लड़कों से ज्यादा लड़कियों को क्यों लगती है रात में भूख? जानिए असली वजह

The CSR Journal Magazine

लड़कों से ज्यादा लड़कियों को लगती है आधी रात को भूख… यह नॉर्मल है या कोई बीमारी?

अगर आपकी भी रात के 2 या 3 बजे अचानक नींद खुल जाती है और कुछ खाए बिना फिर से सो नहीं पाते, तो इसे हल्के में न लें। यह सिर्फ मिडनाइट क्रेविंग नहीं, बल्कि Night Eating Syndrome (NES) जैसी समस्या का संकेत हो सकता है। बहुत से लोग इसे सामान्य समझते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि यह हमेशा सही नहीं होता। यदि आप अक्सर आधी रात में भूख महसूस करते हैं, बिना कुछ खाए आगे की नींद नहीं आती, या रात में जरूरत से ज्यादा खाते हैं, तो यह आपके शरीर की चेतावनी हो सकती है।

हार्मोनल और जैविक बदलाव

आधी रात को भूख लगना (Midnight Hunger) कभी-कभार होना पूरी तरह नॉर्मल है, लेकिन अगर यह समस्या अक्सर या रोजाना होने लगे, तो यह किसी शारीरिक असंतुलन या लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी का संकेत हो सकती है। लड़कों की तुलना में लड़कियों या महिलाओं में यह समस्या अधिक दिखने के पीछे मुख्य रूप से उनके शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और जैविक (biological) कारण जिम्मेदार होते हैं।

रात के खाने की आदतों का असर

यह केवल खराब खानपान की आदत नहीं, बल्कि नाइट ईटिंग सिंड्रोम (Night Eating Syndrome – NES) का संकेत हो सकता है।  यह एक ऐसा ईटिंग डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति अपनी दैनिक कैलोरी का बड़ा हिस्सा शाम या रात में खाता है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो इसका असर नींद, मानसिक स्वास्थ्य, वजन और मेटाबॉलिज्म पर पड़ सकता है. समय पर समस्या पहचानना जरूरी है।

भूख और तनाव का रिश्ता

हाल ही में कई वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं, जो इस मुद्दे पर प्रकाश डालते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि रात में भूख लगना केवल पेट से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह शरीर की सर्कैडियन रिदम, हार्मोन, तनाव और मानसिक स्वास्थ्य से भी जुड़ा होता है। शोध में पाया गया है कि रात में खाने की आदत और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि जब भूख सामान्य से अधिक हो जाए, तो क्या करना चाहिए।

आधी रात को भूख लगने के मुख्य कारण- हार्मोनल उतार-चढ़ाव

महिलाओं के शरीर में पीरियड्स (Menstruation), प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के दौरान हार्मोन तेजी से बदलते हैं। इसके अलावा भूख को नियंत्रित करने वाले दो मुख्य हार्मोन होते हैं।
घ्रेलिन (Ghrelin): इसे ‘हंगर हार्मोन’ भी कहते हैं, जो भूख बढ़ाता है।
लेप्टिन (Leptin): यह मस्तिष्क को पेट भरने का संकेत देता है।
नींद पूरी न होने या तनाव के कारण महिलाओं में इन हार्मोन्स का संतुलन आसानी से बिगड़ जाता है, जिससे रात में तेज भूख लगती है।

नाइट ईटिंग सिंड्रोम (Night Eating Syndrome – NES)

यदि कोई व्यक्ति दिन में बहुत कम खाता है और अपनी कुल कैलोरी का 25% से अधिक हिस्सा रात के खाने के बाद या आधी रात को उठकर खाता है, तो इसे नाइट ईटिंग सिंड्रोम कहा जाता है। यह एक प्रकार का ईटिंग डिसऑर्डर है, जो पुरुषों की तुलना में महिलाओं में तनाव और एंग्जायटी के कारण अधिक देखा जाता है।

दिन में पर्याप्त डाइट न लेना

अक्सर लड़कियां वजन नियंत्रित करने या डाइटिंग के चक्कर में दिनभर में बेहद कम कैलोरी या कम प्रोटीन वाला भोजन लेती हैं। दिनभर की इस कमी को पूरा करने के लिए शरीर आधी रात को ऊर्जा (energy) की मांग करता है, जिससे तेज भूख महसूस होती है।

तनाव और कोर्टिसोल हार्मोन

अत्यधिक मानसिक तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रैस हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है। यह हार्मोन मीठा, कार्बोहाइड्रेट और फैट से भरपूर चीजें खाने की इच्छा (cravings) को बढ़ाता है, जो अक्सर रात के सन्नाटे में ज्यादा ट्रिगर होती है।

ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव या थायराइड

रात में अचानक शुगर लेवल गिरने (Hypoglycemia) के कारण भी शरीर जाग जाता है और मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है। महिलाओं में थायराइड की समस्या आम है। हाइपरथायरायडिज्म में मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है, जिससे शरीर को बार-बार भोजन की जरूरत पड़ती है।इस समस्या से कैसे निपटें?

वैज्ञानिक अध्ययन क्या कहते हैं?

एक अध्ययन के अनुसार, देर रात खाने की आदत और मानसिक स्वास्थ्य के बीच एक संबंध देखा गया है। अनियमित समय पर खाना खाने से शरीर की जैविक घड़ी प्रभावित होती है, जिससे नींद और मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ सकता है। लेकिन यह जरूरी नहीं कि हर किसी के लिए इसका कारण समान हो।

इस समस्या से कैसे निपटें?

बैलेंस डाइट: अपने रात के खाने में प्रोटीन (पनीर, दालें) और फाइबर (सलाद, ओट्स) शामिल करें ताकि पेट लंबे समय तक भरा रहे।
हाइड्रेशन: दिनभर में पर्याप्त पानी पीएं। कई बार शरीर प्यास के संकेतों को भूख समझ लेता है।
स्लीप रूटीन: देर रात तक जागने से बचें। समय पर सोने से घ्रेलिन हार्मोन नियंत्रित रहता है।
सलाह: यदि यह समस्या हफ्ते में 3-4 बार से ज्यादा हो रही है और इसकी वजह से आपकी नींद और वजन प्रभावित हो रहा है, तो डॉक्टर या डायटीशियन से मिलकर अपने हार्मोन और ब्लड शुगर की जांच जरूर करवाएं।

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