बहराइच में Asaduddin Owaisi की जनसभा, अखिलेश को मिलेगें झटके – मुस्लिम वोटरों पर नजर

The CSR Journal Magazine
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी के बहराइच में अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की है। मटेरा में आयोजित जनसभा के दौरान, उनका मुख्य लक्ष्य मुस्लिम, यादव, पिछड़े और दलित मतदाताओं को एकजुट करना है। यह रैली सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में AIMIM की चुनावी तैयारियों का इशारा है। मटेरा विधानसभा सीट को चुनना रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां मुस्लिम और अन्य जातियों की अच्छी खासी जनसंख्या है। समाजवादी पार्टी का इस क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से दबदबा रहा है।

वोट बैंक की मजबूती की रणनीति

AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने बताया कि उनकी पार्टी 200 सीटों पर अकेले उम्मीदवार उतारने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, बसपा के साथ गठबंधन का भी संकेत दिया गया है। उनका कहना है कि यदि मुस्लिम और दलित वोट एकजुट होते हैं, तो यह सपा और भाजपा दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। ओवैसी की मटेरा रैली भी सांस्कृतिक-सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने का एक प्रयास है। पार्टी का आरोप है कि पिछले वर्षों में मुस्लिम वोटों पर निर्भर दलों ने समाज के उत्थान के लिए कुछ ठोस कदम नहीं उठाए।

सपा का जवाबी हमला

समाजिकवादी पार्टी के नेता यासर शाह ने कहा है कि मुस्लिम मतदाता अब जागरूक हो चुके हैं। उनका कहना है कि लोग AIMIM के राजनीतिक खेल को नहीं समझते हैं और अब किसी के झांसे में नहीं आने वाले हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 2022 के चुनाव में AIMIM को एक भी सीट नहीं मिली थी, जो उनके दावों को कमजोर करता है।

बिहार-महाराष्ट्र में मिली सफलताओं का प्रभाव

ओवैसी को बिहार और महाराष्ट्र के चुनावों में मिले अच्छे नतीजों से आत्मविश्वास बढ़ा है। लेकिन राजनीतिक दृष्टिकोन से, यूपी की सामाजिक संरचना बिहार और महाराष्ट्र से अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी में वोटर अक्सर जीतने वाले उम्मीदवार को देख कर वोट डालते हैं, जिससे छोटे दलों के लिए जीतना मुश्किल हो जाता है।

आंकड़ों पर एक नजर

AIMIM का यूपी विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड अभी तक कमजोर रहा है। 2017 में 38 सीटों पर लड़ाई करने पर उनकी जमानत जब्त हुई और 2022 में भी उनका वोट शेयर महज 0.43% रहा। हालांकि, हाल के स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी ने 29 सीटें जीती हैं, जो उनकी क्षमताओं को लेकर नई उम्मीदें जगा सकती हैं।

संभावित गठबंधन की बातें

AIMIM और BSP के संभावित गठबंधन की बातें भी इस समय चर्चा में हैं। यदि मुस्लिम और दलित वोट एकजुट होते हैं, तो चुनावी समीकरण बदल सकते हैं। चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी के साथ भी तालमेल के संकेत मिले हैं। यह चुनावी समीकरण ओवैसी के लिए एक स्थायी राजनीतिक आधार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

2027 चुनाव का लक्ष्य

केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर का मानना है कि AIMIM का मूल उद्देश्य यूपी में स्थायी राजनीतिक आधार तैयार करना है। अगर पार्टी 3-5% वोट शेयर हासिल करती है, तो कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है। यह स्थिति समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है, जो अपने मुस्लिम मतदाता को संभालने का प्रयास कर रही है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos