खून और पानी साथ नहीं बहेगा’, सिंधु संधि पर कोर्ट में पाकिस्तान की जीत, भारत अगला ऐक्‍शन क्या लेगा?

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: ‘परमानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन’ ने हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच ‘सिंधु जल संधि’ को पूरी तरह से लागू मानते हुए भारत को जिम्मेदारियों का पालन करने की सलाह दी है। कोर्ट ने भारत के उस निर्णय को भी खारिज किया, जिसमें संधि को ‘स्थगित’ करने की बात की गई थी। इसके अनुसार, कोई भी एक पक्ष संधि के संचालन को ‘रोकने या खत्म करने’ का कोई प्रावधान नहीं कर सकता। कोर्ट ने भारतीय हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्लांट पर कुछ निर्माण कार्यों को भी रोकने का आदेश दिया है।

पाकिस्तान की स्थिति मजबूत

हालांकि, भारत ने इस कोर्ट की स्थिति को मान्यता नहीं दी। भारत ने इस प्रक्रिया में कभी भाग नहीं लिया और बार-बार इसे अमान्य बताकर खारिज किया है। नवभारत टाइम्स ऑनलाइन ने कई विशेषज्ञों से बात की है, जिनमें पूर्व राजदूत बाला भास्कर और पहली महिला डिप्लोमेट रूचि घनश्याम शामिल हैं।

संधि के मामले में भविष्य की योजना

विशेषज्ञ बताते हैं कि हीग कोर्ट का फैसला पाकिस्तान के लिए एक कागजी जीत हो सकता है, लेकिन वास्तविक प्रभाव नहीं होगा। डिप्लोमेट रूचि घनश्याम ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा भारत के प्रोजेक्ट्स में बाधा डालता रहा है। इससे भारत के पास इस संधि को स्थगित करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था।

भारत का कानूनी दृष्टिकोण

पूर्व राजदूत बाला भास्कर ने इस कोर्ट की वैधता पर भारत के ऐतराज की पुष्टि की है। उनका कहना है कि 1960 की संधि में विवाद समाधान का एक त्रि-स्तरीय तंत्र है, जिसे भारत ने अपनाया था पर पाकिस्तान ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता

अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, कोई भी वैश्विक निकाय एक संप्रभु राष्ट्र को ऐसे फैसले मानने का दबाव नहीं डाल सकता, जिसका क्षेत्राधिकार ही विवादित हो। भारत की तरफ से कोर्ट की कार्यवाही का हिस्सा बनने से इनकार करने को एकतरफा निर्णय माना गया है।

भारत का नया दृष्टिकोण

विशेषज्ञ शुव्रोकमल दत्ता ने बताया कि पाकिस्तान द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करता रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के हिस्से के पानी का उपयोग नहीं किया जा रहा था और अब जलवायु परिवर्तन के कारण संधि के पुनः विचार की जरूरत है।

भारत की रणनीति: खून और पानी साथ नहीं बहेंगे

बाला भास्कर ने कहा कि भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह किसी भी ऐसे कोर्ट के फैसले को नहीं मानेगा। पाकिस्तान से आतंकवाद को लेकर कोई बात नहीं होने पर यह संधि भी तभी तक कायम रहेगी जब तक पाकिस्तान में बदलाव नहीं होता।

जल विवाद: बांग्लादेश का परिदृश्य

भारत का बांग्लादेश के साथ भी जल विवाद है, जहां 1996 की गंगा जल संधि को नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश के साथ जल विवाद अधिक स्थायी है और बातचीत के माध्यम से इसे सुलझाया जा सकता है।

समग्र तस्वीर

इस परिस्थिति में पाकिस्तान के दोहरे मापदंड की वजह से भारत को अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी। कई विशेषज्ञ यह मानते हैं कि

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