Kedarnath में श्रद्धालुओं की भीड़ ने तोड़ डाले सारे रिकॉर्ड

The CSR Journal Magazine
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में इस साल श्रद्धालुओं की संख्या ने सभी सीमाओं को पार कर दिया है। हर दिन औसतन 25,000 श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं, जिससे हालात गंभीर हो गए हैं। प्रशासन का दावा है कि उनकी यात्री क्षमता 22 से 24 हजार है, लेकिन यह क्षमता अब औकात से बाहर हो चुकी है। एक तरफ श्रद्धालुओं की संख्या है, दूसरी तरफ मंदिर तक की यात्रा को लेकर जद्दोजहद।

रात बिताने की मजबूरी

केदारनाथ में श्रद्धालुओं को रुकने के लिए कमरे, टेंट और गेस्ट हाउस का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है। घोड़ा पड़ाव से मंदिर तक मौजूद सभी दुकानें और टेंट हाउस फुल हो चुके हैं। इमरजेंसी में रुकने पर एक कमरे का किराया 5,000 से 10,000 रुपये तक जा चुका है। यहां तक कि छोटे टेंट भी 2,000 से 6,000 रुपये में मिल रहे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को मजबूरन रात वहीं बितानी पड़ रही है।

खास व्यवस्था, आम श्रद्धालुओं पर असर

वीआईपी दर्शन सुविधाओं ने आम श्रद्धालू के लिए दर्शन का समय और भी बढ़ा दिया है। हेलिकॉप्टर से आ रहे श्रद्धालुओं को गर्भगृह में पहले जाने दिया जा रहा है। इसके कारण लाइन में लगे श्रद्धालुओं को इंतजार करना पड़ता है। इस स्थिति ने भीड़ को और बढ़ा दिया है।

सुविधाओं का अभाव

केदारनाथ में इस समय शौचालयों की संख्या बेहद कम है। केवल 239 शौचालय उपलब्ध हैं और नए 60 शौचालय बनाने की प्रक्रिया चल रही है। सफाई कर्मचारियों की संख्या 412 है, जो कई बार 20 घंटे से अधिक की ड्यूटी कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल श्रद्धालुओं के लिए, बल्कि पर्यावरण के लिए भी चिंताजनक है।

आलम: एक अद्वितीय यात्रा

पिछले 25 दिनों में रिकॉर्ड 5.50 लाख से ज्यादा श्रद्धालु केदारनाथ आ चुके हैं। आधी रात से दर्शन के लिए लंबी लाइनें लगनी शुरू हो जाती हैं। ऐसा लगता है जैसे यात्रा के इतिहास में श्रद्धालुओं की यह संख्या सबसे अधिक है। सुबह 4 बजे दर्शन के लिए लगे श्रद्धालुओं को 8 से 10 घंटे का लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य और सुरक्षा की चिंता

12 घंटे की चढ़ाई के बाद जब श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, तो वहां दर्शन के लिए लंबी कतारें होती हैं। उच्च स्वास्थ्य और सुरक्षा जोखिम के चलते प्रशासन को सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता पड़ रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग रात बिताने के लिए मजबूर हैं, जिससे केदारनाथ की यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।

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