Allahabad High Court का बड़ा आदेश: गैरकानूनी हिरासत पर रोज देना होगा मुआवजा, अफसरों की सैलरी से होगी वसूली

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में निवारक हिरासत के दुरुपयोग को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने साफ किया है कि अगर किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक बिना कानूनी आधार के हिरासत में रखा गया, तो राज्य सरकार को पीड़ित को 25,000 रुपये प्रति दिन का मुआवजा देना होगा। यह राशि दोषी मजिस्ट्रेट या पुलिस अधिकारियों की सैलरी से वसूली जाएगी। इस आदेश का उद्देश्य पुलिस और मजिस्ट्रेटों की मनमानी पर रोक लगाना है।

क्या था मामला?

गाजियाबाद पुलिस ने 22 फरवरी 2026 को वकील चंद्र पाल सिंह को तब गिरफ्तार किया, जब एक पड़ोसी ने उनकी शिकायत की थी कि वे गेट लगाकर रास्ता रोक रहे हैं। कानून के अनुसार, उन्हें 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना चाहिए था, लेकिन उन्हें केवल असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद, उन्हें बिना उचित प्रक्रिया के जेल भेज दिया गया।

राज्य सरकार की नीतियों की अनदेखी

अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि राज्य सरकार ने 23 मार्च 2021 को जो नीति बनाई थी, उसके बावजूद पुलिस और मजिस्ट्रेट गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम कर रहे हैं। अदालत ने पाया कि बिना उचित सबूत के लोगों को कई दिनों तक हिरासत में रखा जा रहा है। मजिस्ट्रेट शांति भंग की आशंका होने पर बॉन्ड की मांग कर रहे हैं, जो कानून के खिलाफ है।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

बेंच ने स्पष्ट किया कि जिन व्यक्तियों को हिरासत में लिया जाएगा, उन्हें व्यक्तिगत बॉन्ड भरने की अनुमति दी जाएगी, जिसकी राशि 20,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति बॉंड भरने से इनकार करता है, तो उसका इनकार लिखित और ऑडियो-विजुअल रूप में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति हिरासत में रहते हुए बॉंड भरता है, तो उसे तत्काल रिहा किया जाएगा, जिससे मानवाधिकारों का उल्लंघन ना हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का संदर्भ

बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया है, जिसमें मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर हर्जाने की बात की गई है। इन निर्णयों को आधार बनाते हुए, कोर्ट ने चंद्र पाल सिंह के मामले में 75,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। राज्य सरकार को यह राशि 6 हफ्ते के अंदर अदा करनी होगी।

पुलिस कमिश्नरेट को सर्कुलर जारी करने का निर्देश

रजिस्ट्रार (अनुपालन) को यह आदेश दिया गया है कि वह इस फैसले की प्रति एक सप्ताह के अंदर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भेजें, ताकि पुलिस कमिश्नरेट और सभी जिला पुलिस प्रमुखों को उचित दिशा-निर्देश जारी किए जा सकें। इस निर्णय का उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और मनमानी गिरफ्तारी पर लगाम लगाना है।

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