UP पुलिस सिस्टम पर हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘योग्यता नहीं, राजनीतिक वफादारी से मिलती है पोस्टिंग’

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में कई बार अधिकारियों की नियुक्तियां और तबादले राजनीतिक निष्ठा के आधार पर होते हैं, न कि योग्यता के आधार पर। यह हालात अदालत के लिए चिंताजनक हैं और इसे तुरंत सुधारने की आवश्यकता है।

सत्ता का अंधानुकरण

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रदेश में कई पुलिस अधिकारी सत्ता के प्रति ज्यादा वफादार नजर आते हैं। जब तबादलों, पोस्टिंग और प्रमोशन की बात आती है, तो वही अधिकारी जो सत्ता की वफादारी दिखाते हैं, वे ही आसानी से इन सुविधाओं को प्राप्त कर लेते हैं। यह मामला वास्तव में चिंतित करने वाला है।

राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति

हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में राजनीतिक संरक्षण की संस्कृति की गहरी जड़ें होने की बात कही। कई सरकारों के कार्यकाल में प्रशासनिक व्यवस्थाओं में राजनीतिक दखलंदाजी का प्रभाव साफ नजर आता है। कोर्ट ने कहा कि योग्यताओं की अनदेखी कर कई बार राजनीतिक निष्ठा को तरजीह दी जाती है, जिससे पारदर्शिता में कमी आ रही है।

आधिकारिक नियुक्तियों की अनियमितता

जस्टिस विनोद दिवाकर की सिंगल बेंच ने गैंगस्टर्स एवं असामाजिक गतिविधियां (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दर्ज एक मामले की सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियाँ की। उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीतिक और नौकरशाही व्यवस्था सामंती मानसिकता से प्रभावित है, जिसके कारण प्रशासनिक अंग कमजोर होते जा रहे हैं।

गरीब अधिकारियों की स्थिति

अदालत ने कहा कि पसंदीदा अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिलों में तैनात किया जाता है, जबकि कठोरता से काम करने वाले अधिकारियों को कम महत्व दिए जाने वाले पदों पर भेज दिया जाता है। यह स्थिति अधिकारियों को राजनीतिक आकाओं के अनुसार ढलने पर मजबूर कर रही है।

गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी के गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत का कहना है कि गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कई अधिकारी निष्पक्षता को लेकर अविश्वसनीय नजर आते हैं। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को सलाह दी कि गृह विभाग में कार्यरत अधिकारियों की कार्यक्षमता का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाए।

बिकरू कांड का जिक्र

कोर्ट ने कानपुर स्थित बिकरू कांड का भी उल्लेख किया, जहाँ एक डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की जान गई थी। घटना के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ केवल औपचारिक चेतावनी दी गई, जिससे संस्थागत दंडमुक्ति की संस्कृति को बढ़ावा मिला है।

संस्थागत जवाबदेही की आवश्यकता

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति पर उठाए गए सवाल, वास्तव में सभी के लिए एक चेतावनी हैं। अगर जल्द ही बदलाव नहीं किए गए, तो इससे लोकतंत्र और संविधान की ताकत को कमजोर करने का खतरा बना रहेगा। सत्ता और निष्ठा का यह चक्र एक गंभीर समस्या बन चुका है।

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