छत्तीसगढ़ में हीरे का खजाना! बलौदा-बेलमुंडी में ड्रिलिंग को मिली हरी झंडी

The CSR Journal Magazine
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष निदेशक सौरभ सिंह ने हाल ही में कहा कि खनिज संसाधनों का सही उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास देश की आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है। बलौदा-बेलमुंडी हीरे की परियोजना छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों में शुमार कर सकती है। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के निदेशक मंडल की एक बैठक में महासमुंद जिले में स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी दी गई है। अब लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग को शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन करने हेतु महत्वपूर्ण है।

नई तकनीक से मिलेगी सही जानकारी

बैठक में निदेशक मंडल ने पहले की प्रगति पर चर्चा की और निर्देश दिए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समय पर पूरा किया जाए। बड़े व्यास की ड्रिलिंग किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक आकलन करने में मदद करेगा। इसके बाद एक विस्तृत feasibility report तैयार की जाएगी, जिससे व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने के लिए अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी

इस बैठक में NCL के निदेशक मंडल के सदस्य अमिताभ मुखर्जी, आशीष चटर्जी, और अन्य प्रमुख अधिकारी शामिल हुए। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड भारत सरकार का एक उपक्रम है, जो अब तक लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित था। लेकिन बलौदा-बेलमुंडी में हीरों की पुष्टि के बाद, यह बहु-खनिज विकास का प्रयास कर रहा है।

हीरा युक्त भू-संरचना की पुष्टि

NCL ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की। लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। यह इस तथ्य की पुष्टि करता है कि इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना मौजूद है।

देश के लिए महत्वपूर्ण खनिज परियोजना

बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों के उदाहरण दिखाते हैं कि इस तरह की प्रारंभिक सफलता भविष्य में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का संकेत हो सकती है। इसलिए बलौदा-बेलमुंडी की परियोजना को केवल छत्तीसगढ़ के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अन्य परियोजनाओं की समीक्षा

इस बैठक में राज्य की अन्य प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी चर्चा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में इस वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे धीरे-धीरे 70 लाख टन प्रतिवर्ष करने की योजना बनाई गई है। बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है।

पर्यावरण संरक्षण पर जोर

बैठक में यह

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