Delhi High Court सख्त, केजरीवाल की सुस्त सुनवाई पर 3 एमिकस क्यूरी की नियुक्ति

The CSR Journal Magazine
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी केस में CBI की डिस्चार्ज ऑर्डर को चुनौती देने वाली अपील पर तीन एमिकस क्यूरी नियुक्त किए हैं। यह फैसला उस समय लिया गया जब मुख्य आरोपी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने सुनवाई में भाग लेने से इनकार कर दिया। केजरीवाल ने न्याय की उम्मीद हिलने का हवाला देकर कहा कि वह अदालत में उपस्थित नहीं होंगे।

कोर्ट की अडिग स्थिति

इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने जस्टिस शर्मा को सुनवाई से अलग करने की केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने इसे बिना आधार की अटकलें बताया। अब यह मामला शुक्रवार को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। इससे पहले, केजरीवाल ने अपने बयान में न्याय की उम्मीद को खोने की बात कही।

केजरीवाल का सत्याग्रह का जिक्र

इस हफ्ते के प्रारंभ में, केजरीवाल ने एक पब्लिक बयान में कहा कि वह न तो खुद पेश होंगे और न ही वकील के जरिए केस में शामिल होंगे। उन्होंने अपने इस कदम को महात्मा गांधी के सिद्धांतों से जोड़ते हुए इसे सत्याग्रह वाले फैसले के रूप में बताया। यह स्थिति तब आई जब उच्चतम न्यायालय ने जस्टिस शर्मा को अलग करने की दरख्वास्त को खारिज कर दिया।

कोर्ट के कानूनी तर्क

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिर्फ आरोपों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। बिना ठोस सबूत के किसी न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता के खिलाफ उठाए गए सवालों पर अदालत ने सख्त चेतावनी दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल काश्तकारी विचारों के आधार पर सुनवाई से हटने का अनुरोध नहीं किया जा सकता।

केजरीवाल की चिंताएं और कोर्ट का रुख

केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को एक पत्र लिखकर कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में उनकी निष्पक्षता को लेकर preocupations अभी भी अनसुलझी हैं। कोर्ट ने सुनवाई से अलग होने की वादियों को खारिज करते हुए कहा कि आरोपों और मौजूदा मामले के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। यही नहीं, जजों के परिवार के सदस्यों के सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेने का होना भी भेदभाव का आधार नहीं बन सकता।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

हालांकि, केजरीवाल ने इशारा किया कि वह इस आदेश को भारत के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने माना कि उनकी इस रणनीति का असर उनकी कानूनी स्थिति पर पड़ सकता है। पूरा मामला दिल्ली एक्साइज पॉलिसी 2021-22 से संबंधित है, जिसमें CBI ने केजरीवाल और अन्य आरोपियों को बरी करने को चुनौती दी है।

न्यायिक स्वतंत्रता की सुरक्षा

दिल्ली हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि बिना सही ठोस सबूत के आरोपों पर ध्यान देने से न्यायिक स्वतंत्रता और संस्थागत विश्वसनीयता दोनों कमजोर हो सकती हैं। यही कारण है कि एमिकस क्यूरी की नियुक्ति का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।

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