कांग्रेस ने ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम आपूर्ति को लेकर पीएम मोदी और बीजेपी पर साधा निशाना

The CSR Journal Magazine
ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम सप्लाई को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर जमकर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि बीजेपी जिस समझौते का श्रेय ले रही है, वह दरअसल 2008 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की पहल का नतीजा है। कांग्रेस ने बीजेपी की कटाक्ष करते हुए बताया कि उस समय इस परमाणु समझौते का विरोध भाजपा ने किया था। ऐसे में अब श्रेय लेना ‘यू-टर्न’ कहा जा सकता है। जयराम ने कहा कि बीजेपी का इकोसिस्टम ऑस्ट्रेलिया के भारत को यूरेनियम बेचने को मोदी की कामयाबी बताने में जुटा है।

कांग्रस की दलीलें

जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट भी साझा की, जिसमें उन्होंने जानकारी दी कि 4 दिसंबर 2011 को ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने भारत को यूरेनियम बेचन की अनुमति दी थी। यह अनुमति अक्टूबर 2008 में इंडिया-यूएस न्यूक्लियर एग्रीमेंट के बाद मिली थी। उनका कहना है कि मोदी सरकार को ये बताना चाहिए कि अगर भारत इतना ‘भरोसेमंद स्ट्रेटेजिक पार्टनर’ था, तो 5 सितंबर 2014 के न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट को लागू होने में 11 साल क्यों लगे?

इतिहास के पन्ने पलटे

जयराम ने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि, “अवार्ड-जीवी ने गर्व से घोषणा की है कि ऑस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम सप्लाई करेगा।” जबकि, यह केवल अमेरिका-भारत न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट की बदौलत संभव हुआ जिसका कानून 8 अक्टूबर 2008 को बना। यह बातचीत जुलाई 2005 में प्रेसिडेंट जॉर्ज बुश के साथ डॉ. मनमोहन सिंह की मीटिंग के बाद शुरू हुई।

बीजेपी का विरोध

कांग्रेस ने बीजेपी पर यह भी आरोप लगाया कि उस समय भाजपा ने इस एग्रीमेंट का संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह हमेशा विरोध किया था। जबकि कांग्रेस इस तरह की पहलों को टर्निंग पॉइंट मानती है, बीजेपी के बारे में कहा गया कि वह यू-टर्निंग पॉइंट में माहिर है।

समझौतों की श्रृंखला

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 9 जुलाई को सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, समुद्री सुरक्षा और मिनरल सेक्टर से जुड़े कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा में दोनों देशों की साझेदारी की अहमियत पर जोर दिया। इस सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की कमर्शियल सप्लाई होगी। यह समझौता ऐतिहासिक न्यूक्लियर सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर होने के 10 साल से ज्यादा समय बाद हुआ।

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