Ken Betwa Link Project News: विवाद के बीच जानें जमीनी हकीकत और दावों की सच्चाई

The CSR Journal Magazine
Ken Betwa Link Project News: बुंदेलखंड की बड़ी केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर राजनीतिक विवाद के बीच आ गई है। परियोजना को लेकर विस्थापन, मुआवजा, पर्यावरण और पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई सवाल उठाए जा रहे हैं। दूसरी ओर मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन ने अपने आंकड़े सामने रखते हुए कई आरोपों को गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है। विवाद के बीच सबसे ज्यादा चर्चा प्रभावित आबादी और मुआवजे को लेकर है। प्रशासन के मुताबिक मझगवां, रूंझ, केन-बेतवा और नेगुवा परियोजनाओं को मिलाकर प्रभावित आबादी करीब 23 हजार है। वहीं विरोध से जुड़े दावों में यह संख्या करीब 50 हजार बताई जा रही है।

50 हजार नहीं, करीब 23 हजार आबादी प्रभावित होने का दावा

प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक मझगवां परियोजना से 1,450 परिवारों के 5,640 लोग प्रभावित हैं। रूंझ परियोजना में 730 परिवारों के 1,906 लोग प्रभावित बताए गए हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना के पन्ना और छतरपुर क्षेत्र में 5,039 परिवारों की 15,661 आबादी प्रभावित बताई गई है। वहीं नेगुवा लघु परियोजना में विस्थापन शून्य बताया गया है। इन आंकड़ों को जोड़ने पर चारों परियोजनाओं की प्रभावित आबादी करीब 23 हजार बैठती है।

Ken Betwa Link Project News: 5,039 परिवारों के लिए ₹604 करोड़ का पैकेज

केन-बेतवा परियोजना के प्रभावित 22 गांवों के 5,039 परिवारों के पात्र हितग्राहियों के लिए ₹12.50 लाख प्रति परिवार की दर से विशेष पुनर्वास पैकेज स्वीकृत किया गया है। कुल पैकेज की राशि करीब ₹604.745 करोड़ बताई गई है। प्रशासन का दावा है कि इस राशि का 96 प्रतिशत भुगतान पहले ही किया जा चुका है। इसके अलावा छतरपुर के करीदिया, राईपुरा और सलैया में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए प्लॉट भी आवंटित किए गए हैं, जहां बिजली और पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, सरकारी आंकड़ों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में भुगतान की राशि और प्रतिशत में अंतर भी सामने आया है। केंद्र सरकार की 14 अगस्त की तथ्यात्मक जानकारी के अनुसार जुलाई 2026 तक 5,039 प्रभावित परिवारों के लिए ₹629.87 करोड़ के अवॉर्ड में से ₹590.74 करोड़ यानी 93.78 प्रतिशत राशि वितरित की जा चुकी थी। इसलिए भुगतान के आंकड़े बताते समय सरकारी स्रोत और तारीख स्पष्ट रखना जरूरी है।

बारिश में जबरन विस्थापन के आरोप पर क्या कहा गया?

परियोजना के विरोध में यह आरोप भी लगाए गए कि बारिश के मौसम में प्रभावित परिवारों को उचित वैकल्पिक व्यवस्था के बिना घरों से हटाया गया। प्रशासन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि पन्ना के आठ प्रभावित गांवों का पुनर्वास मानसून शुरू होने से पहले पूरा किया जा चुका था। प्रशासन के अनुसार फिलहाल बारिश के दौरान किसी परिवार को जबरन हटाने की कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं प्रभावित परिवारों के लिए पुनर्वास पैकेज और दूसरी व्यवस्थाओं पर काम जारी है।

पर्यावरण और पन्ना टाइगर रिजर्व का मुद्दा

Ken Betwa Link Project News: परियोजना को लेकर पर्यावरण का सवाल भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। विरोध करने वालों की ओर से पेड़ों और पन्ना टाइगर रिजर्व पर असर की आशंका जताई गई है। सरकार का कहना है कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी ली गई है और पन्ना टाइगर रिजर्व के संरक्षण के लिए अलग प्रबंधन योजना तैयार की गई है। कैचमेंट एरिया ट्रीटमेंट और वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान पर भी काम किए जाने की बात कही गई है। केंद्र सरकार ने भी अगस्त में जारी अपनी तथ्यात्मक जानकारी में परियोजना के पुनर्वास और पर्यावरणीय मंजूरियों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट की थी। परियोजना की अनुमानित लागत ₹44,604.99 करोड़ बताई गई है और जुलाई 2026 तक ₹12,445.85 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट और NGT में रोक को लेकर क्या स्थिति?

प्रशासन का कहना है कि परियोजना से जुड़ी वन और वन्यजीव मंजूरियों की शर्तों का पालन किया जा रहा है। सरकारी पक्ष के अनुसार फिलहाल सुप्रीम कोर्ट या NGT में परियोजना के काम पर रोक लगाने वाला कोई आदेश नहीं है। ऐसे दावों के बीच यह समझना जरूरी है कि किसी परियोजना के खिलाफ विरोध होना और अदालत से उस पर रोक होना दो अलग बातें हैं। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार परियोजना का काम कानूनी मंजूरियों के आधार पर आगे बढ़ रहा है।

पुलिस कार्रवाई पर भी आमने-सामने दावे

प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल की तैनाती और महिलाओं को रात में खदेड़ने के आरोप भी सामने आए हैं। प्रशासन ने इन आरोपों को गलत और भ्रामक बताया है। सरकारी पक्ष के अनुसार दौधन बांध निर्माण स्थल पर पथराव और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की स्थिति बनने के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल लगाया गया था। इस मामले में कार्रवाई भी की गई। वहीं दूसरी ओर परियोजना प्रभावितों और विरोध कर रहे लोगों की ओर से कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में इस हिस्से को दोनों पक्षों के दावों के रूप में देखना ज्यादा उचित है।

14 गांवों में फिर होगा सर्वे, छूटे लोगों को भी मिलेगा मौका

मुआवजे को लेकर उठ रहे सवालों के बीच छतरपुर के प्रभावित 14 गांवों में दोबारा सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कोई पात्र व्यक्ति मुआवजे या पुनर्वास के लाभ से छूट तो नहीं गया। रिपोर्ट के मुताबिक पांच गांवों के 59 लोगों के लिए ₹7.37 करोड़ की अतिरिक्त राशि भी स्वीकृत की गई है। वहीं 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके 313 हितग्राहियों को विशेष पैकेज का लाभ देने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा पन्ना जिले के लिए ₹202.50 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

केन-बेतवा परियोजना आखिर क्यों है इतनी अहम?

केन-बेतवा लिंक परियोजना केंद्र सरकार की प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका मकसद केन नदी के पानी को बेतवा बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड में सिंचाई और पेयजल की स्थिति सुधारना है। केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई और करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। परियोजना से 103 मेगावाट बिजली उत्पादन का भी प्रावधान है।

क्या है असली तस्वीर?

Ken Betwa Link Project को लेकर फिलहाल दो अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। सरकार और प्रशासन का कहना है कि मुआवजे और पुनर्वास का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है और छूटे हुए पात्र लोगों के लिए दोबारा सर्वे किया जा रहा है। दूसरी तरफ प्रभावितों से जुड़ी कुछ स्वतंत्र रिपोर्टों में मुआवजे की रकम, जमीन और संपत्ति के मूल्यांकन को लेकर ग्रामीणों की शिकायतें भी दर्ज की गई हैं। इसलिए इस पूरे विवाद को केवल “सरकार सही या प्रदर्शनकारी सही” के रूप में देखना आसान नहीं है। वास्तविक तस्वीर प्रभावित गांवों में दोबारा सर्वे, मुआवजे के लंबित मामलों और पुनर्वास की स्थिति साफ होने के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।

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