शादीशुदा होकर ‘I Love You’ पोस्ट? कोर्ट ने कहा- ये प्यार नहीं, क्रूरता है

The CSR Journal Magazine
राजस्थान के जयपुर स्थित Family Court Jaipur के एक हालिया फैसले ने सोशल मीडिया और वैवाहिक रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शादीशुदा व्यक्ति द्वारा किसी अन्य के साथ रोमांटिक पोस्ट साझा करना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आ सकता है। यह फैसला एक तलाक मामले की सुनवाई के दौरान 17 अप्रैल को सुनाया गया, जो अब चर्चा में है।

पति ने लगाए अवैध संबंध के आरोप

मामले में पति ने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया कि उसका किसी अन्य व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध है। उसने कोर्ट में सबूत के तौर पर इंस्टाग्राम की एक फोटो पेश की, जिसमें महिला एक अन्य व्यक्ति के साथ नजर आ रही थी और कैप्शन में “I Love You Jaan” लिखा था। पति का दावा था कि यह पोस्ट उनके वैवाहिक संबंधों के लिए अपमानजनक और मानसिक रूप से पीड़ादायक है।

पत्नी की सफाई: अकाउंट था हैक

इन आरोपों के जवाब में पत्नी ने दावा किया कि उसका इंस्टाग्राम अकाउंट हैक हो गया था और यह पोस्ट उसने नहीं, बल्कि किसी हैकर ने डाली थी। उसने यह भी कहा कि फोटो में दिख रहा व्यक्ति उसका जीजा (बहन का पति) है और इस पोस्ट का गलत अर्थ निकाला जा रहा है।

कोर्ट ने क्यों नहीं मानी दलील?

कोर्ट ने महिला की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। जज ने पाया कि अकाउंट हैक होने के संबंध में महिला ने किसी भी प्रकार की आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी, जो उसकी बात को कमजोर बनाता है। इसके अलावा, जांच में यह भी सामने आया कि महिला ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को “सिंगल” बताया हुआ था, जो उसके वैवाहिक स्थिति के विपरीत था।

10 साल पुरानी शादी का अंत

यह दंपत्ति वर्ष 2015 में शादी के बंधन में बंधा था, लेकिन 2017 से ही उनके बीच मतभेद शुरू हो गए थे। पति के अनुसार, पत्नी सास-ससुर के साथ नहीं रहना चाहती थी, जिसके चलते दोनों अलग किराए के मकान में रहने लगे। हालांकि, अलग रहने के बाद भी विवाद खत्म नहीं हुए और अंततः दोनों 2017 से अलग रह रहे थे। अब करीब 10 साल बाद कोर्ट ने इस विवाह को समाप्त करने का फैसला सुनाया।

सोशल मीडिया व्यवहार भी बना तलाक का आधार

इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज के समय में सोशल मीडिया पर की गई गतिविधियां भी वैवाहिक जीवन पर गहरा असर डाल सकती हैं। कोर्ट ने माना कि इस तरह की पोस्ट पार्टनर के लिए मानसिक पीड़ा का कारण बन सकती हैं, जिसे कानून “क्रूरता” के रूप में देख सकता है।

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