स्कूल की घंटी बजते ही कैंटीन के बाहर चिप्स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक, समोसे और बर्गर खरीदने के लिए बच्चों की भीड़ लगना आम बात है। लेकिन आने वाले समय में स्कूलों के आसपास का यह नजारा बदल सकता है। बच्चों में बढ़ते मोटापे और अनहेल्दी खाने की आदतों को देखते हुए फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) स्कूलों के आसपास हाई फैट, शुगर और सॉल्ट यानी HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्ती की दिशा में काम कर रहा है। प्रस्ताव के तहत स्कूलों के 50 मीटर के दायरे में चिप्स, मीठे पेय और अन्य ज्यादा फैट, नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू करने की बात सामने आई है। इसका दायरा देशभर के बड़ी संख्या में स्कूलों तक पहुंच सकता है।
चिप्स से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक पर नजर
स्कूलों के आसपास बच्चों को आसानी से मिलने वाले कई पैकेज्ड और फास्ट फूड उत्पाद HFSS श्रेणी में आ सकते हैं। इनमें चिप्स, कुछ तरह के स्नैक्स, मीठे पेय, चॉकलेट और दूसरे ज्यादा नमक, चीनी या फैट वाले उत्पाद शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किसी खास ब्रांड या उत्पाद पर रोक उसकी पोषण संरचना और लागू नियमों के आधार पर तय होगी। इसका मकसद बच्चों को हर तरह के खाने से रोकना नहीं, बल्कि स्कूल के आसपास ऐसे खाद्य पदार्थों की उपलब्धता कम करना है, जिनका ज्यादा सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह माना जाता है।
बच्चों में मोटापे को लेकर बढ़ी चिंता
बच्चों में मोटापा दुनिया के कई देशों के लिए बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन रहा है। भारत में भी बदलती लाइफस्टाइल, कम शारीरिक गतिविधि और ज्यादा कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों की बढ़ती उपलब्धता को लेकर चिंता जताई जाती रही है। FSSAI की पहल का फोकस सिर्फ जंक फूड की बिक्री रोकने तक सीमित नहीं है। स्कूलों में बच्चों को स्वस्थ भोजन के बारे में जागरूक करना और बेहतर खाद्य विकल्प उपलब्ध कराना भी इसका हिस्सा है।
स्कूलों के पास दुकानदारों पर पड़ेगा असर
अगर स्कूलों के आसपास HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री पर सख्ती होती है, तो इसका सीधा असर कैंटीन, ठेले और स्कूलों के आसपास दुकान चलाने वाले कारोबारियों पर पड़ेगा। उन्हें ऐसे उत्पादों की जगह अपेक्षाकृत स्वस्थ विकल्प रखने पड़ सकते हैं। दूसरी ओर, खाद्य कंपनियों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर बच्चों तक हाई फैट, शुगर और सॉल्ट वाले उत्पादों की पहुंच कम होती है, तो कंपनियों पर अपने उत्पादों की पोषण संरचना में बदलाव करने का दबाव बढ़ सकता है।
50 मीटर का नियम पहले से भी चर्चा में
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। स्कूल कैंपस और स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर FSSAI के नियम पहले से मौजूद हैं। इसलिए इसे बिल्कुल नए सिरे से बनाया जा रहा देशव्यापी प्रतिबंध कहना सही नहीं होगा। मौजूदा व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी तरीके से लागू करने और बच्चों के आसपास के खाद्य वातावरण को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। राज्यों में भी इस दिशा में अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं।
महाराष्ट्र ने भी उठाया कदम
महाराष्ट्र में स्कूलों के अंदर और उनके आसपास HFSS खाद्य पदार्थों की बिक्री और प्रचार को लेकर सख्ती के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इससे साफ है कि बच्चों के खानपान को लेकर राज्यों और केंद्र दोनों स्तर पर नियमन बढ़ाने की कोशिश हो रही है। स्कूलों के आसपास जंक फूड की उपलब्धता कम होने के साथ-साथ विशेषज्ञ बच्चों को स्वस्थ विकल्प देने और अभिभावकों को खानपान के प्रति जागरूक करने पर भी जोर देते हैं।
बच्चों की डाइट बदलने की कोशिश
स्कूल के आसपास मिलने वाला खाना बच्चों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन सकता है। ऐसे में सरकार का फोकस सिर्फ दुकानों पर कार्रवाई करने के बजाय बच्चों के लिए बेहतर खाद्य माहौल तैयार करने पर है। आने वाले समय में स्कूलों में हेल्दी फूड को बढ़ावा देने, HFSS उत्पादों की बिक्री पर निगरानी और जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत किया जा सकता है। हालांकि, प्रस्तावित बदलावों की अंतिम रूपरेखा और उनके लागू होने की तारीख संबंधित आधिकारिक आदेशों के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।
बच्चों के खाने की आदतों पर पड़ेगा असर
स्कूलों के आसपास जंक फूड की उपलब्धता कम करने की कोशिश का सबसे बड़ा फोकस बच्चों की खानपान की आदतों पर है। चिप्स, मीठे पेय और फास्ट फूड की जगह अगर स्कूलों के आसपास पौष्टिक विकल्प आसानी से उपलब्ध होते हैं, तो बच्चों को बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। अब देखना होगा कि प्रस्तावित सख्ती को देशभर में किस तरह लागू किया जाता है।

