आसानी से मिलता है शिकार: जयपुर के जंगलों में बेखौफ शिकारी और जंगली खरगोश का काला कारोबार

The CSR Journal Magazine
जयपुर के जंगलों में जंगली खरगोशों के शिकार का भयानक सच सामने आया है। एक शिकारी ने कैमरे पर चौंकाने वाला बयान दिया, “आप 24 घंटे पहले ऑर्डर दो, हम खरगोश का शिकार कर लाएंगे।” ऐसे बेखौफ शिकारी आजकल गुलेल का उपयोग करके रोजाना 3-4 खरगोशों का शिकार कर रहे हैं। इन्हें 1000 से 2000 रुपए में बेचा जाता है।

खरगोश का शिकार: स्वास्थ्य के लिए खतरा?

इस शिकार के पीछे कई भ्रांतियां हैं। शिकारी दावा करते हैं कि खरगोश का खून पीने से अस्थमा जैसी बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं। लेकिन राज्य के सबसे बड़े अस्पताल के डॉक्टरों ने इस दावे को झूठा बताया है। वे कहते हैं कि जानवर का खून पीने से किसी भी बीमारी का इलाज नहीं हो सकता।

7 दिनों की पड़ताल में जुटे शिकारियों का पर्दाफाश

दैनिक भास्कर की टीम ने 7 दिनों तक बगरू, पहाड़िया गांव, दौसा और अन्य इलाकों में शिकारियों की खोज की। एक युवक ने हमें बताया कि वे ग्राहक की डिमांड पर शिकार करते हैं। हमारे सामने कुछ ही समय में दो जंगली खरगोश लाए गए और पैसे की लेन-देन की गई।

गुलेल से निशाना: पारंपरिक तरीके का इस्तेमाल

शिकारी गुलेल का उपयोग करके खरगोश का शिकार करते हैं। यह तरीका ज्यादा प्रभावी इसलिए है क्योंकि खरगोश थोड़ी सी आवाज सुनते ही भाग जाते हैं। गुलेल से उन्हें घायल करके फिर जाल से पकड़ लिया जाता है। बुलेट से किए गए शिकार के दौरान खरगोश में जहर फैल जाता है, जिससे ये तरीका सुरक्षित माना जाता है।

डिमांड का बड़ा बाजार

शिकारियों ने बताया कि बाजार में खरगोश की डिमांड बढ़ रही है। वे कहते हैं कई होटलों के मालिक भी उनसे संपर्क करते हैं। ऑर्डर मिलने पर वे शहर के आउटर में डिलीवरी करते हैं, लेकिन पुलिस के डर से शहर के अंदर नहीं जाते।

जानवरों के खून से बीमारी ठीक करने का दावा निराधार

डॉक्टरों का कहना है कि खरगोश का खून पीने से किसी भी प्रकार की बीमारी का इलाज नहीं हो सकता। यह एक अफवाह है, जो कई सालों से फैली हुई है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट भी इस तरह की भ्रांतियों से चिंतित हैं।

जयपुर में खरगोश का शिकार कानूनी अपराध

भारत में जंगली खरगोश, जिसे भारतीय खरहा भी कहते हैं, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अंतर्गत संरक्षित है। इसके शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। शिकारियों ने स्वीकार किया कि कई बार उन्हें पकड़ लिया गया है, लेकिन अच्छे पैसे के चलते वे दोबारा इस काम में लग जाते हैं।

वन विभाग की कार्रवाई की तैयारी

वन विभाग के उपवन संरक्षक ने कहा है कि खरगोश का शिकार करना गलत है। यदि किसी को जानकारी है तो उन्हें सूचित करें ताकि कार्रवाई की जा सके।

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