रनवे की सुरक्षा में बाधा बनी कोलकाता की ऐतिहासिक मस्जिद, एयरपोर्ट से बाहर स्थानांतरित करने पर बनी सहमति

The CSR Journal Magazine

कोलकाता एयरपोर्ट पर 130 साल पुरानी मस्जिद हटाने का निर्णय

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (दमदम एयरपोर्ट) के हाई-सिक्योरिटी ऑपरेशनल एरिया में स्थित करीब 136 साल पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद (बांकरा मस्जिद) को दूसरी जगह स्थानांतरित (शिफ्ट) करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। विमान सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय विमानन नियमों और हवाई अड्डे के विस्तार को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय मिलकर इस 30 साल पुराने लंबित मामले का समाधान निकालने में जुटे हैं।

पुरानी मस्जिद के भविष्य पर मंडराया खतरा

कोलकाता एयरपोर्ट के भीतर स्थित 130 साल पुरानी मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है। पश्चिम बंगाल सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी इस दिशा में सक्रियता से काम कर रहे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे के निकट होने के चलते यह निर्णय लिया गया है।

स्थानांतरण की आवश्यकता और सुरक्षा कारण

यह ऐतिहासिक मस्जिद हवाई अड्डे के सेकेंडरी रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। अंतर्राष्ट्रीय उड्डयन नियमों के अनुसार, किसी भी सक्रिय रनवे के 240 मीटर के दायरे में कोई स्थायी निर्माण नहीं होना चाहिए। मस्जिद की स्थिति के कारण रनवे के टच-डाउन पॉइंट को 88 मीटर पीछे खिसकाना पड़ा है, जिससे रनवे की उपयोगी लंबाई कम हो गई है। इस वजह से बोइंग 787 और एयरबस A330 जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय विमानों को उतरने में दिक्कत आती है।

आधुनिक नेविगेशन प्रणाली (ILS) में रुकावट

कोहरे और खराब मौसम के दौरान उड़ानों की सुरक्षित लैंडिंग के लिए आवश्यक एडवांस ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ (ILS) इस क्षेत्र में मस्जिद के कारण पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में नमाज पढ़ने आने वाले लोगों को सीआईएसएफ (CISF) की कड़ी जांच से गुजरकर विशेष बसों के जरिए एयरपोर्ट के हाई-सिक्योरिटी जोन से मस्जिद तक ले जाया जाता है, जो एक बड़ा सुरक्षा जोखिम है

शुभेंदु सरकार की पहल से बढ़ी हलचल

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में यह पहल की गई है। उनके अनुसार, एयरपोर्ट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। यह मस्जिद अब रनवे के काफी करीब आ गई है, जिससे किसी भी प्रकार की घटना का जोखिम बढ़ गया है। इस कदम से अब इस प्राचीन मस्जिद के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल की राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर तालमेल के बाद इस कार्य को हरी झंडी मिली है। हाल ही में जिला अधिकारियों और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मस्जिद का संयुक्त निरीक्षण भी किया है।

वर्तमान प्रशासनिक प्रगति और योजना

एयरपोर्ट प्रशासन और जिला अधिकारियों की मस्जिद कमेटी तथा मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत जारी है। अधिकारियों ने आपसी सहमति से हवाई अड्डे की जमीन के बाहर एक बड़ी और आधुनिक मस्जिद के निर्माण का वैकल्पिक प्रस्ताव दिया है। प्रशासनिक सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस स्थानांतरण प्रक्रिया पर अंतिम बड़ा फैसला और जमीनी कार्रवाई ईद-उल-अजहा (बकरीद) के बाद तेजी से आगे बढ़ेगी।

मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व और रूपरेखा

यह मस्जिद कोलकाता की धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यहां पूजा-पाठ का आयोजन वर्षों से हो रहा है। इसके निर्माता और इतिहास भी इस मस्जिद की पहचान का महत्वपूर्ण पहलू हैं। 130 साल पुरानी यह मस्जिद भले ही ऐतिहासिक महत्व रखती हो, लेकिन अब इसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

स्थानीय लोगों की भावनाएं और प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों में इस मुद्दे पर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ का मानना है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा सबसे पहले आनी चाहिए, जबकि कुछ लोग इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए चिंतित हैं। उनका कहना है कि इस मस्जिद के हटने से उनके धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर गहरा असर पड़ेगा।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य

सरकार का मुख्य उद्देश्य एयरपोर्ट की सुरक्षा और संचालन को सुचारू बनाना है। इससे न केवल हवाई यात्रा को सुरक्षित बनाया जा सकेगा, बल्कि इससे स्थानीय  निवासियों की धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जा सकेगा। इसके साथ ही, नई जगह पर मस्जिद को पुनः स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

आगे की योजना और संभावनाएं

सरकार के इस निर्णय के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मस्जिद को किस स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार हो रहा है। संभावना है कि नए स्थान पर इसे और भी बेहतर सुविधाओं के साथ स्थापित किया जाएगा, जिससे स्थानीय समुदाय को कोई परेशानी न हो।

चर्चा का विषय बनी मस्जिद हटाने की योजना

कोलकाता एयरपोर्ट की इस मस्जिद को हटाने की योजना ने समाज में चर्चा का विषय बना दिया है। अनेक संगठन इस विषय पर अपनी राय रख रहे हैं और इसका व्यापक असर भी देखने को मिल सकता है। इससे जुड़े पूरे प्रकरण पर नजर बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि यह केवल एक धार्मिक स्थल का मसला नहीं, बल्कि सामुदायिक पहचान का भी सवाल है।

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