क्या लौटेगा 2000 के दशक का लोकप्रिय ऑरकुट? लाखों लोगों ने जताया समर्थन

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फेसबुक-इंस्टाग्राम के दौर में ऑरकुट की वापसी की उम्मीद, जानिए क्या है नया अभियान, ऑरकुट के संस्थापक की नई पहल

करीब 12 साल पहले बंद हो चुका लोकप्रिय सामाजिक माध्यम ऑरकुट एक बार फिर चर्चा में है। वर्ष 2000 के दशक में भारत सहित दुनिया के कई देशों में युवाओं के बीच लोकप्रिय रहे ऑरकुट के संस्थापक ऑरकुट बुयुक्कोक्टेन ने अब एक ऐसे नए सामाजिक मंच की दिशा में वैश्विक अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य लोगों को वास्तविक मित्रता, सार्थक बातचीत और मजबूत समुदायों से जोड़ना है। इस अभियान के तहत आधिकारिक वेबसाइट पर लोगों से समर्थन जुटाया जा रहा है। हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस पहल के समर्थन में 2.70 लाख से अधिक लोग हस्ताक्षर कर चुके थे और 115 देशों के लोगों ने इसमें भाग लिया था। संस्थापक लोगों की रुचि और समर्थन जुटा रहे हैं, ताकि वास्तविक मानवीय संबंधों पर आधारित एक नए सामाजिक मंच की संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सके।

ऑरकुट के संस्थापक ने क्यों शुरू किया नया अभियान?

ऑरकुट के संस्थापक ऑरकुट बुयुक्कोक्टेन ने अपनी खुली चिट्ठी में आधुनिक सामाजिक माध्यमों के बदलते स्वरूप पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इंटरनेट का मूल उद्देश्य लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना, नई मित्रता विकसित करना और समान रुचियों वाले लोगों को एक समुदाय में लाना था। लेकिन समय के साथ सामाजिक माध्यमों का ध्यान वास्तविक संबंधों से हटकर लोगों का अधिक से अधिक समय अपने मंच पर बनाए रखने पर केंद्रित होता गया है। बुयुक्कोक्टेन के अनुसार, आज कई मंच ऐसी सामग्री दिखाते हैं, जो उपयोगकर्ताओं की रुचि और उनकी पिछली गतिविधियों के आधार पर तैयार की जाती है। इससे लोगों को लगातार नई सामग्री देखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। लेकिन अधिक समय तक मंच पर बने रहने का अर्थ यह नहीं है कि उपयोगकर्ता के वास्तविक सामाजिक संबंध भी मजबूत हो रहे हैं। उनका मानना है कि इंटरनेट ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां लोग केवल सामग्री देखने वाले दर्शक न बनें, बल्कि किसी समुदाय के सक्रिय सदस्य बन सकें। दोस्ती, भरोसा, जिज्ञासा, दयालुता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान को सामाजिक संवाद का आधार बनाया जाना चाहिए। उनकी नई पहल इसी विचार को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नकली खाते और डीपफेक से बढ़ती चिंता

इस अभियान के पीछे एक बड़ी वजह इंटरनेट पर वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करना कठिन होना भी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास के साथ अब ऐसी तस्वीरें, आवाजें, वीडियो और संदेश तैयार किए जा सकते हैं, जो देखने या सुनने में वास्तविक लगते हैं, जबकि उनका संबंध किसी वास्तविक घटना या व्यक्ति से नहीं होता। बुयुक्कोक्टेन ने अपनी चिट्ठी में कृत्रिम खातों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री और डीपफेक जैसी तकनीकों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनके अनुसार, सामाजिक माध्यमों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह थी कि उपयोगकर्ता को विश्वास होता था कि वह दूसरी ओर मौजूद किसी वास्तविक व्यक्ति से बातचीत कर रहा है। जब यह भरोसा कमजोर पड़ता है, तो ऑनलाइन बातचीत की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है।

AI के दौर की मुश्किलें

उदाहरण के तौर पर, किसी उपयोगकर्ता को किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर और पहचान वाले खाते से संदेश मिल सकता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं होता कि संदेश भेजने वाला वास्तव में वही व्यक्ति है या किसी तकनीक की मदद से बनाया गया नकली खाता। इसी तरह, कृत्रिम टिप्पणियों और स्वचालित खातों की मौजूदगी से लोकप्रियता, समर्थन और लोगों की वास्तविक प्रतिक्रियाओं का आकलन करना कठिन हो सकता है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता AI का उपयोग अपने आप में समस्या नहीं है। इसका इस्तेमाल उपयोगकर्ताओं को समान रुचियों वाले लोगों से मिलाने, भाषा संबंधी बाधाएं दूर करने और समुदायों को व्यवस्थित करने में भी किया जा सकता है। बुयुक्कोक्टेन की पहल का जोर इस बात पर है कि तकनीक इंसानों के बीच संबंधों को मजबूत करे, न कि उनकी जगह ले ले।

पुराने ऑरकुट की सबसे बड़ी ताकत थीं उसकी समुदाय आधारित सुविधाएं

ऑरकुट को अपने समय के दूसरे सामाजिक मंचों से अलग बनाने वाली सबसे बड़ी विशेषता उसके समुदाय थे। उपयोगकर्ता अपनी पसंद, शौक, पढ़ाई, काम और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर समूह बना सकते थे। इन समूहों में लोग सवाल पूछते, अपने अनुभव साझा करते और समान रुचियों वाले लोगों से बातचीत करते थे। उदाहरण के लिए, किसी कॉलेज के विद्यार्थियों का समूह, मोटरसाइकिलों में रुचि रखने वाले लोगों का समुदाय, किसी खास शहर के निवासियों का समूह या किसी विषय पर चर्चा करने वाले लोगों का मंच बनाया जा सकता था। कई लोगों के लिए ये समुदाय केवल ऑनलाइन बातचीत का माध्यम नहीं थे, बल्कि नए मित्र बनाने और पुराने परिचितों के संपर्क में बने रहने का जरिया भी थे। ऑरकुट में उपयोगकर्ताओं की व्यक्तिगत प्रोफाइल, मित्रों की सूची, संदेशों और टिप्पणियों के लिए स्क्रैपबुक तथा मित्रों के बारे में प्रशंसात्मक संदेश लिखने की सुविधा भी लोकप्रिय थी। इन सुविधाओं ने उस दौर में इंटरनेट पर व्यक्तिगत पहचान और मित्रता की एक अलग संस्कृति विकसित की थी।
आज के कई सामाजिक मंचों पर उपयोगकर्ताओं को उनकी गतिविधियों के आधार पर लगातार नई सामग्री दिखाई जाती है। इसके विपरीत, ऑरकुट के संस्थापक अब ऐसे अनुभव को दोबारा महत्व देना चाहते हैं, जिसमें उपयोगकर्ता अपनी पसंद के लोगों और समुदायों के साथ सीधे जुड़ सकें। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित नया मंच पुराने ऑरकुट की सभी सुविधाओं को वापस लाएगा या उनका कोई नया रूप तैयार किया जाएगा।

भारत में ऑरकुट की लोकप्रियता आज भी क्यों याद की जाती है?

भारत में इंटरनेट के शुरुआती विस्तार के दौर में ऑरकुट ने सामाजिक संपर्क का एक नया अनुभव दिया था। उस समय स्मार्टफोन और तेज इंटरनेट आज की तरह आम नहीं थे। बहुत से लोग इंटरनेट कैफे या घर के कंप्यूटर के माध्यम से ऑनलाइन आते थे और अपने मित्रों की प्रोफाइल देखते, संदेश भेजते तथा नए लोगों से परिचित होते थे। विशेष रूप से युवाओं और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के बीच यह मंच काफी लोकप्रिय हुआ। मित्रों के बारे में टिप्पणियां पढ़ना, प्रोफाइल को व्यक्तिगत बनाना और अलग-अलग समुदायों से जुड़ना उस समय ऑनलाइन जीवन का अहम हिस्सा था। भारत के अलावा ब्राजील में भी ऑरकुट का बड़ा उपयोगकर्ता वर्ग था।
उस दौर के अनेक उपयोगकर्ताओं के लिए ऑरकुट केवल एक वेबसाइट नहीं था। यह पुराने सहपाठियों से संपर्क बनाए रखने, नए मित्र बनाने और अपनी पसंद के लोगों के साथ बातचीत करने का माध्यम था। इसी वजह से इसके बंद होने के वर्षों बाद भी इसकी वापसी की चर्चा लोगों में उत्सुकता पैदा करती है। हालांकि, पुराने मंच की यादें और किसी नए मंच की वास्तविक सफलता दो अलग-अलग बातें हैं। आज इंटरनेट का उपयोग करने वाले लोगों की संख्या, उनकी आदतें, सुरक्षा संबंधी अपेक्षाएं और सामाजिक माध्यमों से जुड़ी जरूरतें काफी बदल चुकी हैं। ऐसे में किसी नए ऑरकुट को सफल बनाने के लिए केवल पुरानी यादों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा।

गूगल ने 2014 में ऑरकुट को क्यों बंद किया था?

ऑरकुट की शुरुआत जनवरी 2004 में हुई थी। इसे गूगल के इंजीनियर ऑरकुट बुयुक्कोक्टेन ने विकसित किया था और यह गूगल के स्वामित्व में संचालित होता था। शुरुआती वर्षों में इसने सामाजिक नेटवर्किंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन समय के साथ फेसबुक जैसे दूसरे मंच अधिक लोकप्रिय होने लगे। लोगों की ऑनलाइन गतिविधियों में बदलाव आया और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी। इन परिस्थितियों के बीच गूगल ने ऑरकुट को बंद करने का फैसला किया। गूगल ने सितंबर 2014 में ऑरकुट की सेवाएं समाप्त कर दीं। इसके बाद उपयोगकर्ता पुराने मंच पर अपने खाते के माध्यम से पहले की तरह बातचीत नहीं कर सकते थे। इस तरह लगभग एक दशक तक सक्रिय रहे इस सामाजिक नेटवर्क का सफर समाप्त हो गया। अब संस्थापक की नई पहल इस पुराने नाम और उसके मूल विचार को फिर चर्चा में ले आई है। लेकिन संभावित नया मंच गूगल के पुराने ऑरकुट की उसी सेवा की निरंतरता होगा या एक अलग व्यवस्था के रूप में विकसित होगा, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं है।

क्या पहले भी हो चुकी है ऑरकुट को दोबारा शुरू करने की कोशिश?

हां। ऑरकुट की वापसी से जुड़ी चर्चा पहली बार नहीं हो रही है। वर्ष 2022 में भी बुयुक्कोक्टेन ने orkut.com वेबसाइट को दोबारा सक्रिय किया था और एक संदेश के माध्यम से ऐसा सामाजिक मंच बनाने की इच्छा व्यक्त की थी, जो लोगों को जोड़ने और समुदायों को मजबूत करने पर केंद्रित हो। उस समय भी विचार यह था कि इंटरनेट पर नफरत और गलत सूचनाओं की समस्या को कम करते हुए लोगों के बीच सार्थक संवाद को प्रोत्साहित किया जाए। हालांकि, उस प्रयास के बाद पुराने ऑरकुट की व्यापक वापसी नहीं हुई। बुयुक्कोक्टेन का एक अन्य सामाजिक नेटवर्क, हेलो, भी इस दिशा में एक प्रयास था, लेकिन वह सेवा अप्रैल 2022 में बंद हो गई। इस पृष्ठभूमि में अक्टूबर 2026 का नया अभियान महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस बार संस्थापक लोगों से खुलकर समर्थन जुटा रहे हैं। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह अभियान निश्चित रूप से किसी नए सामाजिक नेटवर्क के निर्माण या उसकी शुरुआत तक पहुंचेगा।

वेबसाइट पर हस्ताक्षर करने का क्या मतलब है?

आधिकारिक वेबसाइट orkut.com पर चलाए जा रहे अभियान में लोगों से अपना नाम दर्ज करके इस विचार के प्रति समर्थन जताने को कहा गया है। वेबसाइट के अनुसार, इसका उद्देश्य यह जानना और दिखाना है कि कितने लोग वास्तविक लोगों, सार्थक संबंधों और मजबूत समुदायों पर आधारित नए सामाजिक मंच का समर्थन करते हैं। अभियान में भाग लेने वाले समर्थकों को एक डिजिटल समर्थक पहचान-पत्र भी दिया जा सकता है, जिसे वे अपने मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं। इससे इस विचार का प्रचार करने और अधिक लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए। हस्ताक्षर करना किसी नए खाते का पंजीकरण नहीं है। इससे किसी व्यक्ति का उपयोगकर्ता नाम सुरक्षित नहीं होता और न ही उसे भविष्य में मंच शुरू होने पर कोई निश्चित स्थान मिलने की गारंटी मिलती है। वेबसाइट स्पष्ट करती है कि यह किसी सरकार, सरकारी एजेंसी या कंपनी से मांग करने वाली पारंपरिक याचिका भी नहीं है; इसका उद्देश्य नए सामाजिक नेटवर्क के लिए समर्थन जुटाना है। इसलिए अभियान में भाग लेने वालों को इसे फिलहाल समर्थन दर्ज कराने की पहल के रूप में ही देखना चाहिए, न कि नए ऑरकुट में खाता खुलने की पुष्टि के रूप में।

क्या नया ऑरकुट इंस्टाग्राम और फेसबुक को चुनौती दे पाएगा?

यदि नया मंच वास्तव में शुरू होता है, तो उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती उपयोगकर्ताओं का भरोसा जीतना और उन्हें नियमित रूप से सक्रिय बनाए रखना होगी। आज सामाजिक माध्यम केवल मित्रों से बातचीत तक सीमित नहीं हैं। लोग इनका उपयोग समाचार पढ़ने, मनोरंजन, कारोबार, प्रचार, वीडियो देखने और अपने विचार साझा करने के लिए भी करते हैं। ऐसे में समुदायों को प्राथमिकता देने वाला मंच उन लोगों को आकर्षित कर सकता है, जो लगातार दिखाई जाने वाली सामग्री से थक चुके हैं और अपनी रुचियों से जुड़े लोगों के साथ अधिक सार्थक संवाद चाहते हैं। लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि मंच वास्तविक खातों की पहचान कैसे करेगा, नकली सामग्री और दुर्व्यवहार से कैसे निपटेगा तथा उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारी की सुरक्षा कैसे करेगा।
इसके अलावा, नए मंच को यह भी स्पष्ट करना होगा कि वह अपनी सेवाओं का संचालन किस तरह करेगा। क्या वह विज्ञापनों पर निर्भर होगा, क्या उपयोगकर्ताओं को सामग्री पर अधिक नियंत्रण मिलेगा, क्या समुदायों का संचालन स्वयं सदस्य कर सकेंगे और क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सुरक्षा तथा उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा? इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं। संस्थापक का घोषित दृष्टिकोण वास्तविक लोगों और संबंधों को केंद्र में रखने का है, लेकिन किसी मंच की वास्तविक सफलता उसके विचारों के साथ-साथ उसके तकनीकी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था और व्यावहारिक सुविधाओं पर भी निर्भर करती है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल ऑरकुट के संस्थापक का अभियान इंटरनेट पर अधिक मानवीय और भरोसेमंद संवाद की मांग को सामने ला रहा है। 2.70 लाख से अधिक हस्ताक्षरों और अनेक देशों के लोगों की भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि पुराने सामाजिक नेटवर्क की यादें अब भी मौजूद हैं और समुदाय आधारित इंटरनेट की अवधारणा में लोगों की रुचि है। हालांकि, हस्ताक्षरों की संख्या अपने आप में यह साबित नहीं करती कि सभी समर्थक भविष्य में नए मंच का सक्रिय उपयोग भी करेंगे। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या यह पहल किसी वास्तविक उत्पाद के निर्माण तक पहुंचेगी। इसके लिए मंच की सुविधाओं, सुरक्षा नीतियों, संचालन व्यवस्था और शुरुआत की समय-सीमा को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी होगा।
निष्कर्षतः, ऑरकुट की वापसी की चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन अभी इसे पुराने मंच की निश्चित वापसी नहीं कहा जा सकता। फिलहाल यह एक नए सामाजिक नेटवर्क के विचार के समर्थन में चल रहा वैश्विक अभियान है। यदि यह विचार वास्तविक रूप लेता है, तो यह इस बहस को आगे बढ़ा सकता है कि इंटरनेट पर लोगों को केवल अधिक समय तक सक्रिय रखने के बजाय उनके बीच भरोसेमंद और सार्थक संबंध कैसे बनाए जाएं।

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