जानें तिथि-मुहूर्त और व्रत का महत्व

The CSR Journal Magazine

क्या है निर्जला एकादशी?

Nirjala Ekadashi, जिसे साल के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है, हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भक्त अपनी श्रद्धा के साथ 24 घंटों तक सिर्फ व्रत रखते हैं। इस एकादशी का विशेष महत्व है क्योंकि इसे अन्न और जल के बिना मनाने की परंपरा है।

निर्जला एकादशी की तिथि

2026 में निर्जला एकादशी की तिथि 29 मई को है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष में होने वाली यह एकादशी हर साल भक्तों द्वारा बेहद श्रद्धा से मनाई जाती है। इस दिन सामाजिक और धार्मिक गतिविधियाँ भी काफी बढ़ जाती हैं।

पूजा विधि और मुहूर्त

निर्जला एकादशी के दिन पूजा का समय बेहद खास होता है। इस साल, पूजा का मुहूर्त सुबह 5:30 बजे से लेकर शाम 7:00 बजे तक रहेगा। भक्तों को इस मुहूर्त में अपने घर या मंदिर में भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से भगवान को फल, फूल और पत्ते अर्पित करते हैं।

व्रत का महत्व

निर्जला एकादशी का व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है। इस दिन व्रति लोग अपने मन और आत्मा को शुद्ध करते हैं, जिसके चलते आध्यात्मिक उन्नति होती है। कहते हैं कि इस व्रत के प्रभाव से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

कैसे करें व्रत

व्रत रखने वाले भक्तों को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और ध्यान लगाना चाहिए। इसके बाद व्रत का संकल्प लें। दिनभर केवल फलाहार करें और शाम को भगवान की आरती करें। निर्जला एकादशी के व्रत में, श्रद्धालुओं को बिना पानी के रहना होता है, जिससे यह व्रत कठिन बन जाता है।

आध्यात्मिक एवं शारीरिक लाभ

निर्जला एकादशी का व्रत केवल तात्कालिक लाभ नहीं बल्कि लंबे समय में भी शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। बहुत से लोग मानते हैं कि इस व्रत से मन की शांति और संकल्प शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा, यह मानसिक तनाव को कम करने में भी मदद करता है।

समुदाय में उत्सव का माहौल

इस एकादशी के आगमन से हर जगह उल्लास का माहौल रहता है। भक्त विभिन्न धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं और एक-दूसरे को व्रत की शुभकामनाएँ देते हैं। मंदिरों में भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-पाठ होते हैं, जिससे सब मिलकर भगवान की आराधना करते हैं।
निर्जला एकादशी, अपनी कठिनाई और महत्व के कारण भारतीय संस्कृति में खास स्थान रखती है। इस दिन श्रद्धालुओं का समर्पण और श्रद्धा उन्हें जीवन में नई दिशा देती है। इस एकादशी को मनाने का सही तरीका और समय जानकर भक्त अपने व्रत को और भी सफल बना सकते हैं।

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