BMC Women Welfare: महिला कल्याण के लिए रखा फंड खर्च नहीं कर पाई मुंबई बीएमसी

The CSR Journal Magazine
BMC Women Welfare: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका Mumbai BMC एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक (Chief Municipal Auditor) की 2024-25 ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बीएमसी ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में महिलाओं, लड़कियों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के कल्याण के लिए निर्धारित Gender Budget का केवल 33 प्रतिशत ही खर्च किया। यानी करीब 67 प्रतिशत राशि बिना उपयोग के ही पड़ी रही, जबकि इसी दौरान बीएमसी की अन्य विकास परियोजनाओं पर खर्च 70 प्रतिशत से अधिक रहा।

BMC Women Welfare: दो साल में सिर्फ एक-तिहाई बजट ही खर्च

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में जेंडर बजट के तहत 587.94 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, लेकिन बीएमसी केवल 199.72 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी। इसी तरह 2023-24 में 1,882.07 करोड़ रुपये के बजट में से सिर्फ 633.26 करोड़ रुपये का उपयोग किया गया। यानी लगातार दो वर्षों तक महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए तय बजट का लगभग एक-तिहाई ही खर्च हुआ। इसके उलट, बीएमसी की सामान्य विकास परियोजनाओं में बजट उपयोग 70 प्रतिशत से अधिक रहा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि महिलाओं और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई।

BMC Women Welfare: किन योजनाओं के लिए था यह बजट?

Gender Budget के तहत महिलाओं, लड़कियों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। इनमें महिलाओं को स्वरोजगार के लिए सिलाई मशीन और अन्य उपकरण उपलब्ध कराना, सार्वजनिक शौचालयों में Sanitary Vending Machines लगाना, स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक सहायता देना, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, वरिष्ठ नागरिकों के लिए योजनाएं, दिव्यांगों को सहायता और महिलाओं के लिए Self Defence Training जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। लेकिन बजट खर्च न होने से इन योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच सका।

सामाजिक संगठनों ने उठाए सवाल

Act of Disabled Rights के सदस्य नितिन गायकवाड ने आरोप लगाया कि जेंडर बजट की कई योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के तहत वितरित किए गए उपकरणों और खर्च की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि ऑडिट रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से बजट का पूरा उपयोग सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई है। वहीं, मुंबई की पूर्व महापौर और राज्य महिला एवं बाल आयोग की पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेहतर योजना बनाना जरूरी है, ताकि बजट समय पर खर्च हो सके।

कांग्रेस ने सरकार और बीएमसी को घेरा

कांग्रेस नेता वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार और बीएमसी प्रशासन की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीएमसी के पास बड़े प्रोजेक्ट्स और ठेकेदारों पर खर्च करने के लिए पैसा है, लेकिन महिलाओं, लड़कियों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगों के कल्याण के लिए रखा गया करीब 1,600 करोड़ रुपये दो वर्षों तक खर्च ही नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि यह राशि तत्काल महिलाओं की सुरक्षा, स्वच्छ शौचालय, सैनिटरी नैपकिन मशीन, स्वरोजगार योजनाओं और दिव्यांगों के कल्याण पर खर्च की जाए।

जवाब का इंतजार

ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद अब बीएमसी प्रशासन पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है। महिलाओं और कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित बजट का कम उपयोग होने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या योजनाओं की सही मॉनिटरिंग और समय पर क्रियान्वयन हो रहा है। फिलहाल इस मुद्दे पर बीएमसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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