लाडकी बहिन योजना में महा-उलटफेर: 92 लाख लाभार्थियों के नाम सूची से बाहर

The CSR Journal Magazine

महाराष्ट्र में ‘लाडकी बहिन योजना’ में बड़ा बदलाव, 92 लाख महिलाओं के नाम हटे! महिलाओं के लिए सरकारी योजना पर उठे सवाल

महाराष्ट्र की महायुति सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना‘ में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर सामने आया है। राज्यव्यापी गहन जांच और सत्यापन अभियान के बाद, सरकार ने रिकॉर्ड 92 लाख से अधिक लाभार्थियों के नाम सूची से हटा दिए हैं। योजना की शुरुआत में पंजीकृत लगभग 2.43 करोड़ महिलाओं में से सीधे 38 प्रतिशत की यह बड़ी कटौती सार्वजनिक होते ही महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है। विपक्ष जहां इसे चुनावी छलावा और सरकारी खजाने की लूट बता रहा है, वहीं नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने इस योजना के वित्तीय कुप्रबंधन पर गंभीर सवाल दाग दिए हैं।

सत्यापन का हंटर: क्यों कटी 92 लाख महिलाओं की जेब?

महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि लाभार्थियों की संख्या में इतनी बड़ी गिरावट केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि पात्रता नियमों के उल्लंघन और व्यापक स्तर पर पाई गई अनियमितताओं का परिणाम है। राज्य सरकार ने सितंबर 2025 से एक सघन सत्यापन अभियान शुरू किया था, जिसके अंतिम नतीजे अब पूरी तरह सामने आ चुके हैं। नाम हटाए जाने के मुख्य कारणों को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है।

eKYC प्रमाणीकरण में विफलता

सूची से नाम हटाए जाने का सबसे बड़ा कारण अनिवार्य इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (eKYC) प्रक्रिया को पूरा न करना रहा। लगभग 62 लाख महिलाएं (कुल कटे नामों का 67%) सरकार द्वारा दी गई आठ महीने की विस्तारित समय सीमा के भीतर अपना eKYC प्रमाणीकरण नहीं करवा सकीं, जिसके कारण उनके खातों में पैसे भेजने पर तुरंत रोक लगा दी गई।

आय सीमा का उल्लंघन

योजना के नियमानुसार, लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय ₹2.5 लाख से कम होनी चाहिए। लेकिन सत्यापन में 16 लाख से अधिक महिलाएं ऐसी पाई गईं, जिनके परिवारों की वार्षिक आय इस तय सीमा से कहीं अधिक थी। इनमें से कई आयकर दाता भी थीं।

सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि करीब 4.42 लाख महिलाएं ऐसी थीं, जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत था। नियमानुसार सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को इस आर्थिक सहायता के दायरे से बाहर रखा गया है।

संजय गांधी निराधार योजना

लगभग 3.6 लाख महिलाएं पहले से ही राज्य की ‘संजय गांधी निराधार योजना’ या अन्य सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ उठा रही थीं। योजना के नियमों के तहत कोई भी व्यक्ति एक साथ दो वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ नहीं ले सकता।

एक ही परिवार में एकाधिक लाभ

नियमों के मुताबिक एक परिवार की अधिकतम दो महिलाओं को ही यह लाभ मिल सकता है, लेकिन 2.5 लाख मामलों में यह देखा गया कि एक ही राशन कार्ड या परिवार से दो से अधिक सदस्य अवैध रूप से ₹1500 की मासिक किस्त उठा रहे थे।

आयु सीमा और अन्य तकनीकी त्रुटियां

करीब 1.8 लाख महिलाएं 65 वर्ष की ऊपरी आयु सीमा को पार कर चुकी थीं, जबकि 1.7 लाख नाम जिला स्तरीय भौतिक सत्यापन के दौरान फर्जी पाए गए। भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो सबसे बड़ा झटका मराठवाड़ा क्षेत्र के बीड़ जिले को लगा है, जहां अकेले 28 लाख महिलाओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं।

₹14,000 करोड़ का रिसाव- विपक्ष के तीखे सवाल

इस पूरे खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में आरोपों-प्रत्यारोपों का दौर चरम पर है। शिवसेना (UBT) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी सहित समूचे महाविकास अघाड़ी (MVA) ने सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का सबसे बड़ा हमला इस बात पर है कि अपात्र पाए गए इन 92 लाख लाभार्थियों को भुगतान रोकने से पहले तक लगभग ₹14,000 करोड़ की सार्वजनिक धनराशि बांटी जा चुकी थी। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार ने साल 2024 के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने और वोट बैंक मजबूत करने के उद्देश्य से बिना किसी प्रारंभिक जांच या सत्यापन के आनन-फानन में इस योजना को लागू कर दिया।

विपक्ष ने की कार्यवाई की मांग

चुनाव के समय नियमों को शिथिल रखा गया और स्व-प्रमाणन (Self-Attestation) के आधार पर धड़ाधड़ फॉर्म स्वीकार किए गए, जिसका नतीजा यह हुआ कि करदाताओं का अरबों रुपया अयोग्य लोगों के हाथों में चला गया। विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि वह उन पुरुषों और फर्जी लाभार्थियों के नाम सार्वजनिक करे जिन्होंने महिला बनकर इस योजना का अनुचित लाभ उठाया। गौरतलब है कि तकनीकी और डेटाबेस त्रुटियों के कारण लगभग 29,000 पुरुषों के खातों में भी महिलाओं के नाम पर पैसा ट्रांसफर हो गया था।

CAG रिपोर्ट ने खोली वित्तीय कुप्रबंधन की पोल

इस प्रशासनिक फेरबदल के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने महायुति सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कैग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस योजना पर होने वाला अनियंत्रित खर्च महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति पर एक बहुत भारी बोझ डाल रहा है। कैग की रिपोर्ट में निम्नलिखित मुख्य वित्तीय विसंगतियों को रेखांकित किया गया है।
महिला कल्याण बजट (2023-24)- ₹261.78 करोड़
महिला कल्याण बजट (2024-25)- ₹33,554.36 करोड़
अवैध रूप से वितरित राशि- लगभग ₹14,000 करोड़
संशोधित योजना आवंटन (2025-26)- ₹36,000 करोड़ से घटकर ₹26,500 करोड़
अपात्र लाभार्थियों का प्रतिशत- 38% (92 लाख से अधिक नाम हटे)

वित्तीय नियमों की अनदेखी

कैग ने यह भी टिप्पणी की है कि योजना के शुरुआती चरण में वित्तीय नियमों की अनदेखी कर किया गया ₹3,541 करोड़ का खर्च किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि का अयोग्य खातों में जाना सीधे तौर पर राजकोषीय अनुशासन का उल्लंघन है, जिससे राज्य के विकास कार्यों (जैसे बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और शिक्षा) के बजट में कटौती करनी पड़ी है।

सरकार का बचाव: ‘वसूली केवल पुरुषों और सरकारी कर्मचारियों से’

चौतरफा हमलों से घिरी महाराष्ट्र सरकार की ओर से महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। मंत्री अदिति तटकरे ने स्पष्ट किया कि 2024 के विधानसभा चुनावों और आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण योजना के तुरंत बाद अनिवार्य eKYC और जमीनी स्तर पर सत्यापन अभियान शुरू नहीं किया जा सका था। चुनावों के बाद जब पूरी मशीनरी सक्रिय हुई, तो पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए यह शुद्धिकरण अभियान चलाया गया, जो कि सुशासन का प्रमाण है।

सरकारी कर्मचारियों और पुरुष लाभार्थियों से वसूली

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एक बड़ा नीतिगत फैसला सुनाते हुए साफ किया है कि जिन 81 लाख से अधिक अपात्र महिलाओं के खातों में पैसे गए हैं, उनसे किसी भी प्रकार की वित्तीय वसूली नहीं की जाएगी। सरकार का मानना है कि ग्रामीण और गरीब पृष्ठभूमि की महिलाओं से पैसे वापस मांगना व्यावहारिक नहीं होगा। हालांकि, सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि अयोग्य पाए गए सरकारी कर्मचारियों और पुरुष लाभार्थियों से पाई-पाई वसूली जाएगी। इसके लिए जिला कलेक्टरों को ‘राजस्व वसूली रसीद’ (RRR) तंत्र के तहत तत्काल कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दे दिए गए हैं।

घटी बजट आबंटन की राशि

इस शुद्धिकरण के बाद सरकार ने योजना के कुल बजट आवंटन को ₹36,000 करोड़ से घटाकर ₹26,500 करोड़ कर दिया है। इसके साथ ही, चुनावों से पहले महायुति द्वारा मासिक सहायता राशि को ₹1500 से बढ़ाकर ₹2100 करने का जो वादा किया गया था, उसे फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, क्योंकि राज्य का खजाना इसकी अनुमति नहीं दे रहा है।

जनता और पीड़ित महिलाओं की गुहार: क्या दोबारा मिलेगा मौका?

इस सामूहिक छंटनी ने धरातल पर कई ऐसी गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को भी संकट में डाल दिया है जो वास्तव में इस योजना की हकदार थीं, लेकिन केवल डिजिटल साक्षरता की कमी या तकनीकी दिक्कतों के कारण समय पर eKYC नहीं करा सकीं। कई ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या, आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग की त्रुटि और बैंकों के चक्कर काटने के बाद भी eKYC लिंक न होने की वजह से हजारों वास्तविक ‘लाडकी बहिनें’ इस लाभ से वंचित हो गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने मांग की है कि सरकार को इस योजना का पोर्टल दोबारा खोलना चाहिए और जो महिलाएं वास्तव में पात्र हैं, उन्हें अपने दस्तावेज सुधारने और eKYC प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक आखिरी मौका जरूर दिया जाना चाहिए।

महिलाएं अपना नाम और स्टेटस कैसे जांचें?

यदि आप भी इस योजना की लाभार्थी रही हैं और आपकी किस्त रुक गई है, तो आप आधिकारिक वेबसाइट लाडकी बहिन पोर्टल पर जाकर अपना नाम चेक कर सकती हैं। इसके अलावा सरकार ने किसी भी प्रकार की शिकायत या मदद के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर 181 भी जारी किया है, जहां कॉल करके लाभार्थी अपनी स्थिति जान सकती हैं। लाडकी बहिन योजना का यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए एक बड़ा सबक है। यह दिखाता है कि जब योजनाएं बिना किसी मजबूत तकनीकी ढांचे और बिना पूर्व-सत्यापन के केवल चुनावी लाभ के लिए लागू की जाती हैं, तो अंततः जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद होता है और बाद में होने वाली कटौती से वास्तविक जरूरतमंदों के भरोसे को ठेस पहुंचती है। अब देखना यह होगा कि क्या महायुति सरकार इस बड़े राजनीतिक डैमेज को कंट्रोल कर पाती है या विपक्ष इसे आने वाले स्थानीय निकायों के चुनावों में एक बड़ा हथियार बनाने में सफल होता है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos