हर साल बिहार से बनते हैं सबसे ज्यादा आईएएस-आईपीएस? जानें क्या कहते हैं आंकड़े

The CSR Journal Magazine
संसद में पेश हुए आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2024 के बीच, बिहार के 271 उम्मीदवार UPSC सिविल सेवा परीक्षा में सफल रहे। यह आंकड़े यह साबित करते हैं कि बिहार अपनी प्रतिभा से इस क्षेत्र में खास पहचान बना रहा है। लेकिन क्या यह कहना उचित है कि बिहार हर साल सबसे ज्यादा IAS-IPS अधिकारी देता है?

CSE परिणाम की तस्वीर

UPSC CSE 2025 में, कुल 958 अभ्यर्थी सफल हुए, जिनमें से 659 पुरुष और 299 महिलाएं थीं। इस परीक्षा के लिए 9,37,876 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से सिर्फ 2,736 को इंटरव्यू के लिए योग्य पाया गया। यह परीक्षा दुनिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, और हर साल लाखों छात्र इस मायावी लक्ष्‍य को पाने के लिए मेहनत करते हैं।

भाषा का मुद्दा

UPSC सिविल सेवा परीक्षा के हालिया विश्लेषण में भाषा का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। हिंदी एवं अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के अभ्यर्थियों का कहना है कि अंग्रेजी माध्यम के उम्मीदवारों को अधिक लाभ मिलता है। 2021 में 538 लोगों ने हिंदी में परीक्षा दी, जिनमें से 26 चयनित हुए। यह आंकड़ा यह बताता है कि हिंदी माध्यम के छात्रों की सफलता की दर बहुत कम है।

रियाज और तैयारी का महत्व

नगरों जैसे दिल्ली के मुखर्जी नगर और प्रयागराज में छात्रों की बड़ी संख्या अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही है। लेकिन कई छात्र इस सफर में हार मान लेते हैं। जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए सही तैयारी और अनुशासन की आवश्यकता होती है। हाल के आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि बिहार के छात्रों का प्रशासनिक सेवा में रुझान अत्यधिक है।

राज्यों का मुकाबला

आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान जैसे राज्य UPSC परीक्षा में सबसे ज्यादा सफल उम्मीदवारों की संख्या में आगे रहे हैं। लेकिन इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। सरकार केवल चयनित उम्मीदवारों के नाम और रैंक जारी करती है, जिसके कारण कई अभ्यर्थियों में कंफ्यूजन रह जाता है।

UPSC में उत्तर भारत का दबदबा

हाल के वर्षों में जो टॉपर्स लिस्ट सामने आई है, उसमें उत्तर भारत के उम्मीदवारों का नाम प्रमुखता से लिया गया है। लेकिन इसे कोई अंतिम तथ्य मानना सही नहीं होगा, क्योंकि UPSC परीक्षा में सफलता किसी भी राज्य का नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मेहनत की कहानी है।

शिक्षा की संस्कृति का असर

बिहार में सरकारी नौकरी को सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। इस वजह से यहां की युवा पीढ़ी का ध्यान इस ओर अधिक होता जा रहा है। बिहार में 2021 से 2024 के बीच हर साल 271 अभ्यर्थियों ने CSE परीक्षा पास की है। यह सरकार की शिक्षा प्रणाली और लोगों की मेहनत का संयुक्त फल है।

राजस्थान की सफलता के कारण

राजस्थान वर्तमान में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक नया मॉडल बन चुका है। जयपुर और कोटा जैसे शहरों में UPSC कोचिंग का बड़ा नेटवर्क विकसित हो चुका है। इसके चलते, पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान के छात्रों ने अच्छी संख्या में UPSC में सफलता प्राप्त की है।

देशभर में सफलता का ग्राफ

हर राज्य से छात्र अपनी क्षमता के अनुसार UPSC परीक्षा में हिस्सा लेते हैं। ज्ञातव्य है कि महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, और अन्य राज्यों के छात्रों ने भी इस परीक्षा में अपनी जगह बनाई है। हालांकि, उत्तर भारत के राज्यों का दबदबा अभी भी सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।

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