पटियाला में इंटरनेशनल साइबर ठगी रैकेट का भंडाफोड़; ED ने रंगे हाथों पकड़े 220 कर्मचारी

The CSR Journal Magazine

अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले फर्जी कॉल सेंटर का ED ने किया भंडाफोड़, पटियाला में चल रहे दो कॉल सेंटर का खुलासा

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। ED की हैदराबाद जोनल टीम ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत पंजाब के पटियाला, महाराष्ट्र के पुणे और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में एक साथ 4 परिसरों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने 3 लाइव फर्जी कॉल सेंटरों का पता लगाया, जहां करीब 220 कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों को चूना लगाने के काम में रंगे हाथों लगे हुए पाए गए।

चंडीगढ़ से चल रहा था पटियाला के सेंटरों का रिमोट कंट्रोल

जांच एजेंसी के अनुसार, छापेमारी में पटियाला के भीतर दो सक्रिय कॉल सेंटरों का खुलासा हुआ। ये सेंटर ‘DW वेब सॉल्यूशंस’ और ‘फ्लाइंग फेदर्स’ नाम की कंपनियों के जरिए संचालित किए जा रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दोनों अवैध सेंटरों का मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) चंडीगढ़ के एक रिहायशी इलाके में बैठकर पूरे नेटवर्क को नियंत्रित और कोऑर्डिनेट कर रहा था। चंडीगढ़ स्थित ठिकाने से ED को बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा और तकनीकी उपकरण मिले हैं।

स्क्रिप्ट और फर्जी तकनीकी खराबी के जाल में फंसते थे अमेरिकी

ED के अनुसार, इस सिंडिकेट का काम करने का तरीका (मोडस ऑपेरंडी) बेहद शातिर था। ये जालसाज अमेरिकी नागरिकों के कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर में तकनीकी खराबी का झांसा देते थे या विभिन्न फर्जी बहानों से कॉल करते थे। इसके लिए कर्मचारियों को बाकायदा एक खास स्क्रिप्ट दी जाती थी। डरे हुए अमेरिकी नागरिकों को झांसे में लेकर उनसे मोटी रकम वसूल की जाती थी। जांच में पाया गया कि हूबहू इसी तर्ज पर पुणे का कॉल सेंटर भी अमेरिकी नागरिकों से जबरन वसूली कर रहा था।

डॉलर को रुपये में बदलने वाला नेटवर्क भी आया राडार पर

सर्च ऑपरेशन के दौरान ED ने 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, कई हार्ड डिस्क, आधुनिक नेटवर्किंग और कम्युनिकेशन डिवाइस सहित भारी मात्रा में डिजिटल सबूत और नकदी जब्त की है। जब्त किए गए उपकरणों की शुरुआती जांच में अवैध कमाई के बंटवारे और ठगी के पूरे सिंडिकेट का ब्योरा मिला है। इसके अलावा, ED ने एक ऐसे संदिग्ध व्यक्ति की भी पहचान की है जो पीड़ितों से अमेरिकी डॉलर (USD) में वसूली गई रकम को भारतीय रुपये (INR) में बदलने और ठिकाने लगाने (मनी लॉन्ड्रिंग) का काम देख रहा था। फिलहाल, ED सभी कर्मचारियों के बयानों और भूमिका की जांच कर रही है। इसके साथ ही VoIP आधारित कॉलिंग सिस्टम, पेमेंट गेटवे और हवाला के जरिए विदेशों से आए फंड फ्लो के पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है, जिससे इस रैकेट में शामिल कुछ बड़े चेहरों की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।

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