भारतीय सेना की दक्षिणी कमान ने राजस्थान के पोखरण में ‘अग्नि वर्षा’ का अभ्यास किया, जिसमें उनकी विध्वंसक मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन हुआ। यह अभ्यास 24 फरवरी 2026 को हुआ, और इसका उद्देश्य यह दिखाना था कि कैसे सेना कंबाइंड आर्म्स के तहत विभिन्न युद्ध इकाइयों को मिलाकर तेज और सटीक कार्रवाई कर सकती है। अभ्यास के दौरान सेना ने अपनी तैयारी, आधुनिक तकनीक और संयुक्त युद्ध क्षमता का अविश्वसनीय प्रदर्शन किया।
एकीकृत संचालन की ताकत
इस युद्धाभ्यास में टैंक, तोपखाना, रॉकेट सिस्टम, हेलीकॉप्टर और ड्रोन का समावेश हुआ। सभी ने मिलकर एकीकृत तरीके से ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। रेगिस्तानी क्षेत्र में तोपों की गूंज के साथ-साथ आसमान में भारतीय सेना की शक्ति देखने को मिली। यह अभ्यास अपने आप में एक बड़ा संदेश था कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है।
आधुनिक तकनीक और शक्ति का प्रदर्शन
इस अभ्यास के दौरान विभिन्न आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जैसे मानव रहित ड्रोन, निगरानी सिस्टम, काउंटर-ड्रोन तकनीक, लंबी दूरी के रॉकेट और नेटवर्क-आधारित कमांड सिस्टम। ये सभी हथियार भारतीय सेना की बढ़ती तकनीकी क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं।
हथियारों की सूची: क्या क्या हुआ शामिल?
अग्नि वर्षा में जिन प्रमुख हथियारों का उपयोग किया गया, वे हैं: T-90 टैंक, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल, K-9 वज्र स्वचालित तोप, शारंग और बोफोर्स तोपें, रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, स्वदेशी ALH हथियारयुक्त हेलीकॉप्टर और अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर। निगरानी और हमला करने वाले ड्रोन भी इस अभ्यास का हिस्सा रहे।
समन्वयित कार्रवाई की क्षमता
सेना ने इस अभ्यास के जरिए यह स्पष्ट किया कि वह आधुनिक तकनीक, स्वदेशी हथियारों और तेज समन्वयित कार्रवाई के लिए तैयार है। अग्नि वर्षा ने दर्शाया कि भारतीय सेना रेगिस्तानी इलाकों से लेकर सीमा तक किसी भी परिस्थिति में त्वरित और निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है। इसने तकनीकी समावेशन और क्षमता विकास पर भी जोर दिया।
राष्ट्रीय सुरक्षा का सर्वोचित स्तर
अभ्यास से यह भी स्पष्ट हुआ कि भारतीय सेना राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं के अनुरूप तेज, समन्वित और निर्णायक कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। यह देश की सैन्य शक्ति का एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो आसमान छूती तकनीकी क्षमताओं और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है।
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