मालदीव होगा द‍िवाल‍िया? सिर्फ डेढ़ महीने का बचा भंडार, भारत ने भी दिया झटका

The CSR Journal Magazine
मालदीव की अर्थव्यवस्था इन दिनों बहुत गंभीर संकट का सामना कर रही है। देश डॉलर संकट में फंसकर अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में मुश्किलें झेल रहा है। मालदीव की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ समय से खाद्य सामग्री, ईंधन, दवाइयों और निर्माण सामग्री जैसे आयात पर निर्भर है। इसकी वजह से, हर बार देश को डॉलर की कमी का सामना करना पड़ता है।

बढ़ता ऋण और उसका बोझ

मालदीव की सरकार ने अतीत में भारी कर्ज लेने की आदत बना ली है, जिसके परिणामस्वरूप मौजूदा सरकार, मोहम्मद मुइज्जू को 1.7 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बोझ का एक बड़ा हिस्सा उनके कार्यकाल से पहले लिया गया था। इनमें चीन और भारत से लिया गया कर्ज शामिल है, जो कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए है।

क्रांतिकारी निर्णय: कर्ज चुकाना है पहली प्राथमिकता

मुइज्जू सरकार ने इस संकट का समाधान खोजने के लिए विदेशी कर्ज चुकाने को प्राथमिकता बनाकर कार्य किया है। एक्सपर्ट्स ने बार-बार चेताया है कि दिवालिया होने का खतरा बढ़ रहा है। 2024 में फिच द्वारा रेटिंग गिराने से खतरा और बढ़ गया। हालांकि, हाल में सुकुक के भुगतान से स्थिति में कुछ सुधार आया है।

बढ़ती कीमतें और पहले से अधिक कर्ज

मालदीव में विदेशी सप्लायर्स को पेमेंट करने में देरी और महंगाई ने इंपोर्ट पर खासा असर डाला है। कारोबारियों का कहना है कि उन्हें भुगतान के लिए दो से तीन हफ्ते तक इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा, डॉलर की कीमत में बढ़ोतरी ने केवल संकट को गहरा किया है।

भारत से मिली मदद, फिर भी संकट बरकरार

डिप्लोमेट की रिपोर्ट के अनुसार, मुइज्जू सरकार ने भारत से मदद मांगी है। भारत ने कई तरह की वित्तीय सहायता प्रदान की है, लेकिन हाल ही में 150 मिलियन डॉलर की बजट सहायता को आगे बढ़ाने के अनुरोध को ठुकरा दिया गया। इससे मालदीव की मौजूदा स्थिति पर असर पड़ा है।

राजनीतिक संकट में बदलता आर्थिक संकट

मालदीव में 2028 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से पहले विपक्षी पार्टियों ने सरकार की आर्थिक नाकामी को मुद्दा बना लिया है। पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने मौजूदा सरकार के कर्ज प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया है। यदि मुइज्जू ने आर्थिक संकट का हल नहीं निकाला, तो राजनीतिक समस्या बन सकती है।

मुइज्जू की चुनौती: क्या बचा पाएंगे देश को?

मुइज्जू ने अपनी पार्टी के सम्मेलन में राष्ट्रपति पद का टिकट हासिल किया है, लेकिन यदि वह आर्थिक विकास पर ध्यान नहीं देंगे, तो चुनाव में दिक्कतें आ सकती हैं। मालदीव का भविष्य इस समय गंभीर आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है।

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