क्या भांग रखना या बेचना अपराध है? जानिए कानून और असली सच्चाई

The CSR Journal Magazine
झारखंड हाईकोर्ट ने हाल ही में भांग के मामले में अपने फैसले से पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया है। आमतौर पर भांग को गांजे और चरस के साथ नशीले पदार्थों में शामिल किया जाता है, लेकिन इस बार कोर्ट ने साफ किया कि भांग NDPS Act यानी नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेस एक्ट के दायरे में नहीं आता। इस फैसले ने भांग की वैधता पर एक नई बहस छेड़ दी है।

कोर्ट का फैसला और मामला

यह मामला 2000 का है जब एक व्यक्ति को भांग रखने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। निचली अदालत ने उसे सजा सुनाई थी, परंतु हाईकोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने बताया कि NDPS Act के अनुसार भांग का उल्लेख कहीं नहीं है। भांग को कैनाबिस की पत्तियों और बीजों से बनाया जाता है, जबकि गांजा और चरस का निर्माण अन्य भागों से होता है। यही कारण है कि भांग को कानून में विशेष छूट मिली है।

भांग से जुड़े कानूनी पहलू

भांग को लेकर कानून में जो बातें कही गई हैं, उनका ध्यान रखना जरूरी है। NDPS Act की धारा 2(iii) में कैनाबिस के तीन रूप बताए गए हैं – चरस, गांजा और उनका मिश्रण। लेकिन भांग का कहीं भी उल्लेख नहीं है। इससे साबित होता है कि भांग को सामान्य अवैध नशीले पदार्थों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

भांग की बिक्री का क्या है हाल?

देश के विभिन्न राज्यों में सरकरी लाइसेंस के जरिए भांग की बिक्री होती है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में भांग की दुकानें वैध हैं। राजस्थान में तो हर साल भांग की थोक बिक्री के लिए लाइसेंस की नीलामी होती है, जो राज्य के लिए करोड़ों रुपये की आमदनी का माध्यम बनती है।

भांग का इस्तेमाल और उपयोगकर्ता

सामाजिक न्याय विभाग और एम्स दिल्ली की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2.8 फीसदी लोग भारत में किसी न किसी रूप में कैनाबिस का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से 2.2 करोड़ लोग भांग का उपयोग करते हैं। हालांकि, भांग का इस्तेमाल अधिक आम माना जाता है, परंतु इसके लती बने का अनुपात कम है।

संस्कृति का हिस्सा

भारत में भांग का उपयोग केवल कानूनी दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मामलों में भी किया जाता है। होली और महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों पर भांग का इस्तेमाल किया जाता है, जहां इसे विशेष रूप से प्रसाद माना जाता है। आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों के लिए भी उपयोग किया जाता है।

भांग की खेती पर विचार

हाल के वर्षों में भांग की खेती को लेकर कई राज्यों में बहस चल रही है। हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में भांग को औद्योगिक जड़ी-बूटी के रूप में मान्यता देने की मांग उठी है। झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला एक नया अध्याय तो नहीं, लेकिन कानूनी भाषा की स्पष्टता जरूर देता है।

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