ये Gen Z हैं जनाब, इनकी कॉफी उबलती नहीं, जमती है, भारत में बढ़ता कोल्ड ब्रू क्रेज

The CSR Journal Magazine

Gen Z का आइस-कॉफी क्रेज: चाय-फिल्टर कॉफी को पछाड़ आगे निकला कोल्ड ब्रू, कैफे इंडस्ट्री में Gen Z क्रांति

भारत में सदियों से सुबह की शुरुआत गरम चाय की चुस्की या दक्षिण भारतीय फिल्टर कॉफी की महक के साथ होती रही है। लेकिन देश के युवाओं, विशेषकर Gen-Z पीढ़ी ने इस पारंपरिक ढर्रे को पूरी तरह बदल दिया है। आज देश के महानगरों से लेकर छोटे शहरों तक के कैफे में गरम चाय या कॉफी के बजाय बर्फ के टुकड़ों से भरी ‘आइस-कॉफी’, ‘कोल्ड ब्रू’ और ‘आइस लैट्टे’ का दबदबा है। ठंडी कॉफी का यह बढ़ता चलन महज एक मौसमी पसंद नहीं, बल्कि एक बड़े सांस्कृतिक और व्यावसायिक बदलाव का प्रतीक बन चुका है।

चाय और फिल्टर कॉफी को पछाड़ती ‘चिल्ड’ संस्कृति

पारंपरिक तौर पर भारत में कोल्ड कॉफी को केवल गर्मियों का पेय माना जाता था, जिसे अक्सर दूध, चीनी और वैनिला आइसक्रीम के साथ ब्लेंड करके परोसा जाता था। हालांकि, आज के युवाओं की पसंद इससे कोसों आगे निकल चुकी है। अब मांग ‘ब्लैक कोल्ड ब्रू’, ‘वैनिला फ्रैपे’, ‘आइस अमेरिकानो’ और ‘हेज़लनट लैट्टे’ जैसी वैरायटीज की है। सर्दियों के मौसम में भी आइस-कॉफी की मांग में कमी न आना यह साबित करता है कि युवाओं ने इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बना लिया है।

सोशल मीडिया और ‘एस्थेटिक’ का जादुई असर

इस क्रेज को हवा देने में सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसी प्लेटफॉर्म्स की बड़ी भूमिका है। Gen Z के लिए कॉफी पीना सिर्फ कैफीन की जरूरत पूरा करना नहीं है, बल्कि यह एक ‘अनुभव’ और ‘एस्थेटिक’ (दिखावट और सौंदर्य) से जुड़ा मामला है। पारदर्शी ग्लास में गिरती हुई एस्प्रेसो शॉट और दूध के मिलने का वीडियो (कॉफी पोर) रील्स पर बेहद लोकप्रिय है। हाथ में आइस-कॉफी का कप थामे तस्वीरें पोस्ट करना आज के युवाओं के लिए एक स्टेटस सिंबल और लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन गया है।

ग्लोबल और लोकल कैफे चेन्स की चांदी

भारतीय कॉफी बाजार में आए इस भूचाल को भुनाने के लिए वैश्विक और घरेलू दोनों तरह की कंपनियां रेस में हैं। स्टारबक्स और टिम हॉर्टन्स जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स के अलावा, भारत के अपने स्टार्टअप्स जैसे ‘थर्ड वेव कॉफी’, ‘ब्लू टोकाई’ और ‘नथिंग बिफोर कॉफी’ तेजी से अपने पैर पसार रहे हैं। इन कैफे में जाने वाले ग्राहकों में 60 फीसदी से अधिक युवा होते हैं, जो कस्टमाइज्ड (अपने स्वाद के अनुसार बदली हुई) आइस-कॉफी के लिए मोटी रकम खर्च करने से भी नहीं हिचकिचाते।

बदलती जीवनशैली और स्वाद का आधुनिकीकरण

विशेषज्ञों के अनुसार, Gen Z पीढ़ी प्रयोगधर्मी है। वे कड़वी और गरम ब्लैक कॉफी के बजाय ठंडे, रिफ्रेशिंग और कम कड़वे स्वादों को तरजीह देते हैं। कोल्ड ब्रू की मेकिंग प्रोसेस (जिसमें कॉफी को 12 से 24 घंटे ठंडे पानी में धीरे-धीरे निकाला जाता है) इसकी कड़वाहट को कम करती है और स्वाद को स्मूथ बनाती है, जो युवाओं को बेहद पसंद आ रहा है। इसके साथ ही, ओट मिल्क, आलमंड मिल्क और वेगन विकल्पों की उपलब्धता ने फिटनेस के प्रति जागरूक युवाओं को भी इसकी ओर आकर्षित किया है।

अर्थव्यवस्था को मिल रही है नई रफ्तार

इस ट्रेंड ने भारत के कॉफी उद्योग को एक नई दिशा दी है। भारतीय कॉफी बोर्ड के अनुसार, घरेलू कॉफी की खपत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखी जा रही है। कैफे संस्कृति के विस्तार से न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय कॉफी उत्पादकों (विशेषकर कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के कॉफी बागानों) को भी अपनी प्रीमियम बीन्स के लिए बेहतर बाजार मिल रहा है। साफ है कि भारत का कॉफी कल्चर अब सिर्फ एक पेय तक सीमित नहीं रह गया है। यह Gen Z की पहचान, उनकी फुर्तीली जीवनशैली और आधुनिक सामाजिक परिवेश का आइना बन चुका है। गरम प्याली से शुरू हुआ यह सफर अब बर्फ की खनक के साथ नए दौर में प्रवेश कर चुका है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos