UNHRC में भारत का पाकिस्तान को जवाब: जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, और हमेशा रहेगा!

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UNHRC में भारत का पाकिस्तान को माकूल जवाब, ‘जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है’

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के उच्च स्तरीय सत्र के दौरान एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर तीखी झड़प देखने को मिली है। वैश्विक मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार और झूठी कहानियों को गढ़ने के लिए करने पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान को बेहद कड़ा और माकूल जवाब दिया है। जेनेवा में आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान भारत ने अपने ‘प्रत्युत्तर के अधिकार’ (राइट ऑफ रिप्लाई) का उपयोग करते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न तथा अविभाज्य अंग था, है और हमेशा रहेगा। भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने स्पष्ट किया कि वर्ष 1947 के कानूनी, ऐतिहासिक और संवैधानिक विलय के बाद इस पूरे क्षेत्र की संप्रभुता को लेकर कोई भी संशय नहीं है और पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का कोई कानूनी, राजनीतिक या नैतिक अधिकार नहीं है।

वैश्विक समुदाय को भारत की चेतावनी

भारतीय प्रतिनिधि ने परिषद के सामने पाकिस्तान और इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) द्वारा उठाए गए कश्मीर संबंधी सभी संदर्भों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। भारतीय दल ने वैश्विक समुदाय को सचेत करते हुए कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया उसकी अपनी गहरी घरेलू विफलताओं, आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक हताश कोशिश है। इसके साथ ही यह सीमा पार आतंकवाद को शह देने की उसकी पुरानी और असफल नीति का हिस्सा है। भारतीय पक्ष ने वैश्विक मंच पर यह तथ्य पुरजोर तरीके से रखा कि जम्मू-कश्मीर में एकमात्र अनसुलझा मुद्दा केवल यही है कि पाकिस्तान ने भारतीय केंद्र शासित प्रदेश के एक बड़े हिस्से (PoJK और गिलगित-बाल्टिस्तान) पर दशकों से अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है, जिसे उसे बिना किसी शर्त के तुरंत खाली कर देना चाहिए।

पाकिस्तानी पाखंड और मानवाधिकारों के उल्लंघन का पर्दाफाश

भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जो देश खुद अपने ही नागरिकों के मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर दमन कर रहा है, जहाँ अल्पसंख्यकों को बुनियादी अधिकार तक नसीब नहीं हैं और जहाँ आतंकवाद को एक राजकीय नीति (स्टेट पॉलिसी) के रूप में पाला-पोसा जाता है, उसका भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े और जीवंत लोकतांत्रिक देश को मानवाधिकारों पर उपदेश देना न केवल हास्यास्पद है बल्कि पाखंड की पराकाष्ठा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय जनता पर हो रहे भयानक अत्याचारों का मामला भी बेहद आक्रामक ढंग से उठाया। भारत ने परिषद को अवगत कराया कि हाल के महीनों में इन क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आसमान छूती कीमतों, भारी करों, गेहूं की कमी और बदतर बिजली संकट को लेकर अभूतपूर्व जन-आक्रोश देखा गया है। वहां की स्थानीय जनता सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की मांग कर रही है, जिसे दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और रेंजर्स द्वारा क्रूर बल प्रयोग, अवैध हिरासत, इंटरनेट बैन और नागरिकों के बुनियादी मानवाधिकारों के हनन की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। भारत ने कहा कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों का दुरुपयोग कर कश्मीरी जनता के प्रति झूठी हमदर्दी दिखाता है, जबकि असलियत यह है कि उसके अपने अवैध नियंत्रण वाले क्षेत्रों में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचला जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के इस प्रतिष्ठित मंच पर विभिन्न अंतरराष्ट्रीय नागरिक समाज संगठनों और निर्वासित कश्मीरी कार्यकर्ताओं ने भी पाकिस्तान की पोल खोलते हुए गवाही दी कि PoJK में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।

अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास का नया युग

UNHRC में भारत सरकार के रुख को स्पष्ट करते हुए भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने यह भी रेखांकित किया कि अगस्त 2019 में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में एक नए और ऐतिहासिक युग की शुरुआत हुई है। इन ऐतिहासिक संवैधानिक सुधारों ने क्षेत्र के उन वंचित लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम किया है, जो दशकों से बुनियादी अधिकारों से महरुम थे। पिछले कुछ वर्षों में कश्मीर घाटी और लद्दाख में बुनियादी ढांचे का अभूतपूर्व सुदृढ़ीकरण हुआ है। सड़कों, राजमार्गों, टनल और रेलवे नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ शिक्षा और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से जाल बिछाया गया है।भारत ने स्पष्ट किया कि आज जम्मू-कश्मीर के आम नागरिक भारत के अन्य राज्यों के नागरिकों की तरह ही अपने सभी लोकतांत्रिक, सामाजिक और मौलिक अधिकारों का पूरी स्वतंत्रता के साथ आनंद ले रहे हैं। हाल के समय में क्षेत्र में हुए पूरी तरह से शांतिपूर्ण और पारदर्शी स्थानीय निकाय व विधानसभा चुनाव, जिसमें रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया, और पर्यटन उद्योग में आया भारी उछाल इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वहां की जनता पाकिस्तान के अलगाववादी एजेंडे को नकार कर शांति, प्रगति और समृद्धि के रास्ते पर बहुत आगे बढ़ चुकी है। भारत ने पाकिस्तान को कड़ा परामर्श दिया कि वह खयाली दुनिया की बयानबाजी और झूठे एजेंडे को छोड़कर अपने देश के भीतर बलूच, सिंधी, अहमदिया और ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को रोके और अपनी जमीन पर चल रहे आतंकवाद के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करे।

OIC को भारत की सख्त और दोटूक नसीहत

भारत ने पाकिस्तान के साथ-साथ इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) को भी आड़े हाथों लिया। भारतीय विदेश मंत्रालय और राजनयिकों ने साफ शब्दों में कहा कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने का कोई अधिकार (लोकस स्टैंडाई) नहीं है। भारत ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि यह संगठन बार-बार पाकिस्तान के निहित राजनीतिक स्वार्थों और भारत विरोधी दुष्प्रचार के एजेंडे को हवा देने के लिए अपने मंच का दुरुपयोग होने दे रहा है। भारत ने OIC को नसीहत दी कि वह पाकिस्तान के दुष्प्रचार का जरिया बनने के बजाय उसे अपने देश में लोकतंत्र की बहाली करने, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर लगाम लगाने की सलाह दे।

आतंकवाद और बातचीत कभी भी एक साथ नहीं चल सकते

इस कूटनीतिक टकराव में भारत ने एक बार फिर दुनिया के सामने अपनी इस नीति को पूरी दृढ़ता से दोहराया है कि ‘आतंकवाद और बातचीत’ कभी भी एक साथ नहीं चल सकते। भारत ने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, हथियारों की तस्करी और आतंकी फंडिंग को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक उसके साथ किसी भी प्रकार की द्विपक्षीय चर्चा संभव नहीं है। UNHRC के इस सत्र में भारत के इस आक्रामक, स्पष्ट और अकाट्य तथ्यों से भरे रुख के सामने पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के पास कोई जवाब नहीं था, जिससे पाकिस्तान वैश्विक स्तर पर एक बार फिर पूरी तरह अलग-थलग पड़ता नजर आया। इस प्रकार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच से भारत ने यह वैश्विक संदेश पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के साथ किसी भी मंच पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जम्मू-कश्मीर पूरी तरह से भारत का आंतरिक विषय है और इस पर किसी भी तीसरे पक्ष, संगठन या देश की अनधिकृत दखलंदाजी को कभी भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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