जालंधर का बरगद: जब अंग्रेजों ने क्रांतिकारी लटकाए

The CSR Journal Magazine
जालंधर का कंपनी बाग आज एक खूबसूरत पार्क है, जहां बच्चे खेलते हैं और लोग सैर करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह वही जगह है, जहां अंग्रेजों ने अपनी बर्बरताओं के निशान छोड़े थे? वे दिनों के दौरान करीब 300 साल पुराना बरगद का पेड़ खड़ा है, जिस पर क्रांतिकारियों को लटकाकर फांसी दी गई थी। 1857 में, जालंधर छावनी में भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ बगावत की थी। इसकी कहानी इस पार्क की जमीन में दफन है।

कंपनी बाग का महत्व

यह पार्क जालंधर की दोआबा क्षेत्र में है, जो सतलुज और ब्यास नदियों के बीच स्थित है। 1846 में अंग्रेजों के कब्जे के बाद, उन्होंने यहां एक सैन्य छावनी बनाई थी। ये छावनी केवल ब्रिटिश सैनिकों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय भारतीय पैदल सेना के लिए भी विकसित की गई थी। इसी कारण से इस स्थान का नाम ‘कंपनी बाग’ पड़ा।

बरगद की दास्तान

कंपनी बाग में मौजूद बरगद का पेड़ केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि इतिहास का जीता-जागता गवाह है। दीपक जालंधरी की किताब ‘एक शहर जालंधर’ के अनुसार, इस पेड़ पर कई विद्रोहियों को फांसी दी गई थी। यह पेड़ तब से मौजूद है जब अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर कब्जा किया। आज यह सब कुछ बदल चुका है, और लोग यहां सुबह-सुबह सैर करने आते हैं और बच्चों के लिए झूले लगे हैं।

कंपनी बाग का नामकरण

समय के साथ कंपनी बाग का नाम भी कई बार बदला। पहले इसे दिल्ली पार्क कहा जाता था क्योंकि यह दिल्ली गेट के सामने था। अंग्रेजों ने इसे एम्प्रेस पार्क का नाम दिया, फिर क्वींस गार्डन भी कहा गया। आजादी के बाद इसे एक बार फिर से नेहरू गार्डन नाम दिया गया, लेकिन अंत में लोग इसे वापस कंपनी बाग के नाम से जानने लगे।

1857 की बगावत का असर

जो विद्रोह 1857 में अन्य जगहों पर शुरू हुआ, उसका असर जालंधर छावनी तक भी पहुंचा। 7-8 जून को भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ बगावत की। इसमें 6वीं नेटिव इन्फैंट्री और 36वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक शामिल थे। विद्रोह के दौरान कई सिपाहियों को गिरफ्तार किया गया, और अंग्रेजों ने इनमें से कई को सख्त सजाएं दीं।

क्रांति का केंद्र: कंपनी बाग

कंपनी बाग केवल अंग्रेजों की बर्बरताओं का स्थल नहीं था, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र भी बना। यहां स्वतंत्रता सेनानी जन जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते थे और नेता सभाएं करते थे। न केवल पंडित नेहरू, बल्कि इंदिरा गांधी भी यहां अपने जलसे करने आई थीं।

आज का कंपनी बाग

आधुनिक युग में कंपनी बाग का रूप बदल चुका है। जालंधर नगर निगम इसकी देखभाल करता है। आज लोग यहां न केवल सैर के लिए आते हैं, बल्कि यह एक ऐतिहासिक स्थल भी है, जहां कभी देश की आजादी के लिए संघर्ष हुआ। इस पार्क की हरियाली आज भी उस समय की कहानियों को बयां करती है।

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