भाजपा में महिलाओं की हिस्सेदारी 33% होगी: नई दिशा में कदम
भारतीय राजनीति में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी हमेशा से चर्चा का विषय रही है। भारत की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक दलों के भीतर और विधायी निकायों में आरक्षण की मांग दशकों से की जा रही थी। भारतीय जनता पार्टी ने न केवल अपने सांगठनिक ढांचे में महिलाओं के लिए 33% स्थान सुरक्षित करने का संकल्प लिया है, बल्कि मोदी सरकार के नेतृत्व में संसद और राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का ऐतिहासिक विधेयक पारित किया है।
महिला पदाधिकारियों की बढ़ती संख्या
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने घोषणा की है कि अब उनकी टीम में 33% महिला पदाधिकारी होंगी। यह निर्णय संसदीय बोर्ड से लेकर सचिव स्तर तक लागू होगा, जिससे पार्टी के भीतर महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
राज्य स्तर पर भी होगा लागू
इस फॉर्मूले को राज्यों में भी अपनाने का निर्णय लिया गया है। संगठन महासचिव की निगरानी में इस प्रक्रिया को जल्द ही शुरू किया जाएगा। यह आरक्षण अगली जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रभावी होगा। सरकार का लक्ष्य इसे 2029 के चुनावों तक लागू करना है। इस कदम का उद्देश्य नीति-निर्धारण में महिलाओं की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करना और उन्हें “राजनीतिक निर्णयों की सूत्रधार” बनाना है। वर्तमान में संसदीय बोर्ड में केवल एक महिला सदस्य है, जबकि महासचिव स्तर पर कोई भी महिला नहीं है।
महिलाओं की तुलना में कम सदस्यता
हालांकि, भाजपा में महिलाओं की हिस्सेदारी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 10% से भी कम है। लेकिन अब तय किया गया है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 100 से ज्यादा महिलाओं को जगह दी जाएगी, जिससे महिलाओं की उपस्थिति में बदलाव आएगा।
पार्टी में महिलाओं का नया प्रस्तुतीकरण
भाजपा अध्यक्ष की नई टीम में 33% महिलाओं को शामिल करने की योजना के तहत 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड में 4 महिलाएं, 12 उपाध्यक्ष पदों में से 4, और 11 राष्ट्रीय सचिव पदों में से 3 पद महिलाओं को दिए जाने का निर्णय लिया गया है। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 100 से अधिक महिलाओं को स्थान देने का लक्ष्य रखा गया है।
भाजपा का महिला संबंधी रुख
हाल ही में संसद में नारी वंदन विधेयक पास नहीं हो पाने के बाद, भाजपा ने अन्य राजनीतिक दलों को महिला विरोधी बताने का कदम उठाया है। ऐसे में, संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है।
महिलाओं के लिए अन्य भाजपा नीतियां
भाजपा ने अपनी राजनीतिक रणनीतियों में महिलाओं को ‘मौन मतदाता’ (Silent Voters) के बजाय एक सशक्त शक्ति के रूप में देखा है:
लखपति दीदी योजना: स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
शिक्षा और सुरक्षा: स्नातक तक मुफ्त शिक्षा और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न विरोधी कोड को सख्ती से लागू करने का संकल्प।
इतिहास में पहला बड़ा कदम
इससे पहले, 2007 में भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के नेतृत्व में सुषमा स्वराज की अध्यक्षता में एक समिति बनी थी, जिसका उद्देश्य संगठन में महिलाओं को 33% स्थान देने का था। उस समय यह सवाल भी उठाया गया था कि यह हिस्सेदारी किस आधार पर दी जाएगी।
संविधान संशोधन और वोटिंग
हाल ही में लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन बिल पेश किया गया था, जिसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। लेकिन यह बिल 54 वोट से गिर गया। इस घटना ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।
भविष्य की दिशा
पार्टी के एक सीनियर नेता के अनुसार, इस बार राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 100 से ज्यादा महिलाओं को जगह दी जाएगी। वर्तमान में इसमें कुल 396 सदस्य हैं, इसलिए यह बदलाव ज़रूरी प्रतीत हो रहा है।
भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव
भाजपा के इस निर्णय से न केवल पार्टी के भीतर, बल्कि पूरे देश की राजनीति में एक नई दिशा मिलेगी। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से निश्चित रूप से भारतीय राजनीति में बदलाव आएगा, और महिलाएं निर्णायक भूमिका में आ सकती हैं। भाजपा में महिलाओं की 33% हिस्सेदारी का मुद्दा केवल एक चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक संरचनात्मक बदलाव की ओर संकेत है। सांगठनिक पदों से लेकर संसद तक महिलाओं को स्थान देना भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करेगा। यद्यपि विधायी आरक्षण को पूरी तरह लागू होने में अभी समय है, लेकिन पार्टी स्तर पर उठाया गया 33% का यह कदम महिला नेतृत्व को मुख्यधारा में लाने के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
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