रिकॉर्ड ऊंचाई छूकर लुढ़का तांबा; जानिए मिडिल ईस्ट संकट ने कैसे बिगाड़ा बाजार का मूड

The CSR Journal Magazine

कॉपर की कीमत में गिरावट: 3 हफ्ते के हाई से फिसला भाव, US-ईरान विवाद का दिखा असर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉपर (तांबा) की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, जिससे भाव अपने 3 हफ्ते के उच्चतम स्तर से नीचे फिसल गया है। ऐसा लगता है कि विश्व के बाजार में बढ़ते तनावों के कारण कॉपर की मांग में भी कमी आ रही है।

कॉपर के दाम में बड़ी गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कॉपर की कीमतों में हाल ही में गिरावट देखने को मिली है। सप्ताह के पहले दो सत्रों में कॉपर  के दाम लगभग 3% बढ़े थे, लेकिन तीन महीने के फ्यूचर कॉपर अब $14,000 प्रति टन के नीचे आ गए हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर का भाव 0.4% गिरकर $13,983 प्रति टन पर आ गया, जबकि इससे पहले यह $14,040.50 के साथ 13 मई के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर बंद हुआ था।

गिरावट के 4 बड़े कारण

सैन्य हमलों में बढ़ोतरी: अमेरिका द्वारा ईरान के ‘केशम आइलैंड’ पर किए गए हमलों और जवाबी कार्रवाई में ईरान द्वारा कुवैत पर की गई स्ट्राइक्स ने मिडिल ईस्ट में युद्ध की आशंका को फिर से गंभीर कर दिया है।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर: इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से वैश्विक बाजार में महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। इसके चलते केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई हैं, जो औद्योगिक मांग (Industrial Demand) को प्रभावित कर सकता है।
US टैरिफ का सस्पेंस: निवेशक इस महीने अमेरिका द्वारा रिफाइंड कॉपर पर लिए जाने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिका में बढ़ता स्टॉक: वैश्विक बाजारों में सप्लाई तंग होने के बावजूद अमेरिका में कॉपर का घरेलू स्टॉक (Reserves) बढ़ा है, जिसने कीमतों पर दबाव बनाने का काम किया।

कॉपर की मांग में कमी का कारण

विश्लेषकों का कहना है कि कॉपर की मांग में कमी का मुख्य कारण वैश्विक राजनीति और आर्थिक स्थिति है। जब भी बाजार में इस तरह की अशांति होती है, तो निवेशक सुरक्षित स्थानों की तलाश करने लगते हैं। इससे कॉपर जैसे धातुओं की कीमतों में गिरावट होती है। आंकड़ों के अनुसार, कॉपर की मांग में इस साल कुल 2-3% की गिरावट देखने को मिल सकती है।

अन्य धातुओं का हाल (LME पर)

कॉपर (Copper)- $13,9830.4% की गिरावट (3 हफ्ते के हाई से नीचे),
एल्युमीनियम (Aluminium)- $3,756स्थिरता, लेकिन खाड़ी देशों में सप्लाई बाधित होने से 4 साल के उच्च स्तर के करीब,
निकेल (Nickel)- $19,1450.5% की गिरावट,
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मध्य पूर्व (West Asia) में शांति वार्ता को लेकर कोई ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक औद्योगिक धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रहेगा।

बाजार के लिए अगला कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कॉपर की कीमतों में और गिरावट हो सकती है। यदि US-ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो बाजार पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे अपने निवेश के फैसले में सावधानी बरतें।

सम्भावित विकल्प और रणनीतियाँ

इस स्थिति में, निवेशकों को यह सोचना चाहिए कि वे किस प्रकार से अपनी निवेश रणनीतियों को बदल सकते हैं। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि कमोडिटी बाजार में अन्य धातुओं में निवेश करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इसके अलावा, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नज़र रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

भविष्य की संभावनाएँ

कॉपर की कीमतों में गिरावट एक अस्थायी स्थिति हो सकती है, यदि वैश्विक तनाव कम होता है तो कीमतों में सुधार भी संभव है। हालांकि, फिलहाल बाजार की स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि कॉपर की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। उत्तरी अमेरिका और मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर सभी की नज़रें हैं।

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