CM Mohan Yadav ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन कर विकास की नई दिशा का किया आरंभ

The CSR Journal Magazine
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन किया, जिसका लक्ष्य क्षेत्रीय विकास को नई गति देना है। यह परियोजना औद्योगिक परिवहन को सुगम बनाएगा और इंदौर, उज्जैन, देवास सहित कई शहरों को मेट्रोपॉलिटन सिटी के रूप में विकसित करेगा। इसमें एग्री प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और वेयरहाउसिंग जैसे उद्योगों में नई संभावनाएँ जन्म लेंगी। यह कॉरिडोर 2360 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है, जिसका भूमिपूजन इंदौर के नैनोद गांव में किया गया।

किसानों की भूमिका और मुआवजा

इस अवसर पर किसानों ने मुख्यमंत्री को स्वागत करते हुए हल और मुकुट भेंट किया। किसानों ने भूमि अधिग्रहण के सहमति पत्र पर भी हस्ताक्षर किए। जो खास बात रही, वो यह थी कि इस कॉरिडोर के जरिए सरकार ने किसानों को उनकी भूमि का 60 प्रतिशत लौटाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इससे किसानों को 650 करोड़ रुपये के प्लॉट मिलने की संभावना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

विकास के द्वार खुलेंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन-धार-देवास-शाजापुर-रतलाम क्षेत्र में मेट्रोपॉलिटन सिटी का विकास हो रहा है। यह सड़क केवल इंदौर और पीथमपुर को जोड़ने वाली नहीं है, बल्कि इससे दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर भी जुड़ेगा। भारत में आज औसतन 160,000 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग विकसित हो चुके हैं, जो क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण साबित होंगे। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर से विभिन्न उद्योगों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

कृषि और उद्योग का सहयोग

सीएम यादव ने यह भी बताया कि नदी जोड़ो परियोजना के जरिए बुंदेलखंड से लेकर मालवा तक सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, प्रदेश में 48 नए इंडस्ट्रियल पार्क स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे निवेश में भी वृद्धि हुई है। प्रदेश में उद्योगों की गति में मध्यप्रदेश दूसरे नंबर पर है। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर राज्य में विकास की नई धारा बहाएगा और किसानों को उनकी मेहनत का इनाम देगा।

कैबिनेट मंत्री की मान्यता

कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस योजना को देश की बेहतरीन योजना बताते हुए कहा कि इसमें किसान अपनी जमीन देने को तैयार हैं। इस योजना से लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा और ग्रीन इंडस्ट्री का विकास होगा। मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इसे विकास का संकल्प और विश्वास का प्रतीक बताया है, जिससे रोजगार की संभावनाएँ बढ़ेंगी।

परियोजना की प्रमुख विशेषताएँ

इस परियोजना के अंतर्गत लगभग 20.28 किलोमीटर लंबाई का मार्ग विकसित किया जा रहा है। कुल 1316 हेक्टेयर क्षेत्र में नियोजित विकास की योजना है, जिसके लिए 2360 करोड़ रुपये की लागत तय की गई है। इस कॉरिडोर के जरिए राष्ट्रीय राजमार्ग-47 और 52 के बीच बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होगी, जिससे औद्योगिक परिवहन की प्रक्रिया अधिक सुगम बनेगी। यह इंदौर क्षेत्र में संतुलित शहरीकरण को बढ़ावा देगा।

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