Ajmer हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगस्टरों की दुश्मनी: हर पल गैंगवार का खतरा

The CSR Journal Magazine
अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में गैंगवार का खतरा बना हुआ है। यहां पर लॉरेंस, गोदारा, ठेहट तथा आनंदपाल के करीब 90 गैंगस्टर एक साथ बंद हैं। ये सभी एक-दूसरे के दुश्मन हैं और इसकी वजह से जेल का माहौल काफी तनावपूर्ण है। लॉरेंस गैंग और रोहित गोदारा गैंग के बीच की दुश्मनी किसी से छिपी नहीं है। हाल ही में जेल में हुए डकैत जगन गुर्जर की हत्या ने इस पलड़े को और बढ़ा दिया है। इससे साफ जाहिर है कि गैंगवार का खतरा हमेशा बना रहता है।

बंदियों की दुश्मनी का जाल

अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में बंद 90 से अधिक कुख्यात कैदियों में लॉरेंस गैंग का भांजा सचिन थापन, बॉलीवुड एक्टर सलमान खान की हत्या की साजिश रचने वाला कपिल पंडित और कई अन्य गैंगस्टर शामिल हैं। इन अपराधियों का आपस में दुश्मनी का गणित जटिल है। कई बार छोटी बात पर भी इनकी भड़कने की प्रवृत्ति देखी जाती है। ऐसे में, कोई भी मामूली सी बात भी गैंगवार का कारण बन सकती है।

लोकल गैंग्स का बड़ा नेटवर्क

गैंगस्टर रोहित गोदारा ने लॉरेंस विश्नोई के लिए काम किया, लेकिन बाद में दोनों के बीच मतभेद खड़े हो गए। गोदारा ने विदेश भागने के बाद गोल्डी बराड़ के साथ मिलकर कई वारदातों को अंजाम दिया। इनकी दुश्मनी ने अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में भी एक नई गाथा लिखी है। लॉरेंस के भाई अनमोल की गिरफ्तारी ने मामला और भी बिगाड़ दिया। इसी संदर्भ में, दो गैंग ने एक-दूसरे के खिलाफ न केवल वारदातों की जिम्मेदारी ली, बल्कि दुश्मनी भी बढ़ाई।

दहशत का अड्डा: शिवराज और भानुप्रताप गैंग

12 मई 2009 को चित्तौड़ में हुई हत्या ने शिवराज सिंह और भानुप्रताप गैंग के बीच की दुश्मनी को और बढ़ा दिया। दोनो गैंग के बीच हत्या की घटनाएं आम हो गई हैं। जेल में रहने के बावजूद, दोनों गैंग एक-दूसरे को निशाना बनाने का कोई अवसर नहीं छोड़ते। वर्तमान में शिवराज गैंग के कई सदस्य इसी जेल में बंद हैं, और दुश्मन भानुप्रताप गैंग के सदस्य भी उसी स्थान पर मौजूद हैं। ऐसे में, किसी भी समय गैंगवार हो सकता है।

जेल की सुरक्षा व्यवस्था: कई कमजोरियां भी

हाई सिक्योरिटी जेल में कैदियों को रखने के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था है। हर कैदी के रिकॉर्ड को ध्यान में रखा जाता है और उसे किसी अन्य गैंग के खिलाफ अलग बैरक में रखा जाता है। वर्तमान में इस जेल में 90 हार्डकोर कैदी बंद हैं, जबकि इसकी क्षमता 264 कैदियों की है। जेल प्रशासन का दावा है कि वे लगातार इन कैदियों की मॉनिटरिंग करते हैं। लेकिन, सुरक्षा के बावजूद नई दुश्मनी के पनपने की आशंका बनी रहती है।

जेल प्रशासन का बयान

राजस्थान के डीजी जेल अशोक राठौड़ ने बताया कि कैदियों के आपराधिक बैकग्राउंड की जांच के बाद ही उन्हें अलग-अलग सेल में रखा जाता है। हालांकि, नई दुश्मनी को समझने में मुश्किल हो जाती है। ऐसे

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