8 लाख से ज्यादा मधुमक्खियां चुरा ले गए चोर, खेतों से गायब हुए छत्ते; ऑस्ट्रेलिया में अजीबोगरीब चोरी से मचा हड़कंप
चोरी की घटनाएं आम तौर पर नकदी, गहने, वाहन या महंगे सामान से जुड़ी होती हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्वींसलैंड से सामने आई एक चोरी ने पुलिस और मधुमक्खी पालकों को हैरान कर दिया है। यहां चोर किसी दुकान या घर में नहीं घुसे, बल्कि खेतों में रखे मधुमक्खियों के छत्तों को निशाना बनाकर सैकड़ों हजारों मधुमक्खियां ही चुरा ले गए। अलग-अलग संपत्तियों से करीब 44 मधुमक्खी कॉलोनियां गायब होने की जानकारी सामने आई है। इनमें मौजूद मधुमक्खियों की संख्या 8 लाख से अधिक होने का अनुमान है। मामला एथर्टन टेबललैंड्स क्षेत्र का है, जहां मधुमक्खियों का इस्तेमाल शहद उत्पादन के साथ-साथ फलों और अन्य कृषि फसलों के परागण के लिए किया जाता है।
दबे पांव चोरी
मामले की खास बात यह है कि चोरों ने छत्तों को सामान्य तरीके से उठाकर ले जाने के बजाय बेहद सावधानी से उनके अंदर मौजूद मधुमक्खियों, ब्रूड यानी विकसित हो रहे बच्चों और फ्रेम को निकाल लिया। कई मामलों में बाहर से छत्ते लगभग सामान्य दिखाई देते रहे। इसका पता मधुमक्खी पालकों को नियमित जांच के दौरान चला। पुलिस को संदेह है कि इस वारदात को अंजाम देने वाले लोग मधुमक्खी पालन के काम से अच्छी तरह परिचित हो सकते हैं, क्योंकि सक्रिय मधुमक्खियों वाली कॉलोनियों को बिना गंभीर नुकसान या डंक खाए निकालना सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता।
41 छत्तों से निकाली गईं मधुमक्खियां
व्यावसायिक मधुमक्खी पालक जैक लॉटन के अनुसार, एथर्टन टेबललैंड्स के दो स्थानों पर रखे 41 व्यावसायिक छत्तों से मधुमक्खियां, ब्रूड और फ्रेम निकाल लिए गए। एक छत्ते में करीब 15 हजार मधुमक्खियां होने का अनुमान लगाया गया था। शुरुआती गणना के आधार पर चोरी हुई मधुमक्खियों की संख्या करीब 5 लाख बैठती है। बाद में तीन मधुमक्खी पालकों से जुड़े कुल 44 छत्तों के गायब होने की जानकारी सामने आई, जिसके आधार पर कुल संख्या 8 लाख से अधिक आंकी गई। चोरी का पता तब चला जब मधुमक्खी पालक नियमित निरीक्षण के लिए छत्तों के पास पहुंचे। काइरी क्षेत्र में 14 छत्ते खाली मिले। इसके बाद मटचिल्बा की एक अन्य संपत्ति पर 27 और छत्तों के खाली होने की जानकारी मिली। जांच में पाया गया कि छत्तों के अंदर मौजूद पूरी कॉलोनी को निकाल लिया गया था।
चोरों को मधुमक्खियों की पूरी जानकारी थी
यह कोई ऐसी चोरी नहीं लगती जिसे बिना तैयारी के अंजाम दिया जा सके। मधुमक्खियों वाली कॉलोनी को छत्ते से निकालना जोखिम भरा काम होता है। चोरों को यह पता होना जरूरी है कि मधुमक्खियों को किस तरह संभालना है, फ्रेम कैसे निकालना है और पूरी कॉलोनी को दूसरे बक्से में कैसे स्थानांतरित करना है। जांच अधिकारियों ने भी आशंका जताई है कि वारदात के पीछे कोई अर्ध-व्यावसायिक या व्यावसायिक स्तर पर मधुमक्खी पालन करने वाला व्यक्ति हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, चोरी हुई मधुमक्खियों का इस्तेमाल किसी दूसरे खेत में परागण के लिए किया जा सकता है। यही वजह है कि जांच में इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि आसपास के इलाकों में अचानक किसी व्यक्ति के पास बड़ी संख्या में नई मधुमक्खी कॉलोनियां तो नहीं पहुंचीं।
शहद से ज्यादा बड़ा है इन मधुमक्खियों का आर्थिक महत्व
इस चोरी से नुकसान सिर्फ छत्ते और मधुमक्खियों की कीमत तक सीमित नहीं है। व्यावसायिक मधुमक्खी पालन में मधुमक्खियां किसानों के लिए परागण सेवा भी उपलब्ध कराती हैं। खासकर फल और सब्जियों की खेती में मधुमक्खियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। एथर्टन टेबललैंड्स में चोरी हुई कॉलोनियों का इस्तेमाल एवोकाडो और अन्य कृषि फसलों के परागण के लिए किया जाता था। मधुमक्खियों की कॉलोनियां खेतों में मौजूद रहने से फसलों में परागण बेहतर होता है और इससे उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलती है। इसलिए जब बड़ी संख्या में कॉलोनियां अचानक गायब हो जाती हैं तो नुकसान सिर्फ मधुमक्खी पालक को नहीं, बल्कि उन किसानों को भी हो सकता है जो परागण के लिए इन कॉलोनियों पर निर्भर रहते हैं। मधुमक्खी पालक टॉम बिडनर के अनुसार, चोरी से अब तक करीब 20 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक के छत्तों का नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा परागण से होने वाली लगभग 10 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की संभावित आय भी प्रभावित हो सकती है। आने वाले शहद उत्पादन के मौसम पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
चोरी ऐसे समय हुई जब पहले से संकट में है मधुमक्खी पालन उद्योग
इस मामले ने इसलिए भी चिंता बढ़ा दी है क्योंकि उत्तरी क्वींसलैंड का मधुमक्खी पालन उद्योग पहले ही वरोआ माइट नामक परजीवी के खतरे से जूझ रहा है। यह परजीवी मधुमक्खियों की कॉलोनियों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उत्तरी क्वींसलैंड में वरोआ माइट की मौजूदगी सामने आने के बाद स्थानीय मधुमक्खी पालकों की चिंता और बढ़ गई है। ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 2022 में इस परजीवी के प्रसार के बाद उसकी रोकथाम और नियंत्रण पर 100 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। ऐसे समय में स्वस्थ और मजबूत मधुमक्खी कॉलोनियों का चोरी हो जाना उद्योग के लिए अतिरिक्त झटका माना जा रहा है।
मधुमक्खियों की चोरी आसान नहीं, घंटों चला होगा अभियान
मधुमक्खी पालकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को चुराने के लिए चोरों को काफी समय और उपकरणों की जरूरत पड़ी होगी। जैक लॉटन के अनुसार, यह ऐसा काम नहीं है जिसे कुछ मिनटों में पूरा किया जा सके। पुलिस के मुताबिक भी घटनास्थल से मिले संकेतों के आधार पर वारदात को अंजाम देने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों को मधुमक्खियों को संभालने का अनुभव होने की आशंका है। चोरों ने जिन कॉलोनियों को निशाना बनाया, वे सामान्य घरेलू स्तर के छोटे छत्ते नहीं थे। ये व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए तैयार की गई मजबूत कॉलोनियां थीं। इनमें रानी मधुमक्खी, कामगार मधुमक्खियां, ब्रूड और अन्य जरूरी संरचना मौजूद थी। इस तरह पूरी कॉलोनी को उठाकर किसी दूसरे बक्से में स्थानांतरित करना विशेषज्ञता वाला काम है।
पुलिस को किसी व्यावसायिक संचालक पर शक
क्वींसलैंड पुलिस की ग्रामीण और स्टॉक क्राइम टीम मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि चोरी करने वाला व्यक्ति संभवतः मधुमक्खी पालन की अच्छी जानकारी रखता है। जांचकर्ताओं को यह भी आशंका है कि चोरी की गई कॉलोनियों को किसी दूसरे व्यावसायिक काम में इस्तेमाल किया जा सकता है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने की अपील की है। खास तौर पर ऐसे वाहन या लोगों पर नजर रखने को कहा गया है जो हाल के दिनों में बड़ी संख्या में मधुमक्खियों के छत्तों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते दिखाई दिए हों।
दुनिया को भोजन देने वाली छोटी-सी जीव के पीछे बड़ा कारोबार
मधुमक्खियां केवल शहद बनाने के लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। कृषि व्यवस्था में उनकी भूमिका इससे कहीं बड़ी है। फल, सब्जियों और कई अन्य फसलों के उत्पादन में परागण बेहद जरूरी है और मधुमक्खियां प्राकृतिक रूप से इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसी कारण व्यावसायिक मधुमक्खी पालन में एक स्वस्थ कॉलोनी का मूल्य केवल उसके शहद से नहीं आंका जाता। एक मजबूत कॉलोनी किसान की फसल में परागण सुनिश्चित करने के साथ मधुमक्खी पालक के लिए शहद और परागण सेवा दोनों से आय का स्रोत बन सकती है। ऐसे में सैकड़ों छत्तों से मधुमक्खियों का गायब होना स्थानीय कृषि व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन जाता है। ऑस्ट्रेलिया की इस घटना ने यह भी दिखाया है कि मधुमक्खी पालन अब केवल पारंपरिक शहद उत्पादन तक सीमित व्यवसाय नहीं है। कृषि क्षेत्र में इसकी आर्थिक भूमिका बढ़ने के साथ मधुमक्खी कॉलोनियां भी मूल्यवान संपत्ति बन गई हैं। यही कारण है कि पुलिस इस मामले को सामान्य चोरी की घटना के बजाय व्यावसायिक उद्देश्य से की गई सुनियोजित वारदात के नजरिए से भी देख रही है।
नेटवर्क की जांच जारी
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और चोरी हुई मधुमक्खी कॉलोनियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि चोरी हुई मधुमक्खियों को पहचानना सामान्य चोरी के सामान की तुलना में कहीं कठिन है। यदि कॉलोनियों को दूसरे खेतों में पहुंचाकर इस्तेमाल किया जा रहा है तो उनका पता लगाने के लिए स्थानीय मधुमक्खी पालन नेटवर्क और कृषि क्षेत्र की जानकारी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस अनोखी चोरी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रकृति का छोटा-सा जीव भी बड़े आर्थिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां चोरों ने न नकदी चुराई, न गहने और न कोई वाहन—वे सीधे खेतों से हजारों मधुमक्खियों वाली पूरी कॉलोनियां ही उड़ा ले गए।
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