राजस्थान के कोटा जिले में कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच प्रसूताओं की मौत और सात महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले में आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। जांच में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में निर्धारित सक्रिय तत्व नहीं मिलने और अन्य गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद दवा सप्लाई करने वाली फर्म मैसर्स राजस्थान मेडिकल हॉल का ड्रग लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। अब सभी की निगाहें मेडिकल कॉलेज प्रशासन पर हैं कि वह फर्म को ब्लैकलिस्ट करने और आर्थिक दंड लगाने जैसी कार्रवाई कब तक करता है।
पांच माताओं की मौत के बाद शुरू हुई जांच
कोटा मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में 3 मई को 12 प्रसूताओं की सिजेरियन डिलीवरी की गई थी। ऑपरेशन के बाद सभी महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इनमें से पांच प्रसूताओं की मौत हो गई, जबकि सात महिलाओं की किडनी प्रभावित होने के कारण गंभीर उपचार की आवश्यकता पड़ी। घटना ने प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं और दवा आपूर्ति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए औषधि नियंत्रण संगठन ने अस्पताल में उपयोग की गई दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे थे।
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन जांच में फेल, खुली बड़ी लापरवाही
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि प्रसूताओं के उपचार में इस्तेमाल किए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में निर्धारित सक्रिय तत्व ही मौजूद नहीं था। यह खुलासा बेहद गंभीर माना गया क्योंकि ऑक्सीटोसिन प्रसव और सिजेरियन प्रक्रियाओं में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण दवा है। रिपोर्ट आने के बाद भी संबंधित सप्लायर के खिलाफ लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठे। इस बीच मामले को लेकर लगातार दबाव बढ़ता रहा और जवाबदेही तय करने की मांग तेज होती गई।


