ग्लोबल इन्वेस्टमेंट गाइड: अमेरिकी और एशियाई बाजारों से कमाई पर टैक्स के नियम

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विदेशी शेयरों पर टैक्स: अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के ट्रेडिंग का जानें सही तरीका

विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अमेरिकी टेक कंपनियों, दक्षिण कोरियाई इलेक्ट्रॉनिक दिग्गजों और ताइवान के सेमीकंडक्टर दिग्गजों में पैसे लगाने का क्रेज जोरों पर है। लेकिन विदेशी शेयरों (Foreign Stocks) से कमाई जितनी आकर्षक है, उस पर टैक्स की गणना और उसकी घोषणा (Reporting) उतनी ही जटिल है। यदि आप भी अमेरिका, दक्षिण कोरिया या ताइवान के शेयर बाजारों में निवेश करते हैं या करने की सोच रहे हैं, तो टैक्स के इन कड़े नियमों को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। भारत में विदेशी शेयरों पर टैक्स लगाने के नियम घरेलू शेयरों (भारतीय शेयर बाजार) से काफी अलग हैं।

विदेशी शेयरों से कमाई के दो माध्यम और उन पर टैक्स

विदेशी शेयरों से निवेशकों को दो तरह से आमदनी होती है- कैपिटल गेन्स (पूंजीगत लाभ) और डिविडेंड (लाभांश)। दोनों पर टैक्स के नियम पूरी तरह अलग हैं।

कैपिटल गेन्स पर टैक्स (Tax on Capital Gains)

जब आप किसी विदेशी शेयर को उसके खरीद मूल्य से अधिक दाम पर बेचते हैं, तो उसे कैपिटल गेन्स कहा जाता है। होल्डिंग अवधि के आधार पर इसे दो भागों में बांटा जाता है-
शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG): यदि आप विदेशी शेयर को खरीदने के 24 महीने (2 साल) के भीतर बेच देते हैं, तो इससे होने वाले मुनाफे को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स माना जाता है। यह मुनाफा आपकी कुल सालाना आय में जोड़ दिया जाता है और आपके टैक्स स्लैब (जैसे- 5%, 20% या 30%) के अनुसार इस पर टैक्स लगता है।
लॉन्ग-टर्म CAPITAL GAINS (LTCG): यदि आप विदेशी शेयर को 24 महीने से अधिक समय तक अपने पास रखने के बाद बेचते हैं, तो यह लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स के दायरे में आता है। इस मुनाफे पर इंडेक्सेशन (Indexation) के लाभ के साथ 20% की दर से टैक्स लगता है।
(नोट: भारतीय शेयरों के विपरीत, विदेशी शेयरों पर बिना इंडेक्सेशन के 10% या 12.5% टैक्स का विकल्प नहीं मिलता है, बल्कि इंडेक्सेशन के साथ सीधा 20% टैक्स देय होता है)।

डिविडेंड पर टैक्स (Tax on Dividend Income)

विदेशी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड भारत में आपकी ‘अन्य स्रोतों से आय’ (Income from Other Sources) माना जाता है। यह कमाई आपकी कुल आय में जुड़ती है। इस पर आपके लागू टैक्स स्लैब रेट के अनुसार टैक्स वसूला जाता है। इसके अतिरिक्त, जिस देश की कंपनी है, वह देश भी डिविडेंड भुगतान पर सोर्स पर टैक्स (Withholding Tax) काटता है।

अमेरिका (USA)-ट्रेडिंग का तरीका

भारतीय निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार (जैसे Apple, Microsoft, Tesla) सबसे लोकप्रिय है। भारतीय निवेशक घरेलू ब्रोकर (जैसे Groww, Indmoney, Vested) के अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म या इंटरनेशनल ब्रोकर्स (Interactive Brokers) के जरिए सीधे अमेरिकी डॉलर में निवेश करते हैं। इसके लिए RBI की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत सालाना 2,500,000 डॉलर तक विदेश भेजे जा सकते हैं।

विद्होल्डिंग टैक्स

अमेरिका विदेशी निवेशकों के डिविडेंड पर 30% विद्होल्डिंग टैक्स काटता है। हालांकि, भारत और अमेरिका के बीच दोहरे कराधान से बचने का समझौता (DTAA) है। यदि आप फॉर्म W-8BEN जमा करते हैं, तो यह टैक्स घटकर 25% हो जाता है।

दक्षिण कोरिया (South Korea)

दक्षिण कोरियाई बाजार (जैसे Samsung, Hyundai) में निवेश की मांग भी बढ़ी है। दक्षिण कोरिया में सीधे रिटेल निवेश भारत से थोड़ा मुश्किल है क्योंकि वहां गैर-निवासियों के लिए कड़े नियम हैं। अधिकांश भारतीय निवेशक ग्लोबल म्यूचुअल फंड्स या ETFs (जैसे iShares MSCI South Korea ETF) के जरिए यहां निवेश करते हैं।

टैक्स नियम

यदि आप किसी भारतीय म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर रहे हैं जो दक्षिण कोरियाई शेयरों में पैसा लगाता है, तो टैक्स के नियम भारतीय ‘डेट ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड’ या विदेशी फंड वाले नियमों के तहत तय होते हैं।

ताइवान (Taiwan)

ताइवान का शेयर बाजार मुख्य रूप से सेमीकंडक्टर (जैसे TSMC) के लिए जाना जाता है। दक्षिण कोरिया की तरह ताइवान में भी सीधा निवेश करने के बजाय भारतीय निवेशक अमेरिकी एक्सचेंजों पर लिस्टेड ताइवान की कंपनियों के ADR (American Depositary Receipt) या ग्लोबल ईटीएफ का सहारा लेते हैं।

टैक्स नियम

यदि आप अमेरिका में लिस्टेड ताइवान के ADR (जैसे TSMC – TSM) में ट्रेड कर रहे हैं, तो टैक्स के नियम पूरी तरह से अमेरिकी शेयरों वाले ही लागू होंगे।

विद्होल्डिंग टैक्स और DTAA का गणित (दोहरे टैक्स से बचाव)

जब आप विदेशी शेयरों से डिविडेंड कमाते हैं, तो विदेशी सरकार उस पर विद्होल्डिंग टैक्स काट लेती है। इसके बाद जब वह पैसा भारत आता है, तो भारत सरकार भी उस पर टैक्स मांगती है। इस दोहरे टैक्स से बचाने के लिए भारत का कई देशों के साथ Double Taxation Avoidance Agreement (DTAA) है।

फॉरेन टैक्स क्रेडिट (FTC)

भारत सरकार आपको विदेशों में चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट (छूट) देती है। इसे फॉरेन टैक्स क्रेडिट कहा जाता है। इसका लाभ उठाने के लिए आपको भारत में इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय फॉर्म 67 (Form 67) भरना अनिवार्य होता है। इसमें आपको विदेशी टैक्स डिडक्शन का प्रमाण पत्र (जैसे अमेरिकी ब्रोकर्स से मिलने वाली 1042-S शीट) संलग्न करना पड़ता है।

TCS (Tax Collected at Source) का नया नियम

जब आप भारत से विदेशी शेयरों में निवेश करने के लिए पैसा (रुपया) बाहर भेजते हैं (Remit करते हैं), तो भारत सरकार उस पर सोर्स पर टैक्स (TCS) वसूलती है:एक वित्तीय वर्ष में 7 लाख रुपये तक के रेमिटेंस पर 0% TCS लगता है। यदि आप एक वित्तीय वर्ष में 7 लाख रुपये से अधिक की राशि निवेश के लिए विदेश भेजते हैं, तो 7 लाख से ऊपर की राशि पर 20% की दर से TCS कटता है।
ध्यान दें: यह TCS कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है। जब आप अपना सालाना ITR फाइल करेंगे, तो इस TCS राशि को अपने कुल टैक्स पेएबल के साथ एडजस्ट कर सकते हैं या रिफंड ले सकते हैं।

ITR में विदेशी संपत्तियों की घोषणा (Schedule FA) सबसे महत्वपूर्ण

विदेशी शेयरों में ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर हिस्सा ITR में घोषणा करना है। यदि आपके पास किसी विदेशी कंपनी का एक भी शेयर है (भले ही उसकी कीमत 100 रुपये हो), तो आपको साधारण ITR-1 फॉर्म के बजाय ITR-2 या ITR-3 फॉर्म भरना होगा।आपको ITR के Schedule FA (Foreign Assets) में अपनी सभी विदेशी संपत्तियों, ब्रोकरेज अकाउंट्स, बैंक खातों और वहां से हुई कमाई का पूरा ब्योरा देना अनिवार्य है।

कैलेंडर वर्ष का नियम

शेड्यूल FA में जानकारी भारत के वित्तीय वर्ष (अप्रैल से मार्च) के अनुसार नहीं, बल्कि कैलेंडर वर्ष (1 जनवरी से 31 दिसंबर) के अनुसार भरी जाती है।

जानकारी न देने पर भारी जुर्माना (Black Money Act)

यदि कोई निवेशक जानबूझकर या गलती से भी Schedule FA में अपने विदेशी शेयरों की जानकारी छुपाता है, तो उस पर ब्लैक मनी एक्ट (Black Money Act, 2015) के तहत सख्त कार्रवाई हो सकती है। जानकारी छुपाने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रावधान है। इसलिए टैक्स की देनदारी बने या न बने, विदेशी पोर्टफोलियो का खुलासा करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

एक्सपर्ट सलाह

विदेशी बाजारों में विविधीकरण (Diversification) के लिहाज से निवेश करना एक बेहतरीन कदम है, लेकिन टैक्स कम्प्लायंस को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यदि आप अमेरिका, दक्षिण कोरिया या ताइवान के बाजारों में सक्रिय रूप से ट्रेडिंग या निवेश कर रहे हैं, तो इन बातों को हमेशा याद रखें। विदेशी शेयरों को कम से कम 24 महीने तक होल्ड करने की कोशिश करें ताकि आपको 20% का लॉन्ग-टर्म टैक्स और इंडेक्सेशन का फायदा मिल सके।

योग्य CA से लें सलाह

विदेश पैसा भेजते समय 7 लाख रुपये की सीमा का ध्यान रखें ताकि 20% TCS ब्लॉक होने से बच सके। सालाना रिटर्न भरते समय Form 67 और Schedule FA को बेहद सावधानी से भरें। विदेशी टैक्स कानून और मुद्रा विनिमय दरों (Currency Conversion Rates) के कारण यह प्रक्रिया पेचीदा हो जाती है, इसलिए किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की देखरेख में ही अपना टैक्स असेसमेंट और रिटर्न फाइल करना समझदारी का सौदा है।

बाजार पर रखें नजर

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने विदेशी निवेश की जानकारी नियमित रखे। इसके साथ ही, टैक्स नियमों और बदलावों पर भी नजर रखना आवश्यक है। यह न केवल आपके निवेश को सुरक्षित बनाएगा, बल्कि आपके टैक्स भरने की प्रक्रिया को भी आसान करेगा। सही जानकारी और योजना के साथ आप अपने विदेशी शेयरों से होने वाली कमाई को अच्छी तरह प्रबंधित कर सकते हैं।

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