देवशयनी एकादशी आते ही क्यों रुक जाते हैं सभी मांगलिक कार्य? जानें रहस्य और महत्व

The CSR Journal Magazine
हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष महत्व है। यह आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सभी मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसलिए, यह दिन भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कब से शुरू होगा व्रत?

देवशयनी एकादशी का व्रत 2026 में 18 जुलाई को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। भक्त लोग इस दिन उपवास रखने और विभिन्न धार्मिक कर्मों का पालन करने का संकल्प लेते हैं। इसके बाद मंदिरों में विशेष भजन-कीर्तन का आयोजन भी होता है।

मांगलिक कार्यों में बदलाव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन से एक खास अवधि शुरू होती है। इस दिन से चार महीने तक शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यों पर ब्रेक लग जाता है। इस समय के दौरान भक्त लोग भगवान विष्णु की आराधना और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए इस पर्व का पालन करते हैं।

धार्मिक आस्था और परंपरा

यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि परंपराओं को भी सहेजने का काम करता है। भारत में आषाढ़ माह का यह समय विशेष होता है। ऐसे में भक्तगण एकादशी के दिन अपने परिवार के साथ मिलकर इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।

व्रत के नियम और विधि

व्रत रखने वाले भक्तों के लिए कुछ विशेष नियम होते हैं। उपवास के दौरान रात्रि में भगवान का जागरण करना और प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करना अनिवार्य होता है। इस दिन खाने-पीने की विशेष सावधानी बरती जाती है। भक्तजन केवल फल-फूल और क्षीर का सेवन करते हैं।

आध्यात्मिक और मानसिक शांति

देवशयनी एकादशी का यह व्रत भक्तों को आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्रदान करता है। भगवान विष्णु की कृपा से लोग अपने सभी कष्टों से छुटकारा पाने की आशा करते हैं। इसलिए, यह व्रत केवल शारीरिक से अधिक, मानसिक स्वस्थता की ओर भी ध्यान केंद्रित करता है।

सामाजिक गतिविधियाँ

व्रत के दौरान कई सामाजिक गतिविधियाँ भी होती हैं। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं और मंदिरों में congregational prayers का आयोजन किया जाता है। यह समय समुदाय के लोगों को एकजुट करने का भी कार्य करता है।

पूजा का समय और महत्व

भक्तों के लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि पूजा का सही समय गणना करके किया जाए। इस दिन भगवान की विशेष पूजा करने से सभी इच्छाएँ पूरी होने का विश्वास होता है। इसलिए, भक्तजन तत्पर रहते हैं कि वे सही विधि से अपनी पूजा करें।

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