अमरनाथ गुफा का शिवलिंग लगभग पिघल चुका है, यात्रा में अब भी लाखों श्रद्धालुओं का दर्शन बाकी

The CSR Journal Magazine
अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। हालांकि, यात्रा के सिर्फ पांच दिन ही बीते हैं। 57 दिन चलने वाली इस यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई को हुई थी। चार दिनों में करीब 86 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में मत्था टेकने का मौका पाया। मंगलवार को यात्रा के पांचवे दिन यह संख्या 1 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इस साल यात्रा के लिए 4 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिससे यह स्पष्ट है कि अभी भी 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं का दर्शन करना बाकी है।

अतुलनीय शिवलिंग का प्राकृतिक निर्माण

विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के टुकड़े को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह एक प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में पानी की बूंदें जमकर स्थिरता प्राप्त करती हैं, वैसे ही अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है। इसका आकार हर मौसम में अलग होता है और यह इसकी अनोखी विशेषता है।

श्रद्धालुओं का रूट 48 किमी और 14 किमी

अमरनाथ यात्रा का एक रूट नुनवान-पहलगाम से 48 किमी का है, जबकि दूसरा रूट बालटाल का 14 किमी का है। बालटाल रूट कठिन है, लेकिन यहाँ भी श्रद्धालुओं की संख्या में कमी नहीं आई है। यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। इससे पहले, श्रद्धालुओं की आने-जाने का सिलसिला जारी है।

क्या शिवलिंग फिर से बनेगा?

एक सवाल जो श्रद्धालुओं के मन में उठ रहा है कि क्या शिवलिंग फिर से बन सकता है? इसके लिए संभावना बहुत कम है। यदि ताजा बर्फबारी होती है या तापमान शून्य से नीचे जाता है, तभी इसके पुनर्निमाण की कोई उम्मीद बन सकती है। हालांकि, फिलहाल यात्रा जारी है और इसमें कोई रुकावट नहीं आई है।

श्रद्धालु तो पहले ही जुट चुके हैं

अमरनाथ यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। इस साल यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। नौनवान-पहलगाम और बालटाल के रूट श्रद्धालुओं के लिए खुला है।

जारी है यात्रा, श्रद्धालुओं में उत्साह

अमरनाथ यात्रा इस बार भी धूमधाम से चल रही है। हालांकि, शिवलिंग के पिघलने से कुछ श्रद्धालुओं में चिंता बनी हुई है। सभी श्रद्धालु इस आशा में है कि यात्रा सफल रहेगी और वे बाबा बर्फानी के दर्शन कर सकेंगे। अब देखना यह है कि अगले कुछ दिनों में मौसम का क्या मिजाज़ रहेगा और यात्रा पर इसका क्या असर पड़ेगा।

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