राजस्थान यूनिवर्सिटी के पीएचडी दाखिलों में एआई का खेल! फर्जी नेट सर्टिफिकेट से मेरिट में सेंध, 3000 आवेदनों की दोबारा जांच

The CSR Journal Magazine
राजस्थान यूनिवर्सिटी की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में एआई और डिजिटल एडिटिंग टूल्स से नेट-जेआरएफ समेत अन्य दस्तावेजों में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है। शिकायतों के बाद विश्वविद्यालय ने करीब 3,000 आवेदनों की दोबारा जांच शुरू कर दी है।

एआई और एडिटिंग टूल्स से दस्तावेजों में हेरफेर का खुलासा

जयपुर स्थित राजस्थान यूनिवर्सिटी की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में तकनीकी जालसाजी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय को मिली शिकायतों के बाद की गई जांच में पता चला कि कई अभ्यर्थियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और आधुनिक डिजिटल एडिटिंग टूल्स की मदद से अपने शैक्षणिक दस्तावेजों में बदलाव किए हैं। करीब 3,000 आवेदनों में से लगभग 10 प्रतिशत आवेदनों में संदिग्ध गड़बड़ियां मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन सतर्क हो गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोककर सभी दस्तावेजों की दोबारा जांच शुरू कर दी गई है।

नेट-जेआरएफ सर्टिफिकेट में सबसे ज्यादा हेरफेर

जांच में सामने आया कि अधिकांश अभ्यर्थियों ने वरीयता सूची में बेहतर स्थान हासिल करने के लिए नेट और जेआरएफ प्रमाणपत्रों में बदलाव किए। कुछ मामलों में अलग-अलग वर्षों के परीक्षा परिणामों को जोड़कर नया प्रमाणपत्र तैयार किया गया, जबकि कुछ अभ्यर्थियों ने अपनी श्रेणी और अंक बदलकर अधिक लाभ लेने का प्रयास किया। तकनीक का इस्तेमाल इतनी सफाई से किया गया कि पहली नजर में दस्तावेज पूरी तरह वास्तविक प्रतीत हो रहे थे। इसी वजह से विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी आवेदनों का पुनः सत्यापन करने का निर्णय लिया है।

मूल दस्तावेज मांगने पर बंद हुए फोन, कुछ ने दी धमकियां

फर्जीवाड़े की आशंका के बाद विश्वविद्यालय की जांच समिति ने संबंधित अभ्यर्थियों को मूल दस्तावेज लेकर सत्यापन के लिए बुलाया। लेकिन कई छात्रों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए, जबकि कुछ अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार किया और फोन पर धमकी देने तक की कोशिश की। इस स्थिति ने जांच को और जटिल बना दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब प्रत्येक आवेदन और प्रमाणपत्र की गहन पड़ताल कर रहा है ताकि किसी भी अपात्र उम्मीदवार को प्रवेश का लाभ न मिल सके।

कुलगुरु बोलीं- योग्य विद्यार्थियों के साथ नहीं होने देंगे अन्याय

राजस्थान यूनिवर्सिटी की कुलगुरु प्रो. अल्पना कटेजा ने कहा कि विश्वविद्यालय को कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी जांच में एआई की सहायता से दस्तावेजों में हेरफेर के मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेज सत्यापन के दौरान ऐसे मामलों का खुलासा हो सकता था, लेकिन विश्वविद्यालय पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न करना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा और सभी आवेदनों की गहन जांच के बाद ही प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए भविष्य में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा।

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