फ्लाईओवर के नीचे बनेंगे EV चार्जिंग स्टेशन, 2035 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक होगी महाराष्ट्र की ‘लालपरी’ बस सेवा
महाराष्ट्र सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब शहरों और राजमार्गों के फ्लाईओवर के नीचे खाली पड़ी जगहों का उपयोग इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की प्रसिद्ध ‘लालपरी’ बस सेवा को वर्ष 2035 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक बसों में बदलना है।
पोल्युशनफ्री होगी मुंबई
राज्य के तेजी से बढ़ते शहरीकरण, प्रदूषण और ईंधन लागत के बीच यह पहल महाराष्ट्र की नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन को इलेक्ट्रिक बनाया जाता है तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि यात्रियों को अधिक आधुनिक, शांत और किफायती यात्रा सुविधा भी मिल सकेगी।
किन विभागों को मिली जिम्मेदारी?
इस परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने तीन प्रमुख एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है-
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Mumbai Metropolitan Region Development Authority (MMRDA)
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Maharashtra State Road Development Corporation (MSRDC)
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Public Works Department (PWD)
इन विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मुंबई महानगर क्षेत्र और राज्य के अन्य हिस्सों में फ्लाईओवरों के नीचे उपलब्ध खाली स्थानों की पहचान करें, जहां बड़े स्तर पर EV चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकें। सरकार का कहना है कि महानगरों में जमीन की भारी कमी है। ऐसे में फ्लाईओवरों के नीचे की जगह का उपयोग एक व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान साबित हो सकता है।
‘लालपरी’ को मिलेगा इलेक्ट्रिक रूप
Maharashtra State Road Transport Corporation यानी MSRTC की लाल रंग की बसें दशकों से महाराष्ट्र की जीवनरेखा मानी जाती हैं। गांवों से लेकर बड़े शहरों तक लाखों लोग प्रतिदिन इन बसों से यात्रा करते हैं। अब सरकार का लक्ष्य है कि 2035 तक MSRTC का पूरा बेड़ा इलेक्ट्रिक बसों में बदल दिया जाए। इसके लिए हजारों नई ई-बसें खरीदी जाएंगी और राज्यभर में चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रिक बसों से डीजल पर निर्भरता कम होगी और परिचालन लागत में भी बड़ी कमी आएगी। हालांकि शुरुआती निवेश अधिक होगा, लेकिन लंबे समय में ईंधन और रखरखाव पर खर्च कम होने से परिवहन व्यवस्था अधिक टिकाऊ बन सकेगी।
क्यों जरूरी है यह योजना?
महाराष्ट्र विशेषकर मुंबई, पुणे, नागपुर और ठाणे जैसे शहरों में वायु प्रदूषण और ट्रैफिक बड़ी समस्या बन चुके हैं। डीजल बसों और भारी वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण का प्रमुख कारण माना जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक हो जाए तो कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। इसके साथ ही शोर प्रदूषण भी कम होगा क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहन अपेक्षाकृत शांत होते हैं।
फ्लाईओवर के नीचे ही क्यों बनेंगे चार्जिंग हब?
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी- शहरों में जमीन की उपलब्धता। मुंबई जैसे शहरों में जमीन अत्यंत महंगी और सीमित है। ऐसे में फ्लाईओवरों के नीचे की खाली जगहों का उपयोग करने का विचार सामने आया। इस योजना के कई फायदे बताए जा रहे हैं-
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पहले से उपलब्ध सरकारी जमीन का उपयोग
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नई जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता कम
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बसों के लिए आसानी से पहुंच योग्य स्थान
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चार्जिंग नेटवर्क का तेज विस्तार
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शहरी अव्यवस्था और अतिक्रमण में कमी
सरकार का मानना है कि इन खाली स्थानों का उपयोग कर शहरों को अधिक व्यवस्थित और उपयोगी बनाया जा सकेगा।
PPP मॉडल पर होगा विकास
चार्जिंग नेटवर्क के निर्माण और संचालन के लिए सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाने की तैयारी में है। इसके तहत निजी कंपनियां चार्जिंग स्टेशन विकसित करेंगी, जबकि सरकार भूमि और नीतिगत सहायता उपलब्ध कराएगी। ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र की कई कंपनियां इस परियोजना में रुचि दिखा सकती हैं क्योंकि आने वाले वर्षों में EV बाजार तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
2047 तक पूर्ण इलेक्ट्रिक परिवहन का लक्ष्य
महाराष्ट्र सरकार की नई EV नीति केवल बसों तक सीमित नहीं है। राज्य का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2047 तक परिवहन व्यवस्था को बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक बनाना है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसें, ई-टैक्सी, ई-रिक्शा, इलेक्ट्रिक सरकारी वाहन और निजी EV वाहनों को बढ़ावा देने जैसे कदम शामिल किए जा रहे हैं। सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, बैटरी तकनीक सुधारने और EV खरीद पर प्रोत्साहन देने की दिशा में भी काम कर रही है।
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
यदि यह योजना सफल होती है तो यात्रियों को कई बड़े लाभ मिल सकते हैं-
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अधिक आरामदायक और आधुनिक बसें
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कम ध्वनि और धुआं
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बेहतर सार्वजनिक परिवहन
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लंबी अवधि में संभावित किराया स्थिरता
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शहरों में स्वच्छ वातावरण
विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन भविष्य की आवश्यकता है और महाराष्ट्र इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि योजना महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी होंगी-
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भारी प्रारंभिक निवेश
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पर्याप्त बिजली आपूर्ति
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फास्ट चार्जिंग तकनीक
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बैटरी रखरखाव
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मानसून में चार्जिंग स्टेशनों की सुरक्षा
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ट्रैफिक और पार्किंग प्रबंधन
इसके अलावा, राज्यभर में समान रूप से चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना भी एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
महाराष्ट्र बनेगा EV हब
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना सफल रही तो महाराष्ट्र देश में इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन का मॉडल राज्य बन सकता है। मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार देश के अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण साबित हो सकता है। राज्य सरकार की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में शहरी परिवहन के स्वरूप को भी पूरी तरह बदल सकती है।
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