नेपाल के पीएम बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरी ‘Gen Z’ ब्रिगेड

The CSR Journal Magazine

नेपाल की राजनीति में बवाल- बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरा Gen Z

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र ‘बालेन’ शाह एक समय पर युवाओं के बीच में काफी लोकप्रिय रहे हैं। उन्हीं युवाओं ने उन्हें सत्ता का सर्वोच्च पद दिलाने में मदद की थी। लेकिन अब वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। यह बदलाव अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे कई कारण हैं। जब बालेन शाह को सत्ता मिली, तब लोगों को उन्हें लेकर बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन अब वह उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं।

जिस Gen Z ने बनाया था प्रधानमंत्री, अब उसी युवा क्रांति के निशाने पर बालेन शाह

नेपाल की राजनीति में इस समय एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक मोड़ देखा जा रहा है। जिस Gen Z यानी युवा पीढ़ी ने पारंपरिक राजनीतिक दलों को उखाड़ फेंककर एक रैपर से राजनेता बने बालेंद्र शाह (बालेन शाह) को सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाया था, आज वही युवा उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।

नेपाल में बवाल

नेपाल की राजधानी काठमांडू का सिंहदरबार सचिवालय और ऐतिहासिक मैतीघर मंडला एक बार फिर प्रदर्शनकारियों के नारों से गूंज रहा है। युवाओं का यह गुस्सा बालेन शाह सरकार के लिए उनके राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हालिया विरोध प्रदर्शनों की जड़ें किसी राजनीतिक लाभ में नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मानवाधिकारों और आम जनता की आजीविका से जुड़ी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके तीन मुख्य कारण हैं।

बिना पुनर्वास के झुग्गीवासियों की बेदखली

काठमांडू घाटी में नदी के किनारों पर सालों से करीब 3,466 भूमिहीन परिवार अवैध बस्तियों (झुग्गियों) में रह रहे थे। बालेन शाह सरकार ने बिना किसी ठोस पुनर्वास योजना के इन गरीब परिवारों को हटाने के लिए एक बड़ा उत्पीड़न और बेदखली अभियान चलाया। सुरक्षा बलों और काठमांडू नगर पुलिस ने लगभग 2,600 परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए, जिससे 15,000 से अधिक लोग बेघर हो गए। सरकार ने केवल 325 परिवारों के लिए अस्थायी शेल्टर होम बनाए थे, लेकिन हाल ही में आए सरकारी आदेश में उन्हें भी खाली करने को कह दिया गया, जिसके बाद जन-आक्रोश फूट पड़ा।

पठाओ (Pathao) ड्राइवर का आत्मदाह

जनता के उबलने का दूसरा और सबसे संवेदनशील कारण 25 वर्षीय गणेश नेपाली की मौत है। गणेश ‘पठाओ’ ऐप (एक लोकप्रिय राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म) के लिए बाइक चलाता था। पासपोर्ट विभाग के बाहर नो-पार्किंग विवाद में नगर पुलिस ने उस पर ₹1,000 का जुर्माना लगाया और उसकी बाइक को लॉक कर दिया। पुलिस के कथित दुर्व्यवहार और आर्थिक तंगी से तंग आकर गणेश नेपाली ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह कर लिया, जिससे बीर अस्पताल में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने पूरे नेपाल के युवाओं और गिग वर्करों को हिलाकर रख दिया।

सामाजिक कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया दमन

कीर्तिपुर स्थित एक अस्थायी शेल्टर होम में बाढ़ का पानी घुसने के बाद बेघर लोगों की मदद करने पहुंचे Gen-Z कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने बेरहमी से लाठीचार्ज किया, जिसमें कई युवा गंभीर रूप से घायल हो गए। सरकार ने कई प्रमुख छात्र नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा अब “गरीबों पर अत्याचार बंद करो”, “अवैध गिरफ्तारियां रोकें” और बालेन शाह के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

कैसे अर्श से फर्श पर आई बालेन शाह की किस्मत?

बालेन शाह का इतिहास किसी फिल्मी कहानी जैसा रहा है। एक रैपर से देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने तक उनकी किस्मत ने कई बार करवट बदली है। 27 अप्रैल 1990 को जन्मे बालेन शाह पेशे से एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर हैं, जिन्होंने भारत के कर्नाटक से मास्टर्स की डिग्री ली है। हालांकि, नेपाल के युवा उन्हें उनके ‘रॉ बर्श’ रैप बैटल प्लेटफॉर्म के जरिए एक मशहूर विद्रोही रैपर के रूप में जानते थे। अपने गानों में वह देश के भ्रष्ट नेताओं और लचर सरकारी व्यवस्था पर तीखे प्रहार करते थे, जिससे वह रातों-रात Gen Z के पोस्टर बॉय बन गए। 2015 के विनाशकारी भूकंप के दौरान उनके द्वारा किए गए जमीनी राहत कार्यों ने उनकी छवि को एक सच्चे सोशल वर्कर के रूप में स्थापित किया।

‘बालेन इफेक्ट’ और मेयर चुनाव में ऐतिहासिक जीत

साल 2022 में बालेन शाह ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ा। उन्होंने नेपाल के बड़े-बड़े स्थापित राजनीतिक दलों (नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल) के दिग्गजों को करारी शिकस्त दी। मेयर रहते हुए उन्होंने शहर का सौंदर्यीकरण किया और प्रशासनिक व्यवस्था सुधारी, जिससे उनकी लोकप्रियता सातवें आसमान पर पहुंच गई।

2025 का ऐतिहासिक Gen-Z आंदोलन

नेपाल की किस्मत में सबसे बड़ा बदलाव सितंबर 2025 में आया, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने टिकटॉक और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके विरोध में और देश में बढ़ती बेरोजगारी व भ्रष्टाचार के खिलाफ नेपाल के इतिहास का सबसे बड़ा Gen-Z आंदोलन भड़क उठा। इस उग्र आंदोलन के आगे झुकते हुए ओली को इस्तीफा देना पड़ा।

प्रचंड बहुमत से बने देश के प्रधानमंत्री

इस राजनीतिक शून्य और युवा क्रांति का पूरा फायदा बालेन शाह और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को मिला। मार्च 2026 के संसदीय आम चुनावों में देश के 60% से अधिक युवाओं ने बदलाव के लिए वोट किया। बालेन शाह ने पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को उन्हीं के गढ़ झापा में रिकॉर्ड 49,614 वोटों से हराया। दो-तिहाई के प्रचंड बहुमत के साथ, 27 मार्च 2026 को बालेन शाह ने नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

क्या कुर्सी बचा पाएंगे बालेन शाह?

नेपाल की राजनीति का यह दस्तूर रहा है कि जो युवा किसी को सत्ता के शीर्ष पर बैठा सकते हैं, वही उसे नीचे भी खींच सकते हैं।  बालेन शाह को प्रधानमंत्री बने अभी कुछ ही महीने हुए हैं। उनकी सरकार ने अपने पहले 100 दिनों में 87.2% सुधार एजेंडा लागू करने का दावा किया था, लेकिन जमीन पर गिग वर्करों की मौत, गरीबों के घर उजाड़ना और युवाओं की आवाज को दबाना उनके लिए घातक साबित हो रहा है। यदि बालेन शाह ने तुरंत इन प्रदर्शनकारी युवाओं से सीधा संवाद स्थापित नहीं किया और भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास के लिए कोई मानवीय कदम नहीं उठाया, तो काठमांडू की सड़कों पर सुलग रही यह ‘जेन-जी क्रांति’ उनकी सरकार के अस्तित्व को संकट में डाल सकती है।

बालेन की राजनीति पर सवाल

बालेन शाह की राजनीति पर अब काफी सवाल उठने लगे हैं। युवा उनसे यह जानना चाह रहे हैं कि क्या वास्तव में वह बदलते नेपाल के प्रतीक हैं या सिर्फ एक चेहरा? उन्होंने जो सपना दिखाया था, वह अब सही तरीके से पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है। उनके द्वारा किए गए वादे और अब की वास्तविकता में काफी फर्क है।

युवाओं का भविष्य क्या होगा?

इस स्थिति से यह सवाल उठता है कि क्या बालेन शाह खुद को जनसमर्थन में वापस ला पाएंगे? या फिर नेपाल का युवा वर्ग एक नए नेता की तलाश में निकल पड़ेगा? बालेन शाह के लिए यह समय अपने किए गए वादों को पूरा करने का है। अगर उन्होंने जल्दी कुछ नहीं किया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।

समर्थन या विरोध?

युवाओं का यह विरोध बालेन शाह को उनके राजनीतिक करियर का एक बड़ा मोड़ दे सकता है। क्या वह युवा वर्ग को फिर से अपने पक्ष में ला पाएंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। सभी की नजरें अब इस बात पर हैं कि बालेन कैसे अपनी नई रणनीति के साथ सामने आते हैं।

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