आत्मनिर्भर भारत: इथेनॉल मिश्रण ने बदली गन्ना किसानों की किस्मत, बचाए 1.4 लाख करोड़

The CSR Journal Magazine

गन्ना किसान मालामाल !  इथेनॉल ब्लेंडिंग का असर- E20 से E30 का पूरा गणित!

भारत सरकार के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार को ऐतिहासिक लाभ पहुँचाया है। कच्चे तेल के आयात में कटौती करके भारत ने 1.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा (Forex) बचाई है। इसके साथ ही, गन्ने और अन्य अनाजों से इथेनॉल की खरीद के जरिए किसानों को 1.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सीधा भुगतान किया जा चुका है, जिससे उनकी आय में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।

इथेनॉल का बढ़ता इस्तेमाल

भारत ने E20 के लक्ष्य को सही समय से पूरा कर लिया है, और अब E30 पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। इस योजना के तहत गन्ने की मांग में वृद्धि हुई है। लेकिन क्या इसने किसानों को भी लाभ पहुंचाया है? आइए जानें। सरकार का कहना है कि इस नीति से अब तक 1.4 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इस साल 1500 करोड़ लीटर इथेनॉल का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होनी की उम्मीद है। इस नए आर्थिक मॉडल का गन्ना उत्पादकता और किसानों की आय पर प्रभाव पड़ रहा है। लेकिन क्या इससे किसानों की कमाई बढ़ी है?

गन्ना किसानों की आय में सुधार के मुख्य कारण

चीनी मिलों को इथेनॉल की बिक्री से तेल विपणन कंपनियों (OMCs) से तुरंत पैसा मिलता है, जिससे वे किसानों का गन्ना मूल्य तेजी से चुका पा रही हैं। चीनी की अतिरिक्त पैदावार को इथेनॉल उत्पादन की तरफ मोड़ने से बाजार में चीनी के दाम स्थिर रहते हैं और किसानों को नुकसान नहीं होता। प्रधानमंत्री मोदी के विजन के अनुसार, पारंपरिक खेती के अलावा अब किसान देश की ईंधन जरूरतों को पूरा करने के बड़े माध्यम बन गए हैं। गन्ने के अलावा टूटे चावल और मक्के का इस्तेमाल बढ़ने से अन्य फसल उत्पादकों को भी सुनिश्चित खरीदार मिल रहे हैं।

गन्ने से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया

गन्ने से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया में पहले गन्ना खेतों से काटकर चीनी मिलों में लाया जाता है। वहां उसे क्रश करके रस निकाला जाता है। फिर इसमें यीस्ट मिलाकर किण्वन प्रक्रिया शुरू होती है, जिससे शुगर अल्कोहल में बदल जाती है। इसके बाद इस मिश्रण को गर्म करके शुद्ध इथेनॉल निकाला जाता है। इस प्रक्रिया से तैयार इथेनॉल, पेट्रोल में मिलाकर E20 और E30 जैसे फ्यूल बनते हैं।

भारत में इथेनॉल उत्पादन

अब करीब 500 से ज्यादा चीनी मिलें इथेनॉल उत्पादन में लगी हुई हैं। इनमें से लगभग 250 मिलें पहले से ही अपग्रेड की जा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में 53 से अधिक मिलें इथेनॉल उत्पादन कर रही हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में भी कई मिलें सक्रिय हैं। ये मिलें गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे का उपयोग करके इथेनॉल उत्पादन कर रही हैं।

किसानों को मिल रहा कितना भुगतान?

पिछले साल इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत किसानों को 1.25 लाख से 1.58 लाख करोड़ रुपये तक का भुगतान किया गया। E20 लक्ष्य हासिल होने के बाद, तेल विपणन कंपनियों के जरिए हर साल करीब 35,000 करोड़ रुपये की मदद मिल रही है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है, और चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति भी बेहतर हुई है। अब किसानों को पहले की तुलना में तेजी से कैश फ्लो मिल रहा है।

गन्ने की कीमतें और इथेनॉल के रेट

सरकार ने 2025-26 गन्ना सीजन के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) 355 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। इससे 5 करोड़ गन्ना किसानों को फायदा हो रहा है। इथेनॉल की खरीद दरें भी सरकार ने तय की हैं, जिसमें गन्ने के रस से इथेनॉल पर 65.61 रुपये प्रति लीटर मिलते हैं। सी-हैवी मोलासेस से 57.97 रुपये और बी-हैवी मोलासेस से 60.73 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया जाता है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों की मांग बढ़ी

इथेनॉल ब्लेंडिंग ने गन्ना किसानों की स्थिति में व्यापक सुधार किया है। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसानों को इसका सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। उत्तर प्रदेश में किसानों को 21 दिनों के भीतर भुगतान मिल रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक स्थिरता मिली है। वहीं, महाराष्ट्र में सहकारी और निजी चीनी मिलों ने इथेनॉल डायवर्जन किया है।

भविष्य की दिशा (E100 और फ्लेक्स फ्यूल)

सरकार अब देश को शत-प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन यानी E100 (100% इथेनॉल) की तरफ ले जाने के लिए नियमों को मंजूरी दे चुकी है। ऑटोमोबाइल कंपनियां तेजी से फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (Flex-Fuel Engines) और नए कंपोनेंट्स वाली गाड़ियां विकसित कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में विदेशी मुद्रा की यह बचत बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये सालाना तक पहुँच सकती है।

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