NCERT में डांसिंग गर्ल विवाद, धरोहर बचाएं या नैतिकता थोपें?

The CSR Journal Magazine
भारत की पुरानी सभ्यताओं का अध्ययन करते हुए, एक सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि हमारी सोच कैसे विकसित हुई है। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के अवशेषों से मिली नर्तकी की मूर्ति पूरी तरह नग्न है। जो हमारे मानवता के विकास का प्रतीक है। NCERT ने इस मूर्ति को अश्लील मानते हुए, उसे कपड़े पहनाने की कोशिश की है। ये मूर्ति कई दशकों से पाठ्यक्रम में शामिल रही है, और अब अचानक इसका परिवर्तित होना सवाल खड़ा करता है।

गांवों में कपड़े पहनने की प्रथा

यह सच है कि भारतीय गांवों में महिलाएं पारंपरिक साड़ी में रहती थीं। अक्सर वे बिना ब्लाउज के ही काम करती थीं और इस पर उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं होती थी। वहीं, आज आधुनिक सोच के चलते हम अपने अतीत को लेकर संशय में हैं। क्या हमारी नैतिकता इतनी बदल गई है कि अब हम अतीत में कुछ भी अश्लील देख सकते हैं?

नग्नता का एक नया अर्थ

भारत में नग्नता कभी भी फूहड़ता नहीं मानी गई। भारतीय महिलाएं अपने रूप को निखारने में विश्वास करती हैं। यह नर्तकी की मूर्ति भी एक कला का प्रतीक है। यह दर्शाती है कि हमारी संस्कृति में नग्नता का अनौचित्य नहीं था। ऐसे में, क्या हमें सचमुच इसे अश्लील समझना चाहिए?

पालने में बदलाव की आवश्यकता

संस्कृति में बदलाव स्वभाविक है, लेकिन क्या इस बदलाव का आधार सही है? MOOC जैसे प्लेटफार्म पर इतिहास पढ़ाई जा रही है, लेकिन क्या हम इसे सही दृष्टिकोण से समझ पा रहे हैं? क्या नई पीढ़ी को हमारे अतीत से वंचित करना उचित होगा? यह दरअसल, शिक्षा के माध्यम से बदलती मानसिकता का एक और उदाहरण है।

डांसिंग गर्ल की जगह?

NCERT ने जो कदम उठाया है, क्या वह सही है? क्या हम अपने इतिहास को छिपाकर उसे आधुनिकता की चादर में लपेटने की कोशिश कर रहे हैं? जब हमने इसे पहले पढ़ा था, तब किसी ने भी इसे नग्नता के रूप में नहीं लिया था। क्या इसका असली रूप हमें आज भी उसी तरह नहीं दिखता है?

अधिकार और नैतिकता का द्वंद्व

अगर हम इस तरह से अपने अतीत को देखने लगे, तो क्या कल हम कोणार्क और खजुराहो की चित्रित मूर्तियां भी हटाएंगे? हमें यह समझना होगा कि हर समाज के नैतिक मापदंड भिन्न होते हैं। यह मामला सिर्फ मूर्तियों का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और उसकी हरियाली का भी है।

कला और संस्कृति का संरक्षण

इतिहास की दृष्टि से, क्या हमें उन चीजों को कुरीतियों की तरह समझना चाहिए जो हमारे पूर्वजों के नजरिए से सामान्य थीं? इन्हें कला की नजर से देखने पर हमें एक नई दृष्टि मिलेगी। इसलिए हमें अपनी धरोहर को संरक्षित करने का प्रयास करना चाहिए। ये मूर्तियां हमारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करती हैं और उन्हें अश्लील समझना एक संकीर्ण दृष्टिकोण है।

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