केंद्र सरकार ला सकती है ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम; नकारात्मक अंक खत्म होने पर लाइसेंस निलंबन या रद्द करने का प्रस्ताव
देश में सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के पालन को लेकर केंद्र सरकार ड्राइविंग लाइसेंस व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया है कि सरकार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए नेगेटिव/पेनल्टी पॉइंट सिस्टम लाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों का रिकॉर्ड केवल चालान और जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनके ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े पॉइंट्स भी प्रभावित होंगे। इस प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे वाहन चालकों की पहचान करना है जो लगातार नियमों का उल्लंघन करते हैं। सरकार का मानना है कि केवल आर्थिक जुर्माना कई मामलों में पर्याप्त नहीं बनता। यदि उल्लंघनों का असर सीधे ड्राइविंग लाइसेंस की स्थिति पर पड़ेगा, तो वाहन चालकों में नियमों का पालन करने की जिम्मेदारी बढ़ सकती है।
क्या कहा नितिन गडकरी ने?
2 सितंबर 2026 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए नेगेटिव पॉइंट सिस्टमलागू करने की योजना का उल्लेख किया। उनके मुताबिक केंद्र सरकार Motor Vehicles Act में बदलावकी तैयारी कर रही है, जिसके जरिए लगातार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को सस्पेंड या कैंसिल करने का रास्ता बनाया जा सकता है। यह घोषणा सड़क सुरक्षा से जुड़े व्यापक सुधारों के बीच हुई है। इससे पहले फरवरी 2026 में भी गडकरी ने graded penalty points system की बात कही थी, जिसके तहत अलग-अलग ट्रैफिक अपराधों के आधार पर ड्राइविंग रिकॉर्ड पर अंक का प्रभाव पड़ सकता है।
कैसे काम कर सकता है नया सिस्टम?
प्रस्तावित व्यवस्था को सरल भाषा में समझें तो ड्राइविंग लाइसेंस को एक तरह के ड्राइविंग बिहेवियर रिकॉर्डसे जोड़ा जाएगा।
मसलन—
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कोई चालक ट्रैफिक नियम तोड़ता है तो उसके रिकॉर्ड पर पेनल्टी/नेगेटिव पॉइंट दर्ज हो सकते हैं।
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गंभीर अपराध के लिए ज्यादा अंक और अपेक्षाकृत कम गंभीर उल्लंघन के लिए कम अंक निर्धारित किए जा सकते हैं।
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बार-बार नियम तोड़ने पर अंक लगातार बढ़ सकते हैं या उपलब्ध पॉइंट बैलेंस घट सकता है।
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निर्धारित सीमा तक पहुंचने के बाद चालक पर अतिरिक्त कार्रवाई हो सकती है।
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गंभीर या लगातार उल्लंघनों की स्थिति में ड्राइविंग लाइसेंस अस्थायी रूप से सस्पेंड किया जा सकता है।
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निर्धारित परिस्थितियों में लाइसेंस रद्द (cancellation) भी किया जा सकता है।
हालांकि, अभी केंद्र सरकार ने अंतिम नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया है कि हर ट्रैफिक अपराध के लिए कितने पॉइंट होंगे, कुल कितने पॉइंट मिलेंगे, पॉइंट कितनी अवधि तक रिकॉर्ड में रहेंगे और किस सीमा पर लाइसेंस सस्पेंड या रद्द होगा। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे 12 पॉइंट, छह महीने की सस्पेंशन या किसी खास अपराध के लिए तय पॉइंट्स वाले दावों को फिलहाल अंतिम सरकारी नियम नहीं माना जाना चाहिए।
सबसे ज्यादा असर किन वाहन चालकों पर पड़ेगा?
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा असर बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों पर पड़ सकता है। खास तौर पर ऐसे मामलों में—
तेज रफ्तार: निर्धारित गति सीमा से लगातार अधिक गति से वाहन चलाना।
रेड लाइट जंप करना: सिग्नल तोड़ना सड़क दुर्घटनाओं का गंभीर कारण बन सकता है।
नशे में ड्राइविंग: शराब या अन्य नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना पहले से ही गंभीर अपराध है।
खतरनाक ड्राइविंग: लापरवाही या जोखिमपूर्ण तरीके से वाहन चलाना।
हेलमेट और सीट बेल्ट का उल्लंघन: सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले चालक भी रिकॉर्ड में आ सकते हैं।
मोबाइल फोन का इस्तेमाल: वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल दुर्घटना का जोखिम बढ़ाता है।
बार-बार नियम तोड़ना: नए सिस्टम का मुख्य निशाना ऐसे repeat offenders हो सकते हैं जो चालान कटने के बावजूद अपनी ड्राइविंग आदतों में सुधार नहीं करते।
केवल चालान भर देने से मामला खत्म नहीं होगा
प्रस्तावित सिस्टम का महत्वपूर्ण पहलू यही है। अभी किसी सामान्य ट्रैफिक उल्लंघन में कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा चालान और जुर्माने के रूप में सामने आता है। नई व्यवस्था का उद्देश्य वाहन चालक के पूरे उल्लंघन रिकॉर्ड को लाइसेंस से जोड़ना है। इससे एक ही व्यक्ति द्वारा बार-बार किए जा रहे उल्लंघनों की पहचान करना आसान हो सकता है। यानी किसी चालक के खिलाफ अलग-अलग दिनों में अलग-अलग जगहों पर कटे चालानों को केवल अलग-अलग घटनाओं के तौर पर देखने के बजाय उसके समग्र ड्राइविंग रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया जा सकता है।
क्या लाइसेंस तुरंत रद्द हो जाएगा?
नहीं। अभी ऐसी कोई अंतिम व्यवस्था घोषित नहीं हुई है कि एक चालान कटते ही ड्राइविंग लाइसेंस रद्द हो जाएगा। प्रस्तावित मॉडल का फोकस graded यानी स्तर आधारित कार्रवाई पर है। इसका अर्थ है कि उल्लंघन की गंभीरता और चालक के पिछले रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा सकती है। बार-बार नियम तोड़ने वाला चालक धीरे-धीरे उस सीमा तक पहुंच सकता है जहां उसका लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल करने की कार्रवाई की जाए। फरवरी 2026 में सामने आए प्रस्ताव के विवरण में भी repeat offenders के लाइसेंस पर अस्थायी सस्पेंशन या स्थाई रद्दीकरण जैसी कार्रवाई की बात कही गई थी।
नया सिस्टम अभी लागू हुआ है या नहीं?
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है। 3 सितंबर 2026 तक यह व्यवस्था देशभर में लागू हो चुका नया ड्राइविंग लाइसेंस नियम नहीं है। केंद्र सरकार इस दिशा में बदलाव और कानूनी व्यवस्था तैयार कर रही है। मंत्री की ताजा घोषणा में Motor Vehicles Act में संशोधन की तैयारी का उल्लेख हुआ है। इसलिए वाहन चालकों को अभी सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी कथित “नए पॉइंट चार्ट” को सरकारी नियम समझकर भ्रमित नहीं होना चाहिए। अंतिम व्यवस्था आने पर यह स्पष्ट होगा कि—
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कुल कितने पॉइंट निर्धारित होंगे।
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प्रत्येक अपराध के लिए कितने पॉइंट मिलेंगे।
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पॉइंट कितने समय तक रिकॉर्ड में रहेंगे।
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अच्छे ड्राइविंग व्यवहार पर पॉइंट वापस मिलेंगे या नहीं।
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किस सीमा पर लाइसेंस सस्पेंड होगा।
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लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया क्या होगी।
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सस्पेंशन के बाद दोबारा लाइसेंस पाने के लिए क्या शर्तें होंगी।
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अलग-अलग राज्यों में इसे लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी।
डिजिटल ट्रैफिक सिस्टम से जुड़ेगा रिकॉर्ड
इस प्रस्ताव का प्रभावी क्रियान्वयन डिजिटल रिकॉर्ड पर काफी हद तक निर्भर करेगा। केंद्र पहले से ही वाहन और ड्राइविंग लाइसेंस रिकॉर्ड के बड़े स्तर पर डेटा सैनिटाइजेशन और डेटा-शेयरिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहा है। जनवरी 2026 में सड़क परिवहन मंत्रालय से जुड़ी एक सरकारी बैठक में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रिकॉर्ड की शुद्धता सुधारने तथा विभिन्न हितधारकों के बीच डिजिटल डेटा-शेयरिंग फ्रेमवर्क बनाने की बात कही गई थी। ऐसी डिजिटल व्यवस्था के मजबूत होने पर अलग-अलग स्थानों पर दर्ज ट्रैफिक उल्लंघनों को चालक के रिकॉर्ड से जोड़ना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
सड़क सुरक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
भारत में सड़क दुर्घटनाओं और यातायात उल्लंघनों को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। सरकार की कोशिश अब केवल दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय खतरनाक ड्राइविंग व्यवहार को पहले से नियंत्रित करने की दिशा में दिखाई दे रही है। पॉइंट आधारित व्यवस्था का मूल विचार यही है कि चालक को यह पता रहे कि लगातार नियम तोड़ने का असर केवल उसकी जेब पर नहीं बल्कि उसके ड्राइविंग लाइसेंस पर भी पड़ सकता है। इससे खास तौर पर उन लोगों पर दबाव बढ़ सकता है जो बार-बार चालान भरकर नियमों को नजरअंदाज करते हैं।
ध्यान रखें: अभी क्या पक्का है और क्या नहीं?
मुद्दा |
स्थिति |
ट्रैफिक उल्लंघनों के लिए पॉइंट
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सरकार ने प्रस्तावित किया है |
नितिन गडकरी का नेगेटिव पॉइंट सि
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पुष्ट |
बार-बार उल्लंघन पर लाइसेंस सस्
|
प्रस्तावित |
हर अपराध के लिए निश्चित पॉइंट |
अभी अंतिम नहीं |
12 पॉइंट की निश्चित राष्ट्रीय
|
अभी अंतिम सरकारी नियम नहीं |
छह महीने की निश्चित सस्पेंशन अ
|
अभी अंतिम नियम नहीं |
देशभर में नया सिस्टम लागू |
अभी नहीं |
सरकार का बड़ा संदेश
कुल मिलाकर, केंद्र की प्रस्तावित नीति का संदेश साफ है- ड्राइविंग लाइसेंस केवल वाहन चलाने की अनुमति नहीं, बल्कि चालक के सड़क व्यवहार का रिकॉर्ड भी बन सकता है। अगर नया ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम कानून में शामिल होकर लागू होता है, तो बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के लिए केवल चालान भरना पर्याप्त नहीं रहेगा। लगातार उल्लंघनों का संचयी असर उनके लाइसेंस की वैधता तक पहुंच सकता है।
अभी नए नियम लागू नहीं
फिलहाल वाहन चालकों को सबसे जरूरी बात यह समझनी चाहिए कि पॉइंट सिस्टम की घोषणा और अंतिम नियम लागू होने में अंतर है। इसलिए 12 पॉइंट या किसी खास अपराध पर तय पॉइंट जैसी सूचनाओं को आधिकारिक अधिसूचना आने तक अंतिम नियम मानना सही नहीं होगा। सरकार के अंतिम प्रस्ताव में ही यह स्पष्ट होगा कि नए सिस्टम का वास्तविक ढांचा क्या होगा।
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