योगी आदित्यनाथ के नाम पर फर्जीवाड़ा: PMO पहुंची जाली चिट्ठी, CBI जांच में खुला जालसाजी का खेल

The CSR Journal Magazine

योगी आदित्यनाथ के नाम पर फर्जी चिट्ठी से PM मोदी से मांगा टिकट,CBI ने घेरा

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर जाली चिट्ठी का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बीजेपी टिकट मांगने के मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना सरकारी अधिकारियों के नाम का गलत इस्तेमाल है, जो जनता के विश्वास को तोड़ता है।

क्या है मामला?

शिवाजी यादव ने 10 जून 2019 को एक जाली पत्र तैयार किया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के फर्जी हस्ताक्षर थे। इस पत्र में पीएम मोदी से सिफारिश की गई थी कि 2019 के उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव के लिए शिवाजी यादव को खनऊ कैंट निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा का टिकट दिया जाए। जब यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय पहुँचा, तो वहां के अधिकारियों को इसकी प्रमाणिकता पर संदेह हुआ। PMO ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), उत्तर प्रदेश से इसकी जांच करवाई, जहां से पुष्टि हुई कि ऐसा कोई पत्र जारी नहीं किया गया था।

CBI जांच से खुलासा

जांच में पता चला कि आरोपी शिवाजी यादव ने जानने के बावजूद जाली लेटर तैयार किया और इसे प्रधानमंत्री कार्यालय को असली दस्तावेज के रूप में पेश किया। कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर अपराध है, जो भारतीय दंड संहिता, 1860 के तहत आता है, जिसमें जालसाजी और जाली दस्तावेजों का प्रयोग शामिल है। PMO की शिकायत पर 2019 में ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामला दर्ज किया। जांच में पाया गया कि जिस स्पीड पोस्ट से यह पत्र भेजा गया था, उस पर दर्ज मोबाइल नंबर और लोकेशन शिवाजी यादव से जुड़ी थी। इसके अलावा, लिखावट (handwriting) के नमूनों ने भी पुष्टि की कि पत्र और लिफाफा आरोपी द्वारा ही तैयार किया गया था।

कोर्ट का कड़ा संदेश

अडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ज्योति माहेश्वरी ने कहा कि ऐसे मामलों में सरकारी अधिकारियों के नाम का गलत इस्तेमाल करना एक गंभीर अपराध है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ये मामले अक्सर मामूली बातें समझी जाती हैं, जबकि वे सार्वजनिक विश्वास को प्रभावित करते हैं। कोर्ट ने आरोपी को भारतीय पीनल कोड के सेक्शन 465 और 471 के तहत सजा का पात्र बताया है। इस मामले में सबूत स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि आरोपी ने धोखे से जाली दस्तावेज़ बनाए और उनका प्रयोग किया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए कानून को अपना काम करना चाहिए।

गंभीरता से लिया गया मामला

कोर्ट ने यह दर्शाया कि एक संवैधानिक अधिकारी के नाम और कार्यालय का दुरुपयोग करना एक गंभीर मामला है। इससे न केवल सरकारी प्रक्रियाओं की पवित्रता को नुकसान पहुंचता है, बल्कि यह आम जनता के विश्वास को भी प्रभावित करता है। इस पर अदालत ने सख्त विचार किया है।

न्याय की प्रक्रिया में विश्वास

इस मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद, कोर्ट ने फैसला सुनाया, जिसमें आरोपी की गुनाह बखूबी साबित हो गई है। CBI जांच से मिले सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि सरकार के नाम का दुरुपयोग किया गया है, जिसके कारण आरोपी को सजा मिलेगी।

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