खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते-भारत के कड़े रुख से बौखलाए पाकिस्तान ने फिर अलापा परमाणु युद्ध का राग

The CSR Journal Magazine

सिंधु जल संधि पर गीदड़भभकी पर उतरा पाकिस्तान, OIC के बाद पाकिस्तानी एक्सपर्ट और राजनेताओं ने दी परमाणु धमकी

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी सिंधु जल संधि (IWT) को लेकर उपजा तनाव अब कूटनीतिक सीमाओं को पार कर एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले वर्ष अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत के बाद भारत सरकार ने इस एकतरफा और असमान समझौते को अस्थायी रूप से निलंबित (Abeyance) करने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। भारत के इस कड़े रुख से तिलमिलाया पाकिस्तान अब वैश्विक मंचों पर अपनी नाकामी छुपाने के लिए खुलेआम गीदड़भभकियों और परमाणु हमलों की धमकियों पर उतर आया है। इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में इस मुद्दे को उठाने और वहां से कोई ठोस समर्थन न मिलने के बाद, पाकिस्तान के शीर्ष नीति-निर्माताओं, रक्षा विशेषज्ञों और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत को युद्ध और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की सीधी चेतावनी दी है।

परमाणु ब्लैकमेलिंग का नया हथकंडा

पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों और राजनेताओं द्वारा दिए जा रहे बयानों के अनुसार, वे भारत के इस कदम को पाकिस्तान के अस्तित्व पर सीधे हमले के तौर पर देख रहे हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने हाल ही में एक भड़काऊ बयान में कहा कि यदि भारत ने पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या मोड़ने का प्रयास किया, तो इसे देश की संप्रभुता के खिलाफ ‘युद्ध की कार्रवाई’ (Act of War) माना जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान अपनी रक्षा के लिए परमाणु प्रतिक्रिया जैसे गैर-पारंपरिक और विनाशकारी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक जैसे शीर्ष नेताओं ने भी अत्यंत आक्रामक रुख अपनाया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) की बैठकों में पानी के संकट को देश की ‘लाइफलाइन’ से जोड़ते हुए यह नैरेटिव तैयार किया जा रहा है कि यदि भारत ने जम्मू-कश्मीर में किशनगंगा, रतले या अन्य जलविद्युत परियोजनाओं के जरिए पानी के वैज्ञानिक दोहन को तेज किया, तो पाकिस्तान सैन्य बल और “सभी प्रकार के पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक हथियारों” का इस्तेमाल कर सकता है।

OIC में कूटनीतिक विफलता के बाद बौखलाहट

पाकिस्तान ने हाल ही में इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय रूप देने के लिए इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) के मंच का इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश की। पाकिस्तानी उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ओआईसी की बैठक में भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला और यह दलील देने की कोशिश की कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को एकतरफा रोकना अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। हालांकि, कश्मीर मुद्दे की तरह इस बार भी ओआईसी के प्रमुख और प्रभावशाली देशों ने पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाने से परहेज किया। वैश्विक मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे पर पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान को जब कूटनीतिक रूप से कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली, तो उसके सरकारी विशेषज्ञों और रणनीतिकारों ने परमाणु कार्ड खेलकर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने की पुरानी रणनीति अपना ली।

भारत का दोटूक जवाब: ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते’

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने पाकिस्तान की इन तमाम धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उसकी आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की हताश कोशिश करार दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत ऐसी मनगढ़ंत और गीदड़भभकी भरी चेतावनियों को पूरी तरह खारिज करता है। भारत सरकार ने पूर्व में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस स्पष्ट सिद्धांत को दोहराया है कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।” भारत का स्पष्ट और दृढ़ रुख है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सरजमीं से संचालित होने वाले सीमा पार आतंकवाद और आतंकी फैक्ट्रियों को पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि से जुड़े किसी भी तंत्र को दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा। भारत ने पाकिस्तान के साथ हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करना, संयुक्त निरीक्षण और सालाना बैठकों को पूरी तरह रोक रखा है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी अपने बयानों में साफ कर दिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस संधि को उसके पुराने स्वरूप में वापस लागू करने का कोई औचित्य नहीं है।

द हेग की मध्यस्थता अदालत को भारत ने नकारा

अपनी कूटनीतिक हार से बौखलाए पाकिस्तान ने नीदरलैंड के द हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) के एक हालिया फैसले का सहारा लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी एक पत्र प्रसारित किया था। हेग की अदालत ने कहा था कि भारत द्वारा संधि को निलंबित रखना उचित नहीं है। हालांकि, भारत सरकार ने इस तथाकथित मध्यस्थता अदालत के गठन को ही पूरी तरह अवैध और सिंधु जल संधि के मूल प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए इसके क्षेत्राधिकार और फैसले को मानने से साफ इनकार कर दिया है। भारत का कहना है कि संधि में विवाद सुलझाने के लिए पहले से ही द्विपक्षीय और तटस्थ विशेषज्ञ (Neutral Expert) के तंत्र मौजूद हैं, और पाकिस्तान द्वारा सीधे तीसरे पक्ष को शामिल करना संधि का उल्लंघन है।

पाकिस्तान की असली चिंता और जल संकट

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की इस छटपटाहट और परमाणु धमकियों के पीछे की असली वजह उसका अपना भयानक आंतरिक जल संकट और बदहाल अर्थव्यवस्था है। पाकिस्तान की लगभग 90 प्रतिशत कृषि व्यवस्था सिंधु नदी बेसिन के पानी पर निर्भर है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने भी कुछ समय पहले इस मुद्दे पर भारत को सीधे मिसाइल हमलों की धमकी दी थी। वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी का सही तरीके से भंडारण नहीं कर पाता और अपनी प्रशासनिक नाकामियों का दोष भारत पर मढ़ना चाहता है। अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के तहत, भारत एक ‘अपर रिपेरियन’ (ऊपरी तटवर्ती) राज्य होने के नाते अपनी सीमाओं के भीतर बिजली बनाने और पानी का वैज्ञानिक भंडारण करने का पूर्ण संप्रभु अधिकार रखता है। भारत अब जम्मू-कश्मीर में अपनी लंबित पनबिजली परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा कर रहा है, जिससे पाकिस्तान को अपनी कृषि और बिजली व्यवस्था ठप होने का डर सता रहा है। भारत के इस आर्थिक और रणनीतिक दबाव के आगे पाकिस्तान पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है, यही कारण है कि वह अब OIC की विफलता के बाद परमाणु युद्ध की आत्मघाती भाषा बोलने पर मजबूर हो गया है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos