खड़े हनुमान मंदिर पर हर्षा रिछारिया का सरकार को अल्टीमेटम, बोलीं- माफी मांगो, नहीं तो होगा उग्र आंदोलन

The CSR Journal Magazine
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी के तहत कंठाल चौराहे से छत्री चौक की ओर जाने वाले मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है। इस सड़क की जद में करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर भी आ रहा था। प्रशासन ने मंदिर का बाहरी ढांचा हटा दिया, लेकिन वहां मौजूद हनुमान जी की प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली। प्रतिमा को हटाने के प्रयासों की खबर सामने आने के बाद श्रद्धालुओं और संत समाज ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

भारी मशीनों के बाद अब IIT की मदद

प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने को लेकर पहले मशीनों और तकनीकी तरीकों की मदद लेने की बात सामने आई। हालांकि, प्रतिमा को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते मामला संवेदनशील बन गया। अब उज्जैन नगर निगम ने IIT इंदौर के विशेषज्ञों की मदद ली है। IIT की टीम ने प्रतिमा और उसके आसपास की जमीन का निरीक्षण किया है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रतिमा जमीन में कितनी गहराई तक मौजूद है और उसे बिना नुकसान पहुंचाए स्थानांतरित करना संभव है या नहीं। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे का फैसला होने की बात कही गई है।

प्रतिमा को लेकर बढ़ी श्रद्धालुओं की भीड़

खड़े हनुमान की प्रतिमा के नहीं हिलने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। इसके बाद उज्जैन के अलावा दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचने लगे। बड़ी संख्या में लोग प्रतिमा के दर्शन कर रहे हैं और इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं। मंदिर परिसर में धार्मिक गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। संत समाज और स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रतिमा को किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना वहीं सुरक्षित रखा जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने विकास कार्य और धार्मिक आस्था के बीच संतुलन का सवाल भी खड़ा कर दिया है।

मंदिर पहुंचीं हर्षा रिछारिया

इसी बीच साध्वी हर्षानंद गिरि के नाम से पहचानी जाने वाली हर्षा रिछारिया गुरुवार को खड़े हनुमान मंदिर पहुंचीं। उन्होंने वहां पूजा-अर्चना की और प्रतिमा को हटाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया। हर्षा रिछारिया ने कहा कि यह सिर्फ एक मंदिर या प्रतिमा का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से इस मामले में संवेदनशीलता के साथ फैसला लेने की मांग की।

दो दिन का अल्टीमेटम, नहीं तो अनशन

हर्षा रिछारिया ने सरकार और प्रशासन को दो दिन का समय देते हुए कई मांगें रखी हैं। उनकी मांग है कि संबंधित अधिकारी मंदिर पहुंचकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। इसके साथ ही खड़े हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा कराई जाए और उसी स्थान पर मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय में इन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो संत समाज के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने अनशन शुरू करने की भी चेतावनी दी है।

प्रशासन ने भी बदला अपना रुख

विवाद बढ़ने और श्रद्धालुओं के विरोध के बीच प्रशासन की ओर से भी रुख में बदलाव दिखाई दिया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक प्रशासन ने कहा है कि संबंधित पक्षों की सहमति के बिना प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई नहीं की जाएगी और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश होगी। फिलहाल प्रतिमा को अस्थायी शेड के नीचे सुरक्षित रखा गया है। दूसरी ओर, IIT इंदौर की तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि सड़क चौड़ीकरण की योजना में बदलाव किया जाता है या प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने का कोई रास्ता निकलता है।

अब क्या होगा?

खड़े हनुमान मंदिर का मामला अब सिर्फ उज्जैन तक सीमित नहीं रहा है। संत समाज, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सक्रियता के बीच प्रशासन पर भी दबाव बढ़ा है। हर्षा रिछारिया के दो दिन के अल्टीमेटम के बाद सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर सभी की नजरें हैं। वहीं, तकनीकी जांच के बाद मिलने वाली IIT इंदौर की रिपोर्ट इस पूरे मामले में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल प्रशासन के सामने सड़क चौड़ीकरण और लोगों की धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की बड़ी चुनौती है।

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