वंदे मातरम को मिलेगा राष्ट्रगान जैसा दर्जा, नए कानून के तहत होगी सजा और जुर्माना

The CSR Journal Magazine
केंद्र सरकार ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान दर्जा देने का फैसला किया है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में लिया गया, जो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद आयोजित की गई थी। इस फैसले के तहत, वंदे मातरम पर वही नियम और पाबंदियां लागू होंगी, जो वर्तमान में राष्ट्रगान पर लागू हैं।

नए नियम और सजा के प्रावधान

काबिनेट के फैसले के अनुसार, बंकिम चंद्र चटर्जी की रचना वंदे मातरम के अपमान या गायन में बाधा डालने पर अब सजा का प्रावधान होगा। इसे राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन के तहत शामिल किया जाएगा। अगर कोई जानबूझकर वंदे मातरम गाने में बाधा डालता है, तो तीन साल की जेल या जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

आधिकारिक गाइडलाइन का जारी होना

गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम के गायन के लिए आधिकारिक प्रोटोकॉल भी जारी किया है। इसमें बताया गया कि वंदे मातरम का संपूर्ण आधिकारिक वर्जन, जिसमें छह श्लोक हैं, प्रमुख राजकीय समारोहों के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा। समारोहों में वंदे मातरम गाने के पहले राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और बाद में राष्ट्रगान गाया जाएगा।

पढ़ाई में वंदे मातरम का स्थान

गृह मंत्रालय ने स्कूलों और कॉलेजों में वंदे मातरम गाने को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया है। इसके तहत स्टूडेंट्स और आम जनता के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। जब वंदे मातरम का प्रदर्शन किसी बैंड द्वारा किया जाएगा, तो ढोल या बिगुल की आवाज से इसकी शुरुआत की जाएगी।

सिनेमा हॉल में विशेष छूट

मंत्रालय ने फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान वंदे मातरम बजाने के लिए विशेष छूट भी प्रदान की है। इसके अनुसार, फिल्म के साउंडट्रैक का हिस्सा होने पर दर्शकों को खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। यह निर्णय दर्शकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया गया है।

राजनीतिक मुद्दा बन चुका है वंदे मातरम

पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान वंदे मातरम को भाजपा ने बंगाली अस्मिता और राष्ट्रवाद के प्रतीक के रूप में पेश किया था। इस दौरान सामूहिक गायन और पदयात्राओं का आयोजन किया गया। इसके 150 वर्षों के पूरे होने पर संसद में विशेष चर्चा भी हुई थी।

वंदे मातरम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1875 में वंदे मातरम की रचना की थी, जो कि भारत के राष्ट्रगीत के रूप में प्रसिद्ध है। इसका पहला सार्वजनिक प्रदर्शन 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में किया गया था। यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक प्रतीक बन गया।

वंदे मातरम पर राजनीति का असर

सरकार ने पिछले साल वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने के अवसर पर संसद में इस पर चर्चा की थी। भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई थी। पीएम मोदी ने इस दौरान कांग्रेस पर वंदे मातरम के टुकड़े करने का आरोप लगाया था।

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