मुंबई की लोकल में बड़ा बदलाव: 238 नई एसी ट्रेनें बनाएगा रेलवे, 2027 तक पहली रेक आने की उम्मीद, मुंबई लोकल की नई रफ्तार और नई सुविधा
मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली उपनगरीय लोकल ट्रेनों में आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यात्रियों की बढ़ती संख्या, भीड़ और बेहतर यात्री सुविधाओं की जरूरत को देखते हुए मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क के लिए 238 नई एसी लोकल रेक लाने की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। इन 238 रेक में प्रत्येक ट्रेन में 12 डिब्बे होंगे, यानी कुल 2,856 कोच तैयार किए जाएंगे। इस परियोजना की स्वीकृत लागत करीब 19,293 करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार के अनुसार ये नई पीढ़ी की दरवाजों वाली उपनगरीय ट्रेनें मुंबई की यात्री क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इस परियोजना को लेकर अब एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले इन ट्रेनों की खरीद के लिए बाहरी कंपनियों से वैश्विक निविदा के जरिए ट्रेनें तैयार कराने की योजना थी। लेकिन प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण परियोजना की समयसीमा लंबी खिंचने का खतरा पैदा हो गया था। अब रेलवे ने उत्पादन की जिम्मेदारी अपनी प्रमुख कोच निर्माण इकाइयों को देने का फैसला किया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) और कपूरथला की रेल कोच फैक्ट्री (RCF) में इन ट्रेनों का निर्माण कराने की योजना है। इससे अलग-अलग कारखानों में समानांतर उत्पादन संभव होगा और पहली रेक को अपेक्षाकृत जल्दी तैयार करने का लक्ष्य रखा जा सकेगा।
2027 तक पहली एसी लोकल आने की उम्मीद
मुंबई रेलवे विकास निगम (MRVC) से जुड़ी ताजा जानकारी के अनुसार, तीन रेलवे उत्पादन इकाइयों में निर्माण शुरू होने से परियोजना की गति बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्टों में 2027 तक पहली नई रेक उपलब्ध होने की संभावना जताई गई है। हालांकि यात्रियों के लिए यह समझना जरूरी है कि पहली रेक का निर्माण और उसका नियमित यात्री सेवा में शामिल होना अलग-अलग चरण हैं। ट्रेन के निर्माण के बाद परीक्षण, प्रमाणन, परिचालन तैयारी, मार्ग की क्षमता और रखरखाव संबंधी व्यवस्थाओं को भी पूरा करना होगा। रेल मंत्रालय ने संसद में दिए जवाबों में भी स्पष्ट किया है कि नई रेक मिलने के बाद किसी मार्ग पर ट्रेन सेवा शुरू करने का निर्णय केवल ट्रेन उपलब्ध होने पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए संबंधित रेलखंड की क्षमता, ट्रेन चलाने के लिए उपलब्ध मार्ग, रोलिंग स्टॉक, बुनियादी ढांचे और रखरखाव की जरूरतों को भी देखा जाता है।
238 रेक में होंगे 2,856 कोच
यह परियोजना अपने आकार के लिहाज से बेहद बड़ी है। कुल 238 रेक × 12 कोच = 2,856 कोच तैयार किए जाने हैं। इन ट्रेनों को मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था की यात्री क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से MUTP-III और MUTP-IIIA के तहत मंजूरी मिली है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना के लिए 19,293 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत है। इन नई ट्रेनों में दरवाजे लगे होंगे। इससे वर्तमान खुली दरवाजा व्यवस्था वाली पारंपरिक लोकल ट्रेनों की तुलना में यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। रेलवे पहले ही मुंबई में एसी ईएमयू सेवाओं का विस्तार कर रहा है और नई रेक आने के बाद इस व्यवस्था को और व्यापक बनाने की संभावना है।
मेट्रो जैसी सुविधाओं पर जोर
नई पीढ़ी की एसी लोकल ट्रेनों का उद्देश्य केवल यात्रियों को गर्मी और उमस से राहत देना नहीं है। इन्हें आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ तैयार करने की योजना है। प्रस्तावित सुविधाओं में स्वचालित दरवाजे, वातानुकूलित कोच, आरामदायक सीटें, मोबाइल चार्जिंग की सुविधा और यात्री सूचना/इन्फोटेनमेंट प्रणाली जैसी सुविधाएं शामिल हैं। नई ट्रेनों में स्वचालित दरवाजे सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक होंगे। मुंबई की पारंपरिक लोकल ट्रेनों में दरवाजे खुले रहने के कारण भीड़ के समय यात्रियों के लिए जोखिम बढ़ जाता है। बंद दरवाजों वाली नई ट्रेनें इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं। पिछले वर्ष मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी नई एसी लोकल को मेट्रो जैसी सुविधा से जोड़ते हुए कहा था कि नई ट्रेनों में बंद दरवाजे होंगे। उन्होंने रेलवे से इन ट्रेनों के आने के साथ किराया बढ़ोतरी नहीं करने का अनुरोध करने की बात भी कही थी।
पुराने टेंडर मॉडल में क्यों आई अड़चन?
238 एसी लोकल की खरीद का प्रस्ताव नया नहीं है। मुंबई शहरी परिवहन परियोजना यानी MUTP-III और MUTP-IIIA के तहत इन ट्रेनों को लाने की योजना पहले से चल रही है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निविदा प्रक्रिया में देरी के कारण इसकी समयसीमा प्रभावित हुई। 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया था कि परियोजना की लागत और निविदा प्रक्रिया दोनों को लेकर चुनौतियां सामने आई थीं। कुछ रिपोर्टों में खरीद और रखरखाव सुविधाओं सहित कुल लागत में उल्लेखनीय वृद्धि की बात कही गई थी। अब रेलवे उत्पादन इकाइयों को निर्माण में शामिल करने का फैसला इसी पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि तीनों कारखाने समानांतर रूप से उत्पादन करते हैं तो एक ही कारखाने पर पूरा भार नहीं पड़ेगा और बड़ी संख्या में कोचों का निर्माण अपेक्षाकृत तेज गति से किया जा सकेगा।
19,293 करोड़ रुपये की परियोजना
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 238 नई 12-कोच रेक के लिए 19,293 करोड़ रुपये की लागत स्वीकृत है। यह परियोजना MUTP-III और MUTP-IIIA के तहत मुंबई की उपनगरीय रेल व्यवस्था को मजबूत करने का हिस्सा है। आपके दिए आंकड़ों के अनुसार एक रेक की औसत लागत करीब 84 करोड़ रुपये बैठती है। हालांकि कुल परियोजना लागत को केवल ट्रेन की खरीद कीमत मानना सही नहीं होगा, क्योंकि परियोजना से जुड़ी निविदा, तकनीकी आवश्यकताओं, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं के आधार पर वास्तविक खर्च का स्वरूप अलग हो सकता है। MRVC की निविदा जानकारी में 2,856 वातानुकूलित कारों के साथ व्यापक रखरखाव और दो नए रखरखाव डिपो स्थापित करने का प्रावधान भी दर्ज है।
मुंबई की लोकल व्यवस्था पर क्यों है इतना दबाव?
मुंबई में रोजाना लाखों यात्री उपनगरीय रेल नेटवर्क पर निर्भर हैं। रेल मंत्रालय के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार मुंबई क्षेत्र में रोजाना करीब 3,200 उपनगरीय ट्रेन सेवाएं संचालित होती हैं। मंत्रालय ने यात्री भीड़ को कम करने और क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, पिट लाइन, स्टेबलिंग लाइन और अन्य बुनियादी ढांचे के विस्तार का भी उल्लेख किया है। यही वजह है कि केवल नई ट्रेनें खरीदना पर्याप्त नहीं है। ट्रेनें बढ़ाने के साथ पटरियों, प्लेटफॉर्म, सिग्नल प्रणाली, रखरखाव डिपो और स्टेशनों की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। रेलवे मुंबई क्षेत्र में 15-कोच सेवाओं के विस्तार के लिए भी कई स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म विस्तार का काम कर रहा है।
एसी लोकल से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
मुंबई में गर्मी और उमस के मौसम में एसी लोकल यात्रियों के लिए अधिक आरामदायक विकल्प बन सकती है। बंद दरवाजों के कारण यात्रा के दौरान सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है। साथ ही आधुनिक यात्री सूचना प्रणाली से यात्रियों को ट्रेन और यात्रा से जुड़ी जानकारी अधिक व्यवस्थित तरीके से मिल सकती है। सबसे बड़ा फायदा भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त यात्री क्षमता उपलब्ध कराने का होगा। हालांकि इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि नई रेक किन मार्गों पर कितनी संख्या में चलाई जाती हैं और मौजूदा सेवाओं के साथ उनका परिचालन किस तरह व्यवस्थित किया जाता है।
सिर्फ एसी ट्रेनें नहीं, पूरा नेटवर्क हो रहा है मजबूत
मुंबई उपनगरीय रेल व्यवस्था के आधुनिकीकरण की तस्वीर केवल 238 एसी लोकल तक सीमित नहीं है। सरकार के अनुसार कई स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म और रखरखाव सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। 15-कोच ट्रेनों को अधिक स्टेशनों तक पहुंचाने के लिए भी आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। इसके अलावा MUTP के तहत नई रेल लाइनें, अतिरिक्त लाइनें और उपनगरीय कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मुंबई महानगर क्षेत्र में रेल परिवहन की क्षमता बढ़ाना है।
2030 तक पूरा होने का लक्ष्य कितना महत्वपूर्ण?
238 रेक की पूरी परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने का प्रयास इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुंबई की आबादी और दैनिक यात्रा की जरूरत लगातार बढ़ रही है। यदि बड़ी संख्या में नई ट्रेनें चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध होती हैं तो रेलवे को भीड़ प्रबंधन और सेवा विस्तार में मदद मिल सकती है। हालांकि 2030 तक पूरी परियोजना के लक्ष्य को अंतिम और निश्चित यात्री सेवा समयसीमा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकारी दस्तावेजों में फिलहाल 238 रेक की मंजूरी और खरीद प्रक्रिया की पुष्टि है, जबकि ताजा रिपोर्टों में रेलवे कारखानों के माध्यम से उत्पादन तेज करने और 2027 तक पहली रेक उपलब्ध कराने की संभावना सामने आई है।
मुंबई की ‘लाइफलाइन’ के लिए नई रफ्तार
मुंबई की लोकल केवल परिवहन का साधन नहीं बल्कि शहर की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों की रीढ़ है। रोजाना काम, कारोबार, शिक्षा और अन्य जरूरी गतिविधियों के लिए बड़ी संख्या में लोग उपनगरीय रेल पर निर्भर हैं। ऐसे में 238 नई एसी लोकल का प्रस्ताव यात्रियों के लिए केवल आराम की खबर नहीं बल्कि पूरे उपनगरीय रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए रेलवे की अपनी उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि ICF, MCF और RCF में समानांतर निर्माण निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ता है और 2027 में पहली रेक उपलब्ध होती है, तो मुंबई के लोकल यात्रियों को आने वाले वर्षों में यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों से निजात मिल सकेगी।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections.
Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast,
crisp, clean updates!
App Store – https://apps.apple.com/in/app/
Google Play Store –
https://play.google.com/store/

