Jagannath Puri के राजा दिब्यसिंह की ISKCON से अपील: गलती से रथयात्रा न निकालें

The CSR Journal Magazine

शास्त्रों के खिलाफ जा रही ISKCON की रथ यात्रा

पुरी के गजपति महाराज और श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष दिब्यसिंह देब ने ISKCON से निवेदन किया है कि वह रथ यात्रा का आयोजन शास्त्रों के अनुसार न करे। उन्होंने कहा है कि ISKCON ऐसे समय रथ यात्रा कर रहा है, जो सही नहीं हैं और इससे भक्तों की भावनाएं आहत हो रही हैं।

भक्तों की भावनाओं का ध्यान रखें

दिब्यसिंह ने मायापुर स्थित ISKCON की गवर्निंग बॉडी कमीशन (GBC) के चेयरमैन श्री मधुसेविता दास प्रभु को पत्र लिखकर उनके द्वारा अक्टूबर 2025 में लिए गए उस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है, जिसमें भारत से बाहर विभिन्न तिथियों पर रथ यात्रा निकालने का उल्लेख है। उदाहरण के लिए, हाल ही में केन्या की राजधानी नैरोबी में रथ यात्रा आयोजित की गई थी।

महत्वपूर्ण तिथियाँ और कार्यक्रम

इस वर्ष स्नान पूर्णिमा की तिथि 29 जून थी और मुख्य रथयात्रा 16 जुलाई को आयोजित की जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, रथ यात्रा हमेशा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि पर होती है। पुरी में रथों का निर्माण अंतिम चरण में है, जहां लगभग 220 कारीगर दिन-रात काम कर रहे हैं।

गलत तिथियों पर रथ यात्रा का आयोजन

गजपति महाराज ने ISKCON के रथ यात्रा कार्यक्रम पर आपत्ति जताई है, जिसमें बताया गया है कि स्नान यात्रा की तिथियों का पालन नहीं किया जा रहा है। ISKCON ने पहले विश्वास दिलाया था कि स्नान यात्रा ज्येष्ठ पूर्णिमा पर मनाई जाएगी, लेकिन अब वे विभिन्न शहरों में इसे अलग तारीखों पर कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश की रथ यात्राओं पर सवाल

गजपति महाराज ने मध्य प्रदेश में उज्जैन स्थित ISKCON मंदिर द्वारा 16 से 25 जुलाई के बीच प्रस्तावित रथ यात्राओं पर भी प्रश्न उठाया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रथ यात्रा केवल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि से प्रारंभ होती है।

ISKCON का जवाब और तर्क

ISKCON ने पुरी मंदिर की पिछली आपत्तियों का जवाब देते हुए कहा है कि विभिन्न देशों में जलवायु, सरकारी नियम और स्थानीय सांस्कृतिक कारक रथ यात्रा की तारीखों पर प्रभाव डालते हैं। ISKCON का कहना है कि हर देश में एक जैसी स्थिति नहीं होती है, जिससे शास्त्रों में बताई गई तारीखों का पालन करना कठिन हो जाता है।

अतीत का विवाद फिर से उभरा

रथ यात्रा को लेकर विवाद नया नहीं है। पहले भी गजपति महाराजा ने ISKCON से अनुरोध किया था कि विदेशों में भी कम से कम पुरी के धार्मिक पंचांग का पालन किया जाए। आने वाले वर्षों में ऐसे विवाद बढ़ सकते हैं, जिस पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

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